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15-09-2026

आईटीसी का अगले पांच साल में ‘आशीर्वाद’ ब्रांड पर रहेगा फोकस

  •  आईटीसी अपने प्रमुख खाद्य ब्रांड ‘आशीर्वाद’ को नई ऊंचाइयों पर ले जाने की तैयारी में है। कंपनी को उम्मीद है कि अगले पांच वर्ष में आशीर्वाद के उत्पादों पर होने वाला उपभोक्ता खर्च मौजूदा के करीब 10,000 करोड़ रुपये से बढक़र 20,000 करोड़ रुपये हो जाएगा। आईटीसी के खाद्य प्रभाग के सीईओ और कार्यकारी निदेशक  ने कहा कि कंपनी आशीर्वाद के लिए दोहरी रणनीति पर काम कर रही है। इसके तहत एक ओर आटा कारोबार को और मजबूत किया जाएगा, वहीं दूसरी ओर रेडी-टू-कुक, फ्रोजन फूड और अन्य संबंधित खाद्य श्रेणियों में विस्तार किया जाएगा। मई, 2002 में पूरी तरह गेहूं के आटा ब्रांड के रूप में शुरू हुआ आशीर्वाद आज देश के प्रमुख रसोई ब्रांड में शामिल है। कंपनी के पोर्टफोलियो में 200 से अधिक एसकेयू (स्टॉक कीपिंग यूनिट्स) हैं। आटा कारोबार से आगे बढ़ते हुए ब्रांड ने स्टेपल्स, मसाले, ताजा खाद्य पदार्थ और फ्रोजन उत्पादों में भी अपनी मौजूदगी बढ़ाई है। आटा श्रेणी में अब भी विकास की काफी संभावनाएं हैं। उपभोक्ताओं की बदलती जरूरतों को देखते हुए कंपनी मल्टीग्रेन, हाई-प्रोटीन, ऑर्गेनिक और मिलेट आधारित आटा जैसे उत्पादों पर जोर दे रही है। उनके अनुसार, प्रीमियम उत्पादों का मतलब केवल अधिक कीमत नहीं है, बल्कि बेहतर गुणवत्ता, सुविधा और स्वास्थ्य एवं पोषण संबंधी वास्तविक लाभ देना भी है। आशीर्वाद ब्रांड अब ऐसे उत्पादों के जरिये नए उपभोक्ता वर्ग और नए इस्तेमाल के अवसर तलाश रहा है, जिनमें बेसन, सेवईं, रवा, सोया चंक्स, फ्रोजन नान और पराठे तथा ताजी चटनी और सांभर शामिल हैं। कंपनी ने रेडी-टू-कुक श्रेणी में भी कदम बढ़ाया है। आशीर्वाद की तैयार चपातियां विशेष रूप से समय की कमी से जूझ रहे युवा परिवारों को ध्यान में रखकर पेश की गई हैं। एक पैक में 10 चपातियां होती हैं और इनमें किसी तरह के अतिरिक्त ‘प्रिजर्वेटिव’ नहीं डाले जाते। इनका इस्तेमाल पांच से छह के बीच किया जा सकता है। आशीर्वाद का एक और नया दांव सत्तू है। आईटीसी ने बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल में आशीर्वाद चना सत्तू पेश किया है। कंपनी के मुताबिक सत्तू प्रोटीन और फाइबर से भरपूर होने के साथ-साथ स्वाद और उपयोगिता के लिहाज से भी महत्वपूर्ण खाद्य पदार्थ है। फिलहाल कंपनी ने इसे पूर्वी भारत के बाजारों में उतारा है, लेकिन अब इसे देशभर में पहुंचाने की योजना है। आशीर्वाद चना सत्तू पारंपरिक तरीके से बालू में भूनकर तैयार किया जाता है। बिहार में जीरा युक्त चना सत्तू और पश्चिम बंगाल व झारखंड में सादा चना सत्तू उपलब्ध है। कंपनी ने 10 रुपये का ‘वैल्यू पैक’ भी पेश किया है, जिसमें 10 ग्राम प्रोटीन मिलता है। वित्त वर्ष 2025-26 में आईटीसी के रोजमर्रा के उपभोग का सामान (एफएमसीजी) करीब 28 करोड़ परिवारों तक पहुंचा और इनसे लगभग 37,000 करोड़ रुपये का उपभोक्ता खर्च दर्ज हुआ। कंपनी का लक्ष्य अब आशीर्वाद को केवल आटा ब्रांड तक सीमित रखने के बजाय एक ऐसे व्यापक खाद्य ब्रांड के रूप में विकसित करना है, जो रोजमर्रा के भोजन से जुड़ी अलग-अलग जरूरतों को पूरा कर सके।

