हालांकि ताजे फल और सब्जियों का कारोबार रोजमर्रा के सामान से ज्यादा चुनौतीपूर्ण है। इनमें गुणवत्ता, मौसम, खराब होने की अवधि और रोजाना डिमांड में बदलाव जैसी कई समस्याएं होती हैं। कंपनियों के लिए लगातार एक जैसी गुणवत्ता बनाए रखना भी बड़ी चुनौती है। गत कुछ वर्षों में क्विक-कॉमर्स कंपनियों ने खरीद, सप्लाई चेन और गुणवत्ता नियंत्रण की व्यवस्था को मजबूत करने पर काफी निवेश किया है। इसी वजह से अब अपने ब्रांड के तहत ताजे उत्पाद बेचना पहले के मुकाबले ज्यादा आसान हो रहा है। जेप्टो का ब्लूम मॉडल किसान एकीकरण कार्यक्रम पर आधारित है। कंपनी ने फरवरी, 2023 में किसानों से सीधे खरीदारी के लिए अलग एप और कार्यक्रम शुरू किया था। इसके तहत करीब 1,000 उत्पादकों से सीधे खरीदारी की व्यवस्था की गई है। आठ राज्यों में कंपनी किसानों के साथ मिलकर कीमत, बीज और फसल की गुणवत्ता, संग्रह, खराब होने वाले माल और वित्तीय व्यवस्था जैसे क्षेत्रों पर काम कर रही है। स्विगी भी गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों के साथ साझेदारी के जरिए किसानों और उत्पादकों से सीधे ताजे फल-सब्जियां खरीदने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। टाटा के स्वामित्व वाली बिग बास्केट पहले ही इस मॉडल को बड़े स्तर पर अपना चुकी है। इसके साथ ही ताजे उत्पादों के क्षेत्र में काम करने वाले नए कारोबारों में निवेश की दिलचस्पी भी बढ़ रही है। फर्स्टक्लब, ओरिजिन फ्रेश, हैंडपिक्डलक, फ्रेशली और लव-लोकल जैसे नए कारोबारों ने मिलकर इस क्षेत्र में 80 करोड़ डॉलर से ज्यादा की पूंजी जुटाई है। इससे संकेत मिलता है कि ताजे उत्पादों का बाजार आने वाले समय में बड़ा अवसर बन सकता है। ताजे उत्पादों के कारोबार में ग्राहक के लिए गुणवत्ता सबसे महत्वपूर्ण है। फल और सब्जियों की ताजगी, एक जैसी गुणवत्ता और सही समय पर डिलीवरी ग्राहक के अनुभव को सीधे प्रभावित करती है। इसी वजह से प्राइवेट लेबल के साथ कंपनियां अब सप्लाई चेन, गुणवत्ता नियंत्रण और सीधे किसानों से खरीदारी पर ज्यादा ध्यान दे रही हैं। आने वाले समय में क्विक-कॉमर्स कंपनियों के बीच मुकाबला केवल डिलीवरी की रफ्तार का नहीं, बल्कि ताजगी, गुणवत्ता और अपने ब्रांड की पहचान का भी होगा। इंस्टामार्ट के मुताबिक उसके प्लेटफॉर्म पर ताजे उत्पादों की हिस्सेदारी करीब 22-25 प्रतिशत है, जबकि एक साल पहले यह करीब 18 प्रतिशत थी। जेप्टो की डेली गुड्स में हिस्सेदारी करीब 12-14 प्रतिशत और ब्लिंकिट की होलसेल फार्म में करीब 8-10 प्रतिशत बताई गई है। कुल मिलाकर क्विक-कॉमर्स कंपनियां अब केवल तेजी से सामान पहुंचाने के मॉडल से आगे बढक़र अपने ब्रांड के उत्पाद बेचने की रणनीति पर जोर दे रही हैं। ताजे फल और सब्जियों का प्राइवेट लेबल कारोबार इस बदलाव का अगला बड़ा केंद्र बनता दिखाई दे रहा है।