TOP

ई - पेपर Subscribe Now!

ePaper
Subscribe Now!

Download
Android Mobile App

Daily Business Newspaper | A Knowledge Powerhouse in Hindi

19-09-2026

एक्सपेंसिव फोन की उड़ान तेज, अफोर्डेबल की सेल्स में गिरावट

  •  भारत का स्मार्टफोन मार्केट अब दो हिस्सों में बंट रहा है और इसका सबसे ज्यादा असर लोअर प्राइस सेगमेंट पर दिख रहा है। काउंटरपॉइंट रिसर्च के अनुसार, अप्रैल-जून क्वार्टर में स्मार्टफोन शिपमेंट ईयर ऑन ईयर 10 प्रतिशत घटकर गत छह वर्ष के सबसे कमजोर जून क्वार्टर स्तर पर पहुंच गई। गिरावट का सबसे बड़ा असर 15,000 रुपये से कम कीमत वाले फोन पर पड़ा, जहां वॉल्यूम करीब 50 प्रतिशत तक टूट गया। भारत में स्मार्टफोन की एवरेज सेलिंग प्राइस करीब 30,000 रुपये तक पहुंच गई है, जो एक वर्ष पहले की तुलना में करीब 20 प्रतिशत ज्यादा है। इसका मतलब है कि भारतीय उपभोक्ता कम फोन खरीद रहे हैं, क्योंकि वे 15,000 रुपये से कम कीमत वाले फोन खरीदने के बजाय ज्यादा खर्च करके प्रीमियम फोन की ओर बढ़ रहे हैं। भारत में स्मार्टफोन प्राइस बैंड शेयर (वॉल्यूम के आधार पर) दूसरा क्वार्टर फाइनेंशियल ईयर 2026 और पहला क्वार्टर फाइनेंशियल ईयर 2026 के आंकड़ों के अनुसार, 15,000 रुपये से कम वाले सेगमेंट की हिस्सेदारी 47 प्रतिशत से घटकर 45 प्रतिशत रह गई। 15,000-30,000 रुपये वाले सेगमेंट की हिस्सेदारी 23 प्रतिशत से बढक़र 26 प्रतिशत हुई, जबकि 30,000 रुपये से ऊपर के प्रीमियम सेगमेंट की हिस्सेदारी 27 प्रतिशत से बढक़र 32 प्रतिशत हो गई। काउंटरपॉइंट रिसर्च के अनुसार, मिड-प्रीमियम सेगमेंट में डिमांड लगातार मजबूत बनी हुई है, जबकि लोअर एंड में वॉल्यूम लगातार कमजोर हो रहा है। आईडीसी इंडिया के सीनियर रिसर्च मैनेजर के अनुसार, 15,000-30,000 रुपये का बैंड और 30,000 रुपये से ऊपर का प्रीमियम सेगमेंट मजबूत बना हुआ है, क्योंकि ग्राहक अपग्रेड की ओर बढ़ रहे हैं। प्रीमियम शिफ्ट कोई नई बात नहीं है। सितंबर, 2025 क्वार्टर में एप्पल ने 50 लाख यूनिट से ज्यादा आईफोन बेचे थे, जिनमें आईफोन 16 और आईफोन एयर की बिक्री का भी योगदान रहा। कुल स्मार्टफोन