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आईटीसी का अगले पांच साल में ‘आशीर्वाद’ ब्रांड पर रहेगा फोकस

 आईटीसी अपने प्रमुख खाद्य ब्रांड ‘आशीर्वाद’ को नई ऊंचाइयों पर ले जाने की तैयारी में है। कंपनी को उम्मीद है कि अगले पांच वर्ष में आशीर्वाद के उत्पादों पर होने वाला उपभोक्ता खर्च मौजूदा के करीब 10,000 करोड़ रुपये से बढक़र 20,000 करोड़ रुपये हो जाएगा। आईटीसी के खाद्य प्रभाग के सीईओ और कार्यकारी निदेशक  ने कहा कि कंपनी आशीर्वाद के लिए दोहरी रणनीति पर काम कर रही है। इसके तहत एक ओर आटा कारोबार को और मजबूत किया जाएगा, वहीं दूसरी ओर रेडी-टू-कुक, फ्रोजन फूड और अन्य संबंधित खाद्य श्रेणियों में विस्तार किया जाएगा। मई, 2002 में पूरी तरह गेहूं के आटा ब्रांड के रूप में शुरू हुआ आशीर्वाद आज देश के प्रमुख रसोई ब्रांड में शामिल है। कंपनी के पोर्टफोलियो में 200 से अधिक एसकेयू (स्टॉक कीपिंग यूनिट्स) हैं। आटा कारोबार से आगे बढ़ते हुए ब्रांड ने स्टेपल्स, मसाले, ताजा खाद्य पदार्थ और फ्रोजन उत्पादों में भी अपनी मौजूदगी बढ़ाई है। आटा श्रेणी में अब भी विकास की काफी संभावनाएं हैं। उपभोक्ताओं की बदलती जरूरतों को देखते हुए कंपनी मल्टीग्रेन, हाई-प्रोटीन, ऑर्गेनिक और मिलेट आधारित आटा जैसे उत्पादों पर जोर दे रही है। उनके अनुसार, प्रीमियम उत्पादों का मतलब केवल अधिक कीमत नहीं है, बल्कि बेहतर गुणवत्ता, सुविधा और स्वास्थ्य एवं पोषण संबंधी वास्तविक लाभ देना भी है। आशीर्वाद ब्रांड अब ऐसे उत्पादों के जरिये नए उपभोक्ता वर्ग और नए इस्तेमाल के अवसर तलाश रहा है, जिनमें बेसन, सेवईं, रवा, सोया चंक्स, फ्रोजन नान और पराठे तथा ताजी चटनी और सांभर शामिल हैं। कंपनी ने रेडी-टू-कुक श्रेणी में भी कदम बढ़ाया है। आशीर्वाद की तैयार चपातियां विशेष रूप से समय की कमी से जूझ रहे युवा परिवारों को ध्यान में रखकर पेश की गई हैं। एक पैक में 10 चपातियां होती हैं और इनमें किसी तरह के अतिरिक्त ‘प्रिजर्वेटिव’ नहीं डाले जाते। इनका इस्तेमाल पांच से छह के बीच किया जा सकता है। आशीर्वाद का एक और नया दांव सत्तू है। आईटीसी ने बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल में आशीर्वाद चना सत्तू पेश किया है। कंपनी के मुताबिक सत्तू प्रोटीन और फाइबर से भरपूर होने के साथ-साथ स्वाद और उपयोगिता के लिहाज से भी महत्वपूर्ण खाद्य पदार्थ है। फिलहाल कंपनी ने इसे पूर्वी भारत के बाजारों में उतारा है, लेकिन अब इसे देशभर में पहुंचाने की योजना है। आशीर्वाद चना सत्तू पारंपरिक तरीके से बालू में भूनकर तैयार किया जाता है। बिहार में जीरा युक्त चना सत्तू और पश्चिम बंगाल व झारखंड में सादा चना सत्तू उपलब्ध है। कंपनी ने 10 रुपये का ‘वैल्यू पैक’ भी पेश किया है, जिसमें 10 ग्राम प्रोटीन मिलता है। वित्त वर्ष 2025-26 में आईटीसी के रोजमर्रा के उपभोग का सामान (एफएमसीजी) करीब 28 करोड़ परिवारों तक पहुंचा और इनसे लगभग 37,000 करोड़ रुपये का उपभोक्ता खर्च दर्ज हुआ। कंपनी का लक्ष्य अब आशीर्वाद को केवल आटा ब्रांड तक सीमित रखने के बजाय एक ऐसे व्यापक खाद्य ब्रांड के रूप में विकसित करना है, जो रोजमर्रा के भोजन से जुड़ी अलग-अलग जरूरतों को पूरा कर सके।


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