जालोर/जयपुर। मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव का सीधा असर जालोर की ग्रेनाइट इंडस्ट्री पर भी दिखाई देने लगा है। जालोर से खाड़ी देशों के साथ अमरीका समेत कई देशों को होने वाला ग्रेनाइट का एक्सपोर्ट फिलहाल ठप पड़ गया है, जिसके कारण इंडस्ट्री का प्रोडक्शन पहले के मुकाबले आधे से भी कम रह गया है।
फ्रेट चार्ज के बढऩे से शिपमेंट हुई प्रभावित : एक्सपोर्टर्स का कहना है कि ईरान पर हमलों और जवाबी कार्रवाई के चलते पश्चिम एशिया के समुद्री मार्ग जोखिमपूर्ण बने हुए हैं। शिपिंग कंपनियों की रिस्क बढऩे से कंपनियों ने 1000-4000 डॉलर प्रति कंटेनर इमरजेंसी कांफ्लिक्ट सरचार्ज लागू कर दिया है। इसका असर राजस्थान समेत इंडिया के एक्सपोर्ट और इंपोर्ट पर पड़ रहा है। इमरजेंसी कांफ्लिक्ट सरचार्ज के लागू कर देने से इंडस्ट्री की लागत बढ़ गई है और कई शिपमेंट प्रभावित हुई है। साथ ही इंश्योरेंस से जुड़ी समस्याओं के चलते माल भेजना जोखिम भरा हो गया है, जिससे जालोर की 2500 करोड़ रुपए की ग्रेनाइट इंडस्ट्री पर संकट गहरा गया है। इंडस्ट्री के जानकारों के अनुसार मार्च से लागू किए गए इन अतिरिक्त शुल्कों ने एक्सपोर्टर्स की के कॉस्ट स्ट्रक्चर को अचानक बदल दिया है। शिपिंग कंपनियों ने पश्चिम एशिया के संवेदनशील समुद्री मार्गों पर परिचालन जोखिम बढऩे के कारण यह अस्थायी शुल्क जोड़ा है। 28 फरवरी से पहले मूंदड़ा पोर्ट से 20 फीट का एक कंटेनर दुबई 400 डॉलर में जा रहा था, जिसको वर्तमान में शिपिंग कंपनियों ने कई गुना तक बढ़ा दिया है। कई पोटर््स पर तो कंटेनर की लोडिंग-अनलोडिंग बंद पड़ी हुई है।
किन देशों के लिए होने वाली शिपमेंट पर ये शुल्क लागू : इंडस्ट्री के मुताबिक मौजूदा मार्जिन के साथ इतनी ऊंची एडिशनल कॉस्टिंग वहन करना संभव नहीं है। ये शुल्क इंडिया से इराक, बहरीन, कुवैत, यमन, कतर, ओमान, यूएई, सऊदी अरब, जॉर्डन, मिस्र के आइन सोखाना पोर्ट, जिबूती, सूडान और इरिट्रिया के लिए होने वाली शिपमेंट पर लागू है। इन देशों से इंडिया के इंपोर्ट पर भी यही प्रावधान प्रभावी है।
2024-25 में राजस्थान से हुआ 3700 करोड़ रुपए का Stone Export : ग्लोबल नेचुरल स्टोन इंडस्ट्री में राजस्थान के ग्रेनाइट ने देश दुनिया में अपनी धाक जमा रखी है। कुल मिलाकर राजस्थान स्टोन एक्सपोर्ट का प्रमुख केंद्र है, जहां से वर्ष 2021-22 में 4481 करोड़ रुपए का मार्बल, ग्रेनाइट्स व स्टोन आर्टिकल्स आदि का एक्सपोर्ट हुआ था, जबकि वित्तीय वर्ष 2022-23 में राजस्थान से 3572 करोड़, वित्तीय वर्ष 2023-24 में 3666 करोड़ एवं वित्तीय वर्ष 2024-25 में 3765 करोड़ रुपए का स्टोन एक्सपोर्ट हुआ था।
इनका कहना है...
अमरीका-इजरायल-ईरान वॉर से पूर्व जालोर से प्रतिदिन 100 गाड़ी ग्रेनाइट का डिस्पैच होता था, जो वर्तमान में घटकर 50 फीसदी रह गया है। 50 फीसदी डिस्पैच भी डोमेस्टिक मार्केट में हो रहा है। खाड़ी देशों के साथ अमरीका ग्रेनाइट का बहुत बड़ा बॉयर है, लेकिन मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव के कारण जालोर की ग्रेनाइट इंडस्ट्री खस्ताहाल बनी हुई है। - रामकिशन रणवा, अध्यक्ष, ग्रेनाइट एसोसिएशन जालोर
अमरीका-ईरान वॉर का इंपैक्ट प्रत्येक इंडस्ट्री पर दिखाई दे रहा है। वॉर के चलते शिपिंग कