ग्लोबल लेवल पर एडवरटाइजिंग इंडस्ट्री की रफ्तार भले ही अमेरिका-ईरान संघर्ष, मुद्रा की कमजोरी और महंगाई जैसी चुनौतियों से प्रभावित हो रही हो, लेकिन भारत का विज्ञापन बाजार लगातार मजबूत बना हुआ है। डब्ल्यूपीपी मीडिया की इस साल की मध्य-वर्षीय रिपोर्ट के मुताबिक, 2026 के अंत तक देश का विज्ञापन बाजार 8.8 प्रतिशत बढक़र 2 लाख करोड़ रुपये के पार पहुंच सकता है। हालांकि, यह वृद्धि फरवरी में जताए गए 9.7 प्रतिशत के अनुमान से कम है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत की दीर्घकालिक विज्ञापन बुनियाद मजबूत बनी हुई है। डिजिटल तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस का बढ़ता इस्तेमाल, इलेक्ट्रॉनिक वाणिज्य और क्विक कॉमर्स का विस्तार तथा छोटे और मध्यम कारोबारों की बढ़ती संख्या बाजार को सहारा दे रही है। 2027 से दशक के अंत तक भारत में डबल डिजिट की विज्ञापन वृद्धि की वापसी की उम्मीद है। 2026 में सामाजिक माध्यम और डिजिटल विज्ञापन 13.2 प्रतिशत बढक़र 8.3 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है। छोटे वीडियो, सामग्री रचनाकारों की सामग्री और छोटे नाटकीय कार्यक्रम जैसे नए प्रारूप इस वृद्धि को आगे बढ़ा रहे हैं। वहीं, कॉमर्स एडवरटाइजिंग आय 29 प्रतिशत बढक़र 3.9 अरब डॉलर तक पहुंच सकती है और 2027 में इसमें 21.7 प्रतिशत की अतिरिक्त वृद्धि का अनुमान है। एआई आधारित विज्ञापन आय 2026 में 2.5 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है, जो सालाना 9 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है। गूगल के एआई आधारित खोज सारांश पहले से उपलब्ध हैं और रिपोर्ट के अनुसार, इनका खोज यातायात के बड़े हिस्से पर असर पड़ता दिखाई दे रहा है। दूसरी ओर, दूरदर्शन पर दबाव बना हुआ है। डब्ल्यूपीपी मीडिया के अनुमान के मुताबिक, दूरदर्शन विज्ञापन आय 6.8 प्रतिशत घटकर 4.9 अरब डॉलर रह सकती है। अगले बड़े बदलाव की संभावना 2027 के भारतीय प्रीमियर लीग के प्रसारण अधिकारों की नीलामी और 2028 के चक्र में दिखाई दे सकती है। घर के बाहर विज्ञापन 8.6 प्रतिशत बढक़र 50 करोड़ डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है। इस वृद्धि को बेहतर आधारभूत ढांचे में निवेश और आवागमन में सुधार से समर्थन मिलेगा। हालांकि, डिजिटल घर-बाहर विज्ञापन अभी भी कुल बाहरी विज्ञापन आय में 5 प्रतिशत से कम हिस्सेदारी रखता है।