बिक्री 4.8 करोड़ यूनिट रही, जो ईयर-ऑन-ईयर 4.3 प्रतिशत कम थी। आईडीसी के आंकड़ों के मुताबिक, 2025 में स्मार्टफोन शिपमेंट करीब 15.2 करोड़ यूनिट पर लगभग स्थिर रही। हालांकि, शिपमेंट में ग्रोथ कमजोर रही, लेकिन मार्केट में लगातार अपग्रेड का ट्रेंड बना हुआ है। इस तेज शिफ्ट के पीछे फंडिंग भी एक बड़ा कारण है। कंपनी के अनुसार, बेहतर फोन खरीदने की आकांक्षा और अफोर्डेबल के्रडिट की उपलब्धता मिलकर बिक्री को बढ़ावा दे रही है। आरबीआई के आंकड़ों के अनुसार, कार, होम लोन और के्रडिट कार्ड को छोडक़र अन्य रिटेल लोन जनवरी से जून के बीच ईयर-ऑन-ईयर 23-24 प्रतिशत बढ़े। हालांकि इस पूरी ग्रोथ का हिस्सा फोन खरीदने में नहीं गया, लेकिन इसका एक हिस्सा हाई-एंड फोन खरीदने के लिए ईएमआई, बैंकों और शैडो लेंडर्स के साथ ब्रांड पार्टनरशिप के जरिए उपलब्ध कराया जा रहा है। प्राइस बैंड के हिसाब से मार्केट में बदलाव साफ दिख रहा है। यानी स्मार्टफोन मार्केट में सिर्फ फोन की बिक्री की कहानी नहीं बदल रही है, बल्कि ग्राहक की परचेज पॉवर और उसकी प्राथमिकताएं भी बदल रही हैं। बजट फोन से दूरी और ज्यादा कीमत वाले स्मार्टफोन की ओर बढ़ता रुझान इस बात का संकेत है कि भारतीय ग्राहक अब कम डिवाइस खरीदकर ज्यादा फीचर्स और बेहतर एक्सपीरियंस के लिए ज्यादा खर्च करने को तैयार है। जेन जेड के लिए कीमत अब भी सबसे बड़ा फैक्टर है। इस पीढ़ी की बड़ी संख्या ऐसी है, जिसकी वित्त वर्ष 2025-26 की आयकर रिटर्न में सालाना वेतन 12.75 लाख रुपये से कम दर्ज है। दूसरी तरफ, किफायती फोन खरीदने की क्षमता पर दबाव तेजी से बढ़ रहा है। 10,000 रुपये वाले फोन की मेमोरी की लागत करीब चार गुना बढक़र 4,500 रुपये हो गई है और फोन निर्माता इस बढ़ी लागत का कुछ हिस्सा ग्राहकों पर डालने के अलावा ज्यादा कुछ नहीं कर पा रहे हैं। इसका असर यह हुआ कि जून के अंत तक 15,000 रुपये से कम कीमत वाले फोन की कुल आपूर्ति में हिस्सेदारी सिर्फ 27 प्रतिशत रह गई, जबकि एक साल पहले इसी समय यह 46 प्रतिशत थी। काउंटरपॉइंट के अनुमान के मुताबिक इसकी बड़ी वजह मेमोरी की कीमतों में तेज बढ़ोतरी है।

