किचन एप्लायंसेज, कन्ज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक प्रोडक्ट्स, फर्नीचर, फर्निशिंग का मार्केट नये चरण में प्रवेश कर गया है। युवा पीढ़ी विशेष रूप से जेन जी और मिलेनियल्स उत्पादों को पहले से कहीं जल्दी अपगे्रड कर रही है। यही नहीं वे ब्राण्ड चेंज करने में भी नहीं हिचकते। पूर्व की बात करें तो सात से दस वर्ष की परचेज साइकिल होती थी लेकिन अब यह घटकर 2-3 वर्ष पर आ गई है। करीब 46 प्रतिशत कन्ज्यूमर्स दो से तीन वर्ष में कन्ज्यूमर ड्यूरेबल्स को रिप्लेस कर रहे हैं। 63 प्रतिशत ब्राण्ड को स्विच कर लेते हैं। जीआई गु्रप होल्डिंग के कंट्री मैनेजर के अनुसार यंग गु्रप्स में यह शिफ्ट ज्यादा नजर आ रहा है। गत करीब तीन वर्षों में 93 प्रतिशत जैनरेशन जेड और 72 प्रतिशत मिलेनियल्स ने ब्राण्ड्स को स्विच किया है। पुरानी पीढ़ी के मुकाबले में यह आंकड़ा दिया गया है। एक सेगमेंट में ही ब्राण्ड स्विच प्रभावी नहीं है बल्कि होम एप्लायंसेज, अन्य किचन रेंज, जनरल मर्केंडाइज में भी ऐसा देखा जा रहा है। उनके अनुसार फर्नीचर सेगमेंट में भी अपगे्रड की चुल उन्हें रहती हैं। अरबन मार्केट्स में बदलाव, नयापन देखने की चाह काफी ज्यादा है और यह बाजार को पनपने का अवसर भी देती है। फर्नीचर के बारे में गौर करें तो हम पाते हैं कि लोग अपनी लाइफ में एक या दो बार ही फर्नीचर रिप्लेस करते थे लेकिन अब यह रूटीन चेंज है। पैपरफ्राय के मार्केटिंग एंड फर्नीचर कैटेगरी हैड के अनुसार अपगे्रडेशन आज फास्ट है। सोफा, रेक्लाइनर्स, होम डेकोर, विंडोज में विशेष रूप से यह ट्रेंड देखा जा रहा है। किचनवेयर कम्पनी द इंडस वैली की को-फाउंडर के अनुसार हैल्थ और फंक्शनेलिटी इसमें बड़ा रोल प्ले कर रहे हैं। यदि यंग कस्टमर को किचन में कोई चीज काम करने में परेशानी दे रही है, तो वह तरंत अपगे्रड लेता है। कुकवेयर, किचनवेयर, किचन एप्लायंसेज श्रेणी में ऑर्डर वैल्यूज शॉट आप हो रहे हैं। किचन में समय की बचत हो, इस पर भी ध्यान दिया जाता है। 37 प्रतिशत यंग प्रोफेशनल्स 45 प्रतिशत तक फाइनेंस्ड परचेज करते हैं। ओल्ड जैनरेशन प्रोडक्ट को करीब एक दशक तो काम लेने की सोचते थे लेकिन अब ऐसा नहीं है। इसमें फाइनेंस सुविधाओं ने बढ़ोतरी की है। 57 प्रतिशत कन्ज्यूमर्स ईएमआई, बाय नाओ पे लेटर(बीएनपीएल) स्कीम का यूज करते हैं। अपफ्रंट पेमेंट्स का साइकोलॉजिकल बेरियर अब कमजोर पड़ रहा है। एक्सपर्ट्स के अनुसार मंथली अफोर्डेबिलिटी ज्यादा अहम बन रही है। इसमें भी प्रीमियमाइजेशन का के्रज ज्यादा है। बैंगलुरु की साइकोलॉजिस्ट के अनुसार अब अपगे्रडेशन एक रूटीन है। वे रैक्लाइनर के नये मॉडल्स को चेंज करती रहती है। फीचर, डिजाइन पर फोकस करती है। ईएमआई के साथ हर दो वर्ष में चेंज करना बुरा नहीं है। पुणे के शैफ अनुज के अनुसार रिव्यू, फीचर्स के साथ अपगे्रडेशन निर्णय में मदद करता है। एयर फ्रायर, कॉफी मशीन आदि किचन एप्लायंसेज के केस में ऐसा है। कम्पनियों की ओर से समय-समय पर दिये जाने वाले ऑफर्स भी रिफे्रश साइकिल को बढ़ावा देते हैं। फेस्टीवल सीजन पर दिये वाले डिस्काउंट ऑफर भी अपगे्रडेशन को बढ़ावा देते हैं। एक कारण यह भी है कि लोग पुरानी चीज से जल्दी बोर हो रहे हैं, दिमागी तौर पर कुछ नया चाहते हैं। दूसरा प्रोडक्ट्स में इनोवेटिव फीचर्स आते हैं,जो उन्हें आकर्षित करते हैं।