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Daily Business Newspaper | A Knowledge Powerhouse in Hindi

10-09-2026

लेकिन स्टोर विजिट घटी

  •  स्नैक्स की कैटेगरी में ग्राहक अपनी खरीदारी के मौकों को नए तरीके से बांट रहे हैं और ज्यादा पसंद वाले या प्रीमियम विकल्प भी तलाश रहे हैं। कुल स्नैकिंग मौकों की संख्या अप्रैल, 2023 से मार्च 2024 के दौरान 92.7 थी, जो अप्रैल, 2025 से मार्च, 2026 के दौरान घटकर 90.9 रह गई। इसकी बड़ी वजह बिस्किट की खरीदारी के मौकों में कमी रही। वहीं नमकीन स्नैक्स की खरीदारी के मौके लगभग स्थिर रहे, जबकि चॉकलेट की खरीदारी के मौकों में बढ़ोतरी हुई। स्नैकिंग में ग्राहक अब ज्यादा विकल्प आजमा रहे हैं। नमकीन स्नैक्स कुछ ऐसे मौके अपने हिस्से में ले रहे हैं, जहां पहले बिस्किट खरीदे जाते थे। वहीं बिस्किट की जो खरीदारी अभी भी हो रही है, उसमें रोजमर्रा की सामान्य खपत के बजाय ज्यादा स्वाद, मजे और प्रीमियम विकल्पों की ओर रुझान बढ़ रहा है। प्रीमियम और ज्यादा पसंद वाले उत्पादों की खरीदारी का हिस्सा 28.8 प्रतिशत से बढक़र 35.5 प्रतिशत हो गया है। इसके उलट रोजमर्रा की जरूरत और वैल्यू वाले उत्पादों की खरीदारी का हिस्सा 47.3 प्रतिशत से घटकर 39.1 प्रतिशत रह गया। हालांकि, इसमें एक सकारात्मक संकेत भी है। ग्राहकों में नए उत्पाद आजमाने की इच्छा अभी बनी हुई है। आगे वही ब्रांड सफल होंगे जो ज्यादा ग्राहकों को अपने साथ जोड़ पाएंगे, लोगों को नए और अलग विकल्प देंगे, अपनी अलग पहचान बनाएंगे और हर खरीदारी को ग्राहक के लिए ज्यादा महत्वपूर्ण और उपयोगी बना पाएंगे।

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लेकिन स्टोर विजिट घटी

 स्नैक्स की कैटेगरी में ग्राहक अपनी खरीदारी के मौकों को नए तरीके से बांट रहे हैं और ज्यादा पसंद वाले या प्रीमियम विकल्प भी तलाश रहे हैं। कुल स्नैकिंग मौकों की संख्या अप्रैल, 2023 से मार्च 2024 के दौरान 92.7 थी, जो अप्रैल, 2025 से मार्च, 2026 के दौरान घटकर 90.9 रह गई। इसकी बड़ी वजह बिस्किट की खरीदारी के मौकों में कमी रही। वहीं नमकीन स्नैक्स की खरीदारी के मौके लगभग स्थिर रहे, जबकि चॉकलेट की खरीदारी के मौकों में बढ़ोतरी हुई। स्नैकिंग में ग्राहक अब ज्यादा विकल्प आजमा रहे हैं। नमकीन स्नैक्स कुछ ऐसे मौके अपने हिस्से में ले रहे हैं, जहां पहले बिस्किट खरीदे जाते थे। वहीं बिस्किट की जो खरीदारी अभी भी हो रही है, उसमें रोजमर्रा की सामान्य खपत के बजाय ज्यादा स्वाद, मजे और प्रीमियम विकल्पों की ओर रुझान बढ़ रहा है। प्रीमियम और ज्यादा पसंद वाले उत्पादों की खरीदारी का हिस्सा 28.8 प्रतिशत से बढक़र 35.5 प्रतिशत हो गया है। इसके उलट रोजमर्रा की जरूरत और वैल्यू वाले उत्पादों की खरीदारी का हिस्सा 47.3 प्रतिशत से घटकर 39.1 प्रतिशत रह गया। हालांकि, इसमें एक सकारात्मक संकेत भी है। ग्राहकों में नए उत्पाद आजमाने की इच्छा अभी बनी हुई है। आगे वही ब्रांड सफल होंगे जो ज्यादा ग्राहकों को अपने साथ जोड़ पाएंगे, लोगों को नए और अलग विकल्प देंगे, अपनी अलग पहचान बनाएंगे और हर खरीदारी को ग्राहक के लिए ज्यादा महत्वपूर्ण और उपयोगी बना पाएंगे।


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