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10-09-2026

विदेश में पढ़ाई के लिये यूनिवर्सिटी नहीं नौकरी बन रही पहली पसंद

  •   देश के विद्यार्थी अब विदेश में पढ़ाई के फैसले को लेकर अधिक नतीजों पर ध्यान दे रहे हैं। करीब आधे छात्र विदेश जाने का मुख्य कारण बेहतर रोजगार के अवसर बता रहे हैं। एक रिपोर्ट में यह जानकारी सामने आई है। कौशल विकास और कार्यबल विकास कंपनी अपग्रेड की अंतरराष्ट्रीय शिक्षा रिपोर्ट के अनुसार, करीब 49 प्रतिशत भारतीय छात्र-छात्राओं ने विदेश में पढ़ाई करने की प्रमुख वजह बेहतर नौकरी के अवसरों को बताया। इसके अलावा, अन्य कारण शिक्षा की गुणवत्ता, स्थायी रूप से वहीं बसने की इच्छा और जीवनशैली है। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारतीय छात्र अब केवल प्रतिष्ठित संस्थानों के नाम के आधार पर विदेश में पढ़ाई के लिए नहीं जा रहे हैं। वे पढ़ाई पर होने वाले खर्च के मुकाबले मिलने वाले लाभ, रोजगार के अवसर और लंबे समय में कॅरियर की संभावनाओं को अधिक महत्व दे रहे हैं। यह रिपोर्ट जनवरी, 2025 से जून, 2026 के बीच सलाह लेने वाले 53,800 छात्रों से मिली जानकारी पर आधारित है। इनमें 65.8 प्रतिशत नए स्नातक थे, जबकि करीब 60 प्रतिशत छात्र मझोले और छोटे शहरों के थे। रिपोर्ट में शामिल ज्यादातर छात्र अपने कॅरियर की शुरुआत में थे और हाल ही में उन्होंने स्नातक की डिग्री हासिल की थी। इनमें 65.8 प्रतिशत नए स्नातक थे, जबकि करीब 60 प्रतिशत छात्र दूसरे और तीसरे स्तर के शहरों से थे। अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया जैसे पारंपरिक शिक्षा केंद्रों का महत्व बरकरार है, लेकिन यूरोपीय देशों के प्रति छात्रों की रुचि बढ़ रही है। रिपोर्ट के मुताबिक, कड़े आव्रजन नियमों और बढ़ती लागत के बीच छात्र जर्मनी, फिनलैंड, स्पेन और फ्रांस जैसे देशों का रुख कर रहे हैं। इन देशों को कम खर्च, उद्योग की जरूरतों से जुड़ी पढ़ाई और रोजगार के बेहतर अवसरों के कारण पसंद किया जा रहा है। रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि विदेश में पढ़ाई के लिए कम खर्च और अधिक लाभ वाले विकल्पों पर ध्यान दिया जा रहा है। करीब 10 में से सात विद्यार्थी 30 लाख रुपये से कम के कुल बजट में विदेश में पढ़ाई करने की योजना बना रहे हैं। अपग्रेड स्टडी अब्रॉड के विश्वविद्यालय साझेदारी मामलों के उपाध्यक्ष प्रनीत सिंह ने कहा कि विदेश में पढ़ाई के क्षेत्र में बड़ा बदलाव आ रहा है। भारतीय छात्र अब भविष्य में रोजगार मिलने की संभावना, करियर में आगे बढऩे के अवसर और कम खर्च को अधिक प्राथमिकता दे रहे हैं। यूरोप की बढ़ती लोकप्रियता छात्रों की इसी बदलती सोच को बताती है।

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विदेश में पढ़ाई के लिये यूनिवर्सिटी नहीं नौकरी बन रही पहली पसंद

  देश के विद्यार्थी अब विदेश में पढ़ाई के फैसले को लेकर अधिक नतीजों पर ध्यान दे रहे हैं। करीब आधे छात्र विदेश जाने का मुख्य कारण बेहतर रोजगार के अवसर बता रहे हैं। एक रिपोर्ट में यह जानकारी सामने आई है। कौशल विकास और कार्यबल विकास कंपनी अपग्रेड की अंतरराष्ट्रीय शिक्षा रिपोर्ट के अनुसार, करीब 49 प्रतिशत भारतीय छात्र-छात्राओं ने विदेश में पढ़ाई करने की प्रमुख वजह बेहतर नौकरी के अवसरों को बताया। इसके अलावा, अन्य कारण शिक्षा की गुणवत्ता, स्थायी रूप से वहीं बसने की इच्छा और जीवनशैली है। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारतीय छात्र अब केवल प्रतिष्ठित संस्थानों के नाम के आधार पर विदेश में पढ़ाई के लिए नहीं जा रहे हैं। वे पढ़ाई पर होने वाले खर्च के मुकाबले मिलने वाले लाभ, रोजगार के अवसर और लंबे समय में कॅरियर की संभावनाओं को अधिक महत्व दे रहे हैं। यह रिपोर्ट जनवरी, 2025 से जून, 2026 के बीच सलाह लेने वाले 53,800 छात्रों से मिली जानकारी पर आधारित है। इनमें 65.8 प्रतिशत नए स्नातक थे, जबकि करीब 60 प्रतिशत छात्र मझोले और छोटे शहरों के थे। रिपोर्ट में शामिल ज्यादातर छात्र अपने कॅरियर की शुरुआत में थे और हाल ही में उन्होंने स्नातक की डिग्री हासिल की थी। इनमें 65.8 प्रतिशत नए स्नातक थे, जबकि करीब 60 प्रतिशत छात्र दूसरे और तीसरे स्तर के शहरों से थे। अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया जैसे पारंपरिक शिक्षा केंद्रों का महत्व बरकरार है, लेकिन यूरोपीय देशों के प्रति छात्रों की रुचि बढ़ रही है। रिपोर्ट के मुताबिक, कड़े आव्रजन नियमों और बढ़ती लागत के बीच छात्र जर्मनी, फिनलैंड, स्पेन और फ्रांस जैसे देशों का रुख कर रहे हैं। इन देशों को कम खर्च, उद्योग की जरूरतों से जुड़ी पढ़ाई और रोजगार के बेहतर अवसरों के कारण पसंद किया जा रहा है। रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि विदेश में पढ़ाई के लिए कम खर्च और अधिक लाभ वाले विकल्पों पर ध्यान दिया जा रहा है। करीब 10 में से सात विद्यार्थी 30 लाख रुपये से कम के कुल बजट में विदेश में पढ़ाई करने की योजना बना रहे हैं। अपग्रेड स्टडी अब्रॉड के विश्वविद्यालय साझेदारी मामलों के उपाध्यक्ष प्रनीत सिंह ने कहा कि विदेश में पढ़ाई के क्षेत्र में बड़ा बदलाव आ रहा है। भारतीय छात्र अब भविष्य में रोजगार मिलने की संभावना, करियर में आगे बढऩे के अवसर और कम खर्च को अधिक प्राथमिकता दे रहे हैं। यूरोप की बढ़ती लोकप्रियता छात्रों की इसी बदलती सोच को बताती है।


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