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Daily Business Newspaper | A Knowledge Powerhouse in Hindi

10-04-2026

द्रव्यवती नदी में प्रदूषित जल छोडऩे वाली इकाइयों की पहचान के लिए सर्वे करने के निर्देश

  •  सांगानेर क्षेत्र में टेक्सटाइल इकाइयों द्वारा फैलाए जा रहे जल प्रदूषण और कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (CETP) की कार्यप्रणाली को लेकर मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास  की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय समिति की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित हुई । मुख्य सचिव ने स्पष्ट निर्देश दिए कि जो इकाइयां ड्रेनेज सिस्टम से नहीं जुड़ी हैं या प्रदूषित पानी बहा रही हैं, उनके खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएं। उन्होंने द्रव्यवती नदी में प्रदूषित जल छोडऩे वाली इकाइयों की पहचान के लिए छ्वष्ठ्र और क्रस्क्कष्टक्च एवं संबंधित विभागों द्वारा संयुक्त सर्वे शुरू करने के निर्देश दिए। मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने नदियों में अपशिष्ट बहाने वाली डिफॉल्टर इकाइयों के विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई करने के निर्देश देते हुए कहा कि ष्टश्वञ्जक्क की मरम्मत, सभी इकाइयों द्वारा सहमति ष्टशठ्ठह्यद्गठ्ठह्ल) के आवेदन और सदस्यता प्रमाणपत्र जारी किए जाएं। बैठक में बताया गया कि वर्तमान में 12.3 रूरुष्ठ क्षमता वाला ष्टश्वञ्जक्क अपनी क्षमता से काफी कम (3.1 रूरुष्ठ) पर चल रहा है और इसके कई महत्वपूर्ण हिस्से जैसे मैकेनिकल बार स्क्रीन, स्लज थिकनर और रूङ्कक्र सिस्टम वर्तमान में अकार्यक्षम हैं । अब तक 892 में से 758 इकाइयों को ष्टश्वञ्जक्क से जोड़ा जा चुका है। शेष इकाइयों को जोडऩे के लिए पम्पिंग स्टेशन-ढ्ढढ्ढढ्ढ और पाइपलाइन का कार्य  31 मई तक पूर्ण करने के निर्देश दिए गए हैं। मुख्य सचिव ने स्श्वक्कष्ठ को निर्देशित किया कि 30 अप्रैल तक ष्टश्वञ्जक्क की समस्त खामियां दूर करके संचालन सुनिश्चित किया जाए। बैठक में अतिरिक्त मुख्य सचिव अतिरिक्त मुख्य सचिव, वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग आनंद कुमार, अध्यक्ष प्रदूषण नियंत्रण मंडल देबाशीष पृष्टि, प्रमुख शासन सचिव, कृषि एवं उद्यानिकी एवं पंचायती राज (कृषि) विभाग मंजू राजपाल, आयुक्त, जयपुर विकास प्राधिकरण सिद्धार्थ महाजन एवं विभिन्न विभागों के संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।

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द्रव्यवती नदी में प्रदूषित जल छोडऩे वाली इकाइयों की पहचान के लिए सर्वे करने के निर्देश

 सांगानेर क्षेत्र में टेक्सटाइल इकाइयों द्वारा फैलाए जा रहे जल प्रदूषण और कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (CETP) की कार्यप्रणाली को लेकर मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास  की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय समिति की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित हुई । मुख्य सचिव ने स्पष्ट निर्देश दिए कि जो इकाइयां ड्रेनेज सिस्टम से नहीं जुड़ी हैं या प्रदूषित पानी बहा रही हैं, उनके खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएं। उन्होंने द्रव्यवती नदी में प्रदूषित जल छोडऩे वाली इकाइयों की पहचान के लिए छ्वष्ठ्र और क्रस्क्कष्टक्च एवं संबंधित विभागों द्वारा संयुक्त सर्वे शुरू करने के निर्देश दिए। मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने नदियों में अपशिष्ट बहाने वाली डिफॉल्टर इकाइयों के विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई करने के निर्देश देते हुए कहा कि ष्टश्वञ्जक्क की मरम्मत, सभी इकाइयों द्वारा सहमति ष्टशठ्ठह्यद्गठ्ठह्ल) के आवेदन और सदस्यता प्रमाणपत्र जारी किए जाएं। बैठक में बताया गया कि वर्तमान में 12.3 रूरुष्ठ क्षमता वाला ष्टश्वञ्जक्क अपनी क्षमता से काफी कम (3.1 रूरुष्ठ) पर चल रहा है और इसके कई महत्वपूर्ण हिस्से जैसे मैकेनिकल बार स्क्रीन, स्लज थिकनर और रूङ्कक्र सिस्टम वर्तमान में अकार्यक्षम हैं । अब तक 892 में से 758 इकाइयों को ष्टश्वञ्जक्क से जोड़ा जा चुका है। शेष इकाइयों को जोडऩे के लिए पम्पिंग स्टेशन-ढ्ढढ्ढढ्ढ और पाइपलाइन का कार्य  31 मई तक पूर्ण करने के निर्देश दिए गए हैं। मुख्य सचिव ने स्श्वक्कष्ठ को निर्देशित किया कि 30 अप्रैल तक ष्टश्वञ्जक्क की समस्त खामियां दूर करके संचालन सुनिश्चित किया जाए। बैठक में अतिरिक्त मुख्य सचिव अतिरिक्त मुख्य सचिव, वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग आनंद कुमार, अध्यक्ष प्रदूषण नियंत्रण मंडल देबाशीष पृष्टि, प्रमुख शासन सचिव, कृषि एवं उद्यानिकी एवं पंचायती राज (कृषि) विभाग मंजू राजपाल, आयुक्त, जयपुर विकास प्राधिकरण सिद्धार्थ महाजन एवं विभिन्न विभागों के संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।


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