दुनिया के कई हिस्सों में चल रहे युद्ध और बढ़ती ईंधन कीमतों ने इंटरनेशनल ट्रैवल को महंगा कर दिया है। इसका असर भारत आने वाले विदेशी पर्यटकों पर भी पड़ रहा है। पर्यटन उद्योग से जुड़े लोगों का अनुमान है कि 2026 में विदेशी पर्यटकों की संख्या गत वर्ष के आसपास ही रह सकती है। उद्योग ने सरकार से विदेशों में भारत की ब्रांडिंग और प्रमोशन फिर से तेज करने की मांग की है। फेडरेशन ऑफ एसोसिएशंस इन इंडियन ट्यूरिज्म एंड हॉस्पिटेलिटी के मुताबिक, 2026 में करीब 80-90 लाख विदेशी पर्यटकों के भारत आने का अनुमान है। यह आंकड़ा बहुत उत्साहजनक नहीं है, क्योंकि भारत अभी भी कोरोना से पहले के स्तर से काफी पीछे है। पर्यटन मंत्रालय के शुरुआती आंकड़ों के अनुसार, 2025 में 91.5 लाख विदेशी पर्यटक भारत आए थे, जो 2024 के मुकाबले 8.1 प्रतिशत कम और 2019 के मुकाबले 16.3 प्रतिशत नीचे रहा। इस साल की शुरुआत भी कमजोर रही है। अप्रैल में भारत में करीब 5.34 लाख विदेशी पर्यटक पहुंचे। यह अप्रैल, 2019 के मुकाबले 31 प्रतिशत कम और एक साल पहले की तुलना में 14.3 प्रतिशत कम है। यानी अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों की वापसी की रफ्तार अभी भी उस स्तर पर नहीं पहुंची है, जिसकी उम्मीद पर्यटन उद्योग कर रहा था। फैथ के कंसल्टिंग चीफ एग्जीक्यूटिव के मुताबिक, ईरान और यूके्रन के युद्ध ने ईंधन की कीमतों को ऊपर धकेला है। महंगा ईंधन मतलब महंगी अंतरराष्ट्रीय उड़ानें और महंगे टिकट। इससे विदेशी पर्यटकों के लिए लंबी दूरी की यात्रा का बजट बढ़ गया है और भारत जैसे डेस्टिनेशन पर इसका सीधा असर पड़ रहा है। लेकिन सिर्फ महंगी उड़ानें ही परेशानी नहीं हैं। भारत की अंतरराष्ट्रीय मार्केटिंग की कमजोर मौजूदगी भी अब बड़ा मुद्दा बन गई है। विदेशी ट्रैवल एजेंटों और ट्यूर ऑपरेटरों के बीच भारत को लेकर इस समय उत्साह बेहद कमजोर है। उनका कहना है कि गत कुछ वर्षों में इंटरनेशनल मार्केट्स में भारत की मार्केटिंग लगभग गायब रही है। पर्यटन उद्योग का कहना है कि भारत के पास शानदार डेस्टिनेशन, संस्कृति, विरासत और अनुभव हैं, लेकिन दुनिया के संभावित पर्यटकों के सामने लगातार अपनी मौजूदगी दर्ज कराना भी उतना ही जरूरी है। करीब 50 करोड़ रुपए खर्च कर स्मार्ट सोशल मीडिया कंटेंट, एआई वीडियो और डिजिटल प्रमोशन तैयार किए जाएं और उन्हें निजी क्षेत्र के साथ बड़े स्तर पर साझा किया जाए, तो इनबाउंड ट्यूरिज्म की बिक्री को बड़ा बूस्ट मिल सकता है। इंडियन होटल्स कंपनी के सीईओ भी मानते हैं कि घरेलू पर्यटन की डिमांड मजबूत है, लेकिन भारत के लिए असली बड़ा मौका विदेशी पर्यटकों का अपना उचित हिस्सा हासिल करना है। इसके लिए दुनिया के प्रमुख बाजारों में भारत की ब्रांडिंग और प्रमोशन को नए सिरे से रफ्तार देनी होगी। हालांकि, पर्यटन कारोबार को आने वाले सीजन से कुछ उम्मीद भी है। कॉसमॉस ट्रैवल्स के एमडी का अनुमान है कि हालात अनुकूल रहे तो इस पर्यटन सीजन में इनबाउंड ट्यूरिज्म गत वर्ष की तुलना में 10-15 प्रतिशत बढ़ सकता है। उनका कहना है कि करीब 20 प्रतिशत इनबाउंड कारोबार चीन में वीजा से जुड़ी दिक्कतों के कारण अटका हुआ है और ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के बाद इस समस्या के सुलझने की उम्मीद है। कुल मिलाकर, भारत के पर्यटन बाजार के सामने तस्वीर दो हिस्सों में बंटी हुई है। घरेलू पर्यटक बाजार मजबूत है, लेकिन विदेशी पर्यटकों की वापसी अभी भी चुनौती बनी हुई है। ऐसे में अगर भारत को दुनिया के बड़े पर्यटन बाजार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ानी है, तो सिर्फ नए डेस्टिनेशन बनाना काफी नहीं होगा। दुनिया को लगातार यह याद दिलाना होगा कि भारत घूमने के लिए क्यों जाना चाहिए।