Share
एक्सपेंसिव फोन की उड़ान तेज, अफोर्डेबल की सेल्स में गिरावट

 भारत का स्मार्टफोन मार्केट अब दो हिस्सों में बंट रहा है और इसका सबसे ज्यादा असर लोअर प्राइस सेगमेंट पर दिख रहा है। काउंटरपॉइंट रिसर्च के अनुसार, अप्रैल-जून क्वार्टर में स्मार्टफोन शिपमेंट ईयर ऑन ईयर 10 प्रतिशत घटकर गत छह वर्ष के सबसे कमजोर जून क्वार्टर स्तर पर पहुंच गई। गिरावट का सबसे बड़ा असर 15,000 रुपये से कम कीमत वाले फोन पर पड़ा, जहां वॉल्यूम करीब 50 प्रतिशत तक टूट गया। भारत में स्मार्टफोन की एवरेज सेलिंग प्राइस करीब 30,000 रुपये तक पहुंच गई है, जो एक वर्ष पहले की तुलना में करीब 20 प्रतिशत ज्यादा है। इसका मतलब है कि भारतीय उपभोक्ता कम फोन खरीद रहे हैं, क्योंकि वे 15,000 रुपये से कम कीमत वाले फोन खरीदने के बजाय ज्यादा खर्च करके प्रीमियम फोन की ओर बढ़ रहे हैं। भारत में स्मार्टफोन प्राइस बैंड शेयर (वॉल्यूम के आधार पर) दूसरा क्वार्टर फाइनेंशियल ईयर 2026 और पहला क्वार्टर फाइनेंशियल ईयर 2026 के आंकड़ों के अनुसार, 15,000 रुपये से कम वाले सेगमेंट की हिस्सेदारी 47 प्रतिशत से घटकर 45 प्रतिशत रह गई। 15,000-30,000 रुपये वाले सेगमेंट की हिस्सेदारी 23 प्रतिशत से बढक़र 26 प्रतिशत हुई, जबकि 30,000 रुपये से ऊपर के प्रीमियम सेगमेंट की हिस्सेदारी 27 प्रतिशत से बढक़र 32 प्रतिशत हो गई। काउंटरपॉइंट रिसर्च के अनुसार, मिड-प्रीमियम सेगमेंट में डिमांड लगातार मजबूत बनी हुई है, जबकि लोअर एंड में वॉल्यूम लगातार कमजोर हो रहा है। आईडीसी इंडिया के सीनियर रिसर्च मैनेजर के अनुसार, 15,000-30,000 रुपये का बैंड और 30,000 रुपये से ऊपर का प्रीमियम सेगमेंट मजबूत बना हुआ है, क्योंकि ग्राहक अपग्रेड की ओर बढ़ रहे हैं। प्रीमियम शिफ्ट कोई नई बात नहीं है। सितंबर, 2025 क्वार्टर में एप्पल ने 50 लाख यूनिट से ज्यादा आईफोन बेचे थे, जिनमें आईफोन 16 और आईफोन एयर की बिक्री का भी योगदान रहा। कुल स्मार्टफोन बिक्री 4.8 करोड़ यूनिट रही, जो ईयर-ऑन-ईयर 4.3 प्रतिशत कम थी। आईडीसी के आंकड़ों के मुताबिक, 2025 में स्मार्टफोन शिपमेंट करीब 15.2 करोड़ यूनिट पर लगभग स्थिर रही। हालांकि, शिपमेंट में ग्रोथ कमजोर रही, लेकिन मार्केट में लगातार अपग्रेड का ट्रेंड बना हुआ है। इस तेज शिफ्ट के पीछे फंडिंग भी एक बड़ा कारण है। कंपनी के अनुसार, बेहतर फोन खरीदने की आकांक्षा और अफोर्डेबल के्रडिट की उपलब्धता मिलकर बिक्री को बढ़ावा दे रही है। आरबीआई के आंकड़ों के अनुसार, कार, होम लोन और के्रडिट कार्ड को छोडक़र अन्य रिटेल लोन जनवरी से जून के बीच ईयर-ऑन-ईयर 23-24 प्रतिशत बढ़े। हालांकि इस पूरी ग्रोथ का हिस्सा फोन खरीदने में नहीं गया, लेकिन इसका एक हिस्सा हाई-एंड फोन खरीदने के लिए ईएमआई, बैंकों और शैडो लेंडर्स के साथ ब्रांड पार्टनरशिप के जरिए उपलब्ध कराया जा रहा है। प्राइस बैंड के हिसाब से मार्केट में बदलाव साफ दिख रहा है। यानी स्मार्टफोन मार्केट में सिर्फ फोन की बिक्री की कहानी नहीं बदल रही है, बल्कि ग्राहक की परचेज पॉवर और उसकी प्राथमिकताएं भी बदल रही हैं। बजट फोन से दूरी और ज्यादा कीमत वाले स्मार्टफोन की ओर बढ़ता रुझान इस बात का संकेत है कि भारतीय ग्राहक अब कम डिवाइस खरीदकर ज्यादा फीचर्स और बेहतर एक्सपीरियंस के लिए ज्यादा खर्च करने को तैयार है। जेन जेड के लिए कीमत अब भी सबसे बड़ा फैक्टर है। इस पीढ़ी की बड़ी संख्या ऐसी है, जिसकी वित्त वर्ष 2025-26 की आयकर रिटर्न में सालाना वेतन 12.75 लाख रुपये से कम दर्ज है। दूसरी तरफ, किफायती फोन खरीदने की क्षमता पर दबाव तेजी से बढ़ रहा है। 10,000 रुपये वाले फोन की मेमोरी की लागत करीब चार गुना बढक़र 4,500 रुपये हो गई है और फोन निर्माता इस बढ़ी लागत का कुछ हिस्सा ग्राहकों पर डालने के अलावा ज्यादा कुछ नहीं कर पा रहे हैं। इसका असर यह हुआ कि जून के अंत तक 15,000 रुपये से कम कीमत वाले फोन की कुल आपूर्ति में हिस्सेदारी सिर्फ 27 प्रतिशत रह गई, जबकि एक साल पहले इसी समय यह 46 प्रतिशत थी। काउंटरपॉइंट के अनुमान के मुताबिक इसकी बड़ी वजह मेमोरी की कीमतों में तेज बढ़ोतरी है।


Label

PREMIUM

CONNECT WITH US

X
Login
X

Login

X

Click here to make payment and subscribe
X

Please subscribe to view this section.

X

Please become paid subscriber to read complete news