तेलंगाना शब्द का अर्थ है तेलुगू भाषियों की भूमि। तेलंगाना में पर्यटन महत्व के अनेक दर्शनीय स्थल हैं। प्रस्तुत है कुछ प्रमुख आकर्षण:- हैदराबाद:- हैदराबाद शहर के मध्य स्थित चार मीनार प्रसिद्ध और महत्वपूर्ण स्मारक है। इसे यहां के शासक मुहम्मद अली कुतुबशाह ने बनवाया था। इस्लामी वास्तुकला से निर्मित इस चार मीनार स्मारक में चार कलात्मक मीनारें बनी हुई हैं। इसकी ऊंचाई 184 फीट है। हैदराबाद का दूसरा प्रमुख आकर्षण है गोलकुण्डा का किला जो भारत के प्रसिद्ध किलों में शामिल है। इसका निर्माण वारंगल के राजा ने 14वीं शताब्दी में करवाया था। यह गे्रनाइट की एक पहाड़ी पर बना है जिसमें आठ दरवाजे हैं और पत्थर की तीन मील लम्बी मजबूत दीवार से यह घिरा है। यहां के महल एवं मस्जिदों के खंडहर अतीत की कहानी सुनाते हैं। हुसेन सागर झील:- यह हैदराबाद को सिकंदराबाद से अलग करती है। इसके अंदर बीच में गौतम बुद्ध की एक 18 मीटर ऊंची प्रतिमा स्थापित है। यह शहर का प्रमुख आकर्षण है। सालारजंग संग्रहालय पुरातन वस्तुओं का सबसे बड़ा संग्राहलय है। कई शताब्दियों के संग्रह यहां पर मिलते हैं। हैदराबाद से 25 किलोमीटर दूर नलगोंडा मार्ग में स्थित है रामोजी फिल्म सिटी। यह दुनिया का सबसे बड़ा फिल्म स्टूडियो परिसर माना जाता है। 1996 में स्थापित इस स्टूडियो के संस्थापक रामोजी राव थे। यह फिल्म स्टूडियो अनेक आकर्षणों से भरपूर है। यहां आकर वापस जाने का मन ही नहीं करता। हैदराबाद और आसपास के अन्य स्थलों में फलकनुमा पैलेस, चौमहला पैलेस, मक्क मस्जिद, बिड़ला मंदिर, नेहरू प्राणी उद्यान, लाड बाजार, कमल सरोवर, पुरानी हवेली, कुतुबशादी मकबरे, संघी मंदिर, स्नो वल्र्ड, त्रिमुलघरी फोर्ट आदि अनेक पर्यटन स्थल हैं। वारंगल:- वारंगल का किला अपने आप में अलग प्रकार का आकर्षण है। गणपतिदेव ने वर्ष 1199 में इसकी शुरूआत करवाई लेकिन इसका निर्माण उनकी पुत्री रानी रुद्रमा देवी के समय में वर्ष 1261 में पूर्ण हुआ। वर्तमान में खण्डहर के रूप में इस किले की दो दीवारों के साथ-साथ चार विशाल प्रवेश द्वार सांची शैली में हैं जो देश में सबसे बड़े हैं। वास्तुकला, इतिहास एवं पुरानी इमारतों के शौकीन सैलानियों को तो यह किला बहुत ही मजेदार अनुभूति कराता है। इसके अलावा वारंगल में हजार स्तम्भ मंदिर, श्री भद्रकाली देव स्थानम, काकातिया गार्डन, खुश महल, काकातिया जू पार्क, रॉक गार्डन, बुद्धा बावन, पद्मश्री मंदिर, सिद्धेश्वर मंदिर आदि दर्शनीय हैं।करीम नगर:- करीम नगर में एल्गंडल फोर्ट, राजाराजेश्वर स्वामी मंदिर, उज्वला पार्क, डीयर पार्क, रामगिरी फोर्ट, कमान जंक्शन, घंटाघर आदि अनेक स्थल हैं जो देखे जा सकते हैं। आदिलाबाद एतिहासिक जिला है जहां अनेक वंशों ने शताब्दियों तक राज किया। प्रकृति की गोद में बसा यह खूबसूरत स्थान एक उपयुक्त पर्यटक स्थल है। यहां पर बहुत कुछ तो देखने लायक नहीं है लेकिन यहां की प्राकृतिक सुंदरता बरबस अपनी ओर खींच लेती है। इसी से आकर्षित होकर हजारों पर्यटक यहां आते हैं। देवी सरस्वती का घर कहलाने वाला यह स्थान सिटी ऑफ कॉटन के नाम से भी प्रसिद्ध है। मुख्य आकर्षणों में महात्मा गांधी पार्क, बासर मंदिर, केलसापुर नगर, जयनाथ मंदिर, कव्वल वन्य जीन अभ्यारण्य, कूटाला वॉटर फॉल आदि है। भद्राचलम:- यह भगवान श्रीराम से जुड़ा और हिन्दुओं की आस्था का एक प्रमुख धार्मिक स्थल है। इस पुण्य स्थल को दक्षिण की अयोध्या भी कहा जाता है। मान्यता है कि यह वही स्थान है जहां पर्ण कुटि बनाकर भगवान श्री राम ने वनवास का लम्बा समय व्यतीत किया था। कहा जाता है कि रावण ने सीता जी का अपहरण भी यहीं से किया था। निजामाबाद :- प्राचीनकाल में इंद्रपुरी और इन्दूर के नाम से विख्यात तेलंगाना का निजामाबाद अपनी समृद्ध संस्कृति के साथ-साथ ऐतिहासिक स्मारकों और प्राकृतिक सुंदरता के लिए जाता जाता है। प्रमुख पर्यटन स्थल है निजाम सागर एवं अशोक सागर जो अपनी मनमोहक खूबसूरती के लिए प्रसिद्ध है। पांच सौ वर्ष पुराने कंठेश्वर मंदिर का वास्तुशिल्प देखते ही बनता है। साथ ही बड़ा पहाड़ दरगाह, सारंगपुर तथा आर्कियोलॉजिकल एवं हेरिटेल म्यूजियम दर्शनीय है। नागगोंडा:- यह पर्यटन की दृष्टि से तेलंगाना का मुख्य भाग है। यहां की आर्थिक स्थिति भी पर्यटन पर ही निर्भर करती है। यहां के प्रमुख दर्शनीय स्थलों में है भोनगिर फोर्ट, जो इतिहास एवं हाइकिंग के लिए जाना जाता है। साथ ही सोमेश्वर मंदिर, नलगोंडा भोद्रायी, ओंती स्थाम्ब्हम तथा राजीव गांधी पार्क मेहबूब नगर:- हैदराबाद से सौ किलोमीटर दूर मेहबूब नगर तेलंगाना के सबसे बड़े जिलों में दूसरा जिला है। यहां पर मंदिर, चिडिय़ाघर, मयूरी पार्क,टीपू सुल्तान चौक देखे जा सकते हैं।