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Daily Business Newspaper | A Knowledge Powerhouse in Hindi
‘‘दृष्टव्य है कि क्रोध से भ्रम पैदा होता है और भम्र से बुद्धि व्यग्र होती है जो मनुष्य के पतन का कारण है।’’
One should...be able to see things as hopeless and yet be determined to make them otherwise.
वर्ष 1991 से Free And Market Economy की जिन नीतियों पर आश्रित विकास के मॉडल पर हम आगे बढ़ रहे हैं उसकी प्रकृति के बारे में यह कहा जाता है कि यह व्यवस्था ...
कुछ लोग पुरुषार्थी होते हैं तथा कुछ प्रमादी। कुछ लोग संयमी होते हैं तथा कुछ असंयमी। पुरुषार्थ और संयम मनुष्य की सफलता की गाड़ी के दो अहम् पहिये हैं। जिनके...
विकास के नये दौर को हम जिस तरह Labour v/s Leisure (परिश्रम के स्थान पर आराम) इकोनॉमी और उससे पैदा होने वाली बेरोजगारी बढ़ाने वाली समाज व्यवस्था के नाम से...
जब कोई देश Global Capitalist System की व्यवस्था को अपना लेता है तो वहां पूंजी प्रधान ऐसे अनेक घटनाक्रम घटित होते चले जाते हैं जो दिखने में व्यक्ति की सफलता......
जब कोई देश Creative के स्थान पर Distributive Capitalism या जो रुपैया जमा है उसे ही नहीं वरन अप्रत्याशित उधार लेकर विकास करने की प्रक्रिया को अपनाते हुए गति......