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Daily Business Newspaper | A Knowledge Powerhouse in Hindi
देश की राजनीतिक व्यवस्था या चुनाव जीतने-हारने में धर्म एवं जाति शब्द का जो रोल हुआ करता था गत कुछ वर्षों से वह किस तरह बुजुर्ग लोगों को पेंशन (सम्मान निधि)......
धर्मशास्त्रों में कहा गया है कि सुख व दु:ख जीवन चक्र के दो अहम् पहलू हैं। सुख का कारण भी कर्म है तथा दु:खों के कारण भी व्यक्ति के कर्म ही हैं। तीर्थंकर भगवान...
विकास के नये दौर को हम जिस तरह Labour v/s Leisure (परिश्रम के स्थान पर आराम) इकोनॉमी और उससे पैदा होने वाली बेरोजगारी बढ़ाने वाली समाज व्यवस्था के नाम से...
जब कोई देश Global Capitalist System की व्यवस्था को अपना लेता है तो वहां पूंजी प्रधान ऐसे अनेक घटनाक्रम घटित होते चले जाते हैं जो दिखने में व्यक्ति की सफलता......
जब कोई देश Creative के स्थान पर Distributive Capitalism या जो रुपैया जमा है उसे ही नहीं वरन अप्रत्याशित उधार लेकर विकास करने की प्रक्रिया को अपनाते हुए गति......