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11-05-2026

लक्षद्वीप में जल्द शुरू होगी सीप्लेन सर्विस

  •  भारत का एविएशन सेक्टर तेजी से विस्तार की ओर बढ़ रहा है और आने वाले वर्षों में विमान लीजिंग और फाइनेंसिंग के क्षेत्र में बड़े निवेश की संभावनाएं दिखाई दे रही हैं। केंद्रीय नागर विमानन मंत्री राम मोहन नायडू किंजारापु ने कहा कि भारतीय एयरलाइंस के पास वर्तमान में 1,640 विमानों की डिलीवरी लंबित है, जो अगले एक दशक में देश के लिए 50 अरब डॉलर के एयरक्राफ्ट लीजिंग अवसर पैदा करेगी। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते एविएशन बाजारों में शामिल हो चुका है और अब देश खुद को वैश्विक एविएशन फाइनेंसिंग और एयरक्राफ्ट लीजिंग हब के रूप में भी स्थापित करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। वर्तमान में भारतीय एयरलाइंस के पास 1,640 विमानों की लंबित डिलीवरी है। यह आने वाले 10 वर्षों में करीब 50 अरब डॉलर के लीजिंग अवसरों में बदल सकती है। उन्होंने कहा कि भारत की कमर्शियल एयरक्राफ्ट फ्लीट 2027 तक बढक़र 1,100 विमानों तक पहुंच सकती है, जबकि 2035 तक यह संख्या 2,250 से अधिक होने का अनुमान है। केंद्रीय मंत्री ने यह भी घोषणा की कि लक्षद्वीप में जल्द ही सीप्लेन सेवाएं शुरू की जाएंगी। भारत अब केवल पारंपरिक विमान सेवाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि हेलीकॉप्टर, छोटे रीजनल एयरक्राफ्ट और सीप्लेन के जरिए दूर-दराज और भौगोलिक रूप से चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों तक कनेक्टिविटी बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि सरकार 40 से 100 सीट वाले छोटे विमानों के लिए भी लीजिंग फ्रेमवर्क को बढ़ावा दे रही है, ताकि क्षेत्रीय कनेक्टिविटी मजबूत हो सके। इसके अलावा एविएशन सेक्टर में निवेश बढ़ाने के लिए फ्रैक्शनल ओनरशिप मॉडल और एयरक्राफ्ट को इंफ्रास्ट्रक्चर एसेट मानने जैसे नए नीति विकल्पों पर भी काम किया जा रहा है।

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लक्षद्वीप में जल्द शुरू होगी सीप्लेन सर्विस

 भारत का एविएशन सेक्टर तेजी से विस्तार की ओर बढ़ रहा है और आने वाले वर्षों में विमान लीजिंग और फाइनेंसिंग के क्षेत्र में बड़े निवेश की संभावनाएं दिखाई दे रही हैं। केंद्रीय नागर विमानन मंत्री राम मोहन नायडू किंजारापु ने कहा कि भारतीय एयरलाइंस के पास वर्तमान में 1,640 विमानों की डिलीवरी लंबित है, जो अगले एक दशक में देश के लिए 50 अरब डॉलर के एयरक्राफ्ट लीजिंग अवसर पैदा करेगी। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते एविएशन बाजारों में शामिल हो चुका है और अब देश खुद को वैश्विक एविएशन फाइनेंसिंग और एयरक्राफ्ट लीजिंग हब के रूप में भी स्थापित करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। वर्तमान में भारतीय एयरलाइंस के पास 1,640 विमानों की लंबित डिलीवरी है। यह आने वाले 10 वर्षों में करीब 50 अरब डॉलर के लीजिंग अवसरों में बदल सकती है। उन्होंने कहा कि भारत की कमर्शियल एयरक्राफ्ट फ्लीट 2027 तक बढक़र 1,100 विमानों तक पहुंच सकती है, जबकि 2035 तक यह संख्या 2,250 से अधिक होने का अनुमान है। केंद्रीय मंत्री ने यह भी घोषणा की कि लक्षद्वीप में जल्द ही सीप्लेन सेवाएं शुरू की जाएंगी। भारत अब केवल पारंपरिक विमान सेवाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि हेलीकॉप्टर, छोटे रीजनल एयरक्राफ्ट और सीप्लेन के जरिए दूर-दराज और भौगोलिक रूप से चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों तक कनेक्टिविटी बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि सरकार 40 से 100 सीट वाले छोटे विमानों के लिए भी लीजिंग फ्रेमवर्क को बढ़ावा दे रही है, ताकि क्षेत्रीय कनेक्टिविटी मजबूत हो सके। इसके अलावा एविएशन सेक्टर में निवेश बढ़ाने के लिए फ्रैक्शनल ओनरशिप मॉडल और एयरक्राफ्ट को इंफ्रास्ट्रक्चर एसेट मानने जैसे नए नीति विकल्पों पर भी काम किया जा रहा है।


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