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07-09-2026

डेटा सेंटर की कैपेसिटी 2029 तक बढक़र 6 गीगावाट होने की उम्मीद

  •  भारत का डेटा सेंटर इंडस्ट्री की कैपेसिटी जून, 2026 तक 1.6 गीगावाट की क्षमता से बढक़र 2029 तक 6 गीगावाट होने की उम्मीद है। इसके लिए करीब 110 अरब डॉलर की पूंजी की जरूरत होगी। इस वृद्धि को एआई वर्कलोड और हाइपरस्केल क्लाउड की तैनाती से बढ़ावा मिलेगा। यह जानकारी एक रिपोर्ट में दी गई। जेएलएल की रिपोर्ट के अनुसार, 2026 की पहली छमाही में डेटा सेंटर क्षेत्र में 101 मेगावाट की मांग दर्ज की गई, जो गत तीन वर्षों के पहली छमाही के औसत से 20 प्रतिशत से अधिक है। इस अवधि में आपूर्ति भी मजबूत रही और 85 मेगावाट क्षमता जोड़ी गई, जो मुख्य रूप से मुंबई और चेन्नई में केंद्रित रही। पहले से बुक की गई क्षमता की तेजी से डिलीवरी के कारण डेटा सेंटर में मौजूद खाली क्षमता घटकर रिकॉर्ड निचले स्तर 2.8 प्रतिशत पर आ गई, जो बाजार की मजबूत स्थिति को दर्शाता है। रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक हाइपरस्केलर कंपनियां बाजार की गतिशीलता को मूल रूप से बदल रही हैं। वे नई क्षमता का करीब 30 प्रतिशत हिस्सा सेल्फ-बिल्ड सुविधाओं के जरिए विकसित करने की प्रतिबद्धता जता रही हैं। हाइपरस्केल सेल्फ-बिल्ड परियोजनाओं के तहत 2029 तक 1.4 गीगावाट क्षमता उपलब्ध होने की उम्मीद है। बड़े निवेश के चलते हैदराबाद और विशाखापत्तनम जैसे शहर गीगावाट-स्तरीय डेटा सेंटर हब में बदल रहे हैं, जबकि मुंबई और चेन्नई जैसे स्थापित बाजार भी तेजी से विस्तार कर रहे हैं। हालिया केंद्रीय बजट में विदेशी क्लाउड सेवा प्रदाताओं के लिए 20 साल की टैक्स हॉलिडे की घोषणा की गई है, जिसे 31 मार्च, 2047 तक बढ़ाया गया है। इससे निवेश प्रतिबद्धताओं में काफी तेजी आई है। इस नीति के तहत 50 अरब डॉलर से अधिक की विदेशी पूंजी निवेश प्रतिबद्धताएं आकर्षित हुई हैं। यह पहल भारत को वैश्विक एआई और क्लाउड सेवाओं की रूटिंग के लिए एक वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करने के साथ-साथ लंबी अवधि के पूंजी निवेश के जोखिम को कम करने में मदद कर रही है। इस विस्तार के लिए रियल एस्टेट निर्माण पर 4 अरब डॉलर, मैकेनिकल, इलेक्ट्रिकल और प्लंबिंग (एमईपी) बुनियादी ढांचे पर 18 अरब डॉलर तथा सर्वर और रैक समेत आईटी उपकरणों पर 88 अरब डॉलर की जरूरत होगी। रिपोर्ट में कहा गया है कि 2033 तक छोटे मॉड्यूलर रिएक्टर (एसएमआर) विकसित होने से बड़े डेटा सेंटर कैंपस के लिए ऑफ-ग्रिड बिजली समाधान की भविष्य में संभावनाएं पैदा हो सकती हैं।

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डेटा सेंटर की कैपेसिटी 2029 तक बढक़र 6 गीगावाट होने की उम्मीद

 भारत का डेटा सेंटर इंडस्ट्री की कैपेसिटी जून, 2026 तक 1.6 गीगावाट की क्षमता से बढक़र 2029 तक 6 गीगावाट होने की उम्मीद है। इसके लिए करीब 110 अरब डॉलर की पूंजी की जरूरत होगी। इस वृद्धि को एआई वर्कलोड और हाइपरस्केल क्लाउड की तैनाती से बढ़ावा मिलेगा। यह जानकारी एक रिपोर्ट में दी गई। जेएलएल की रिपोर्ट के अनुसार, 2026 की पहली छमाही में डेटा सेंटर क्षेत्र में 101 मेगावाट की मांग दर्ज की गई, जो गत तीन वर्षों के पहली छमाही के औसत से 20 प्रतिशत से अधिक है। इस अवधि में आपूर्ति भी मजबूत रही और 85 मेगावाट क्षमता जोड़ी गई, जो मुख्य रूप से मुंबई और चेन्नई में केंद्रित रही। पहले से बुक की गई क्षमता की तेजी से डिलीवरी के कारण डेटा सेंटर में मौजूद खाली क्षमता घटकर रिकॉर्ड निचले स्तर 2.8 प्रतिशत पर आ गई, जो बाजार की मजबूत स्थिति को दर्शाता है। रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक हाइपरस्केलर कंपनियां बाजार की गतिशीलता को मूल रूप से बदल रही हैं। वे नई क्षमता का करीब 30 प्रतिशत हिस्सा सेल्फ-बिल्ड सुविधाओं के जरिए विकसित करने की प्रतिबद्धता जता रही हैं। हाइपरस्केल सेल्फ-बिल्ड परियोजनाओं के तहत 2029 तक 1.4 गीगावाट क्षमता उपलब्ध होने की उम्मीद है। बड़े निवेश के चलते हैदराबाद और विशाखापत्तनम जैसे शहर गीगावाट-स्तरीय डेटा सेंटर हब में बदल रहे हैं, जबकि मुंबई और चेन्नई जैसे स्थापित बाजार भी तेजी से विस्तार कर रहे हैं। हालिया केंद्रीय बजट में विदेशी क्लाउड सेवा प्रदाताओं के लिए 20 साल की टैक्स हॉलिडे की घोषणा की गई है, जिसे 31 मार्च, 2047 तक बढ़ाया गया है। इससे निवेश प्रतिबद्धताओं में काफी तेजी आई है। इस नीति के तहत 50 अरब डॉलर से अधिक की विदेशी पूंजी निवेश प्रतिबद्धताएं आकर्षित हुई हैं। यह पहल भारत को वैश्विक एआई और क्लाउड सेवाओं की रूटिंग के लिए एक वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करने के साथ-साथ लंबी अवधि के पूंजी निवेश के जोखिम को कम करने में मदद कर रही है। इस विस्तार के लिए रियल एस्टेट निर्माण पर 4 अरब डॉलर, मैकेनिकल, इलेक्ट्रिकल और प्लंबिंग (एमईपी) बुनियादी ढांचे पर 18 अरब डॉलर तथा सर्वर और रैक समेत आईटी उपकरणों पर 88 अरब डॉलर की जरूरत होगी। रिपोर्ट में कहा गया है कि 2033 तक छोटे मॉड्यूलर रिएक्टर (एसएमआर) विकसित होने से बड़े डेटा सेंटर कैंपस के लिए ऑफ-ग्रिड बिजली समाधान की भविष्य में संभावनाएं पैदा हो सकती हैं।


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