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Daily Business Newspaper | A Knowledge Powerhouse in Hindi
‘‘दृष्टव्य है कि क्रोध से भ्रम पैदा होता है और भम्र से बुद्धि व्यग्र होती है जो मनुष्य के पतन का कारण है।’’
A ship ought not to be held by one anchore, nor life by a single hope.
देश की राजनीतिक व्यवस्था या चुनाव जीतने-हारने में धर्म एवं जाति शब्द का जो रोल हुआ करता था गत कुछ वर्षों से वह किस तरह बुजुर्ग लोगों को पेंशन (सम्मान निधि)......
क्रोध, मान, माया और लोभ मानव व्यक्तित्व के चार अहम् शत्रु हैं क्योंकि ये उसके जीवन में एेसा विष घोलते हैं जिससे उसकी आशाएं, आकाक्षाएं तथा अपेक्षाएं अनन्त हो...
विकास के नये दौर को हम जिस तरह Labour v/s Leisure (परिश्रम के स्थान पर आराम) इकोनॉमी और उससे पैदा होने वाली बेरोजगारी बढ़ाने वाली समाज व्यवस्था के नाम से...
जब कोई देश Global Capitalist System की व्यवस्था को अपना लेता है तो वहां पूंजी प्रधान ऐसे अनेक घटनाक्रम घटित होते चले जाते हैं जो दिखने में व्यक्ति की सफलता......
जब कोई देश Creative के स्थान पर Distributive Capitalism या जो रुपैया जमा है उसे ही नहीं वरन अप्रत्याशित उधार लेकर विकास करने की प्रक्रिया को अपनाते हुए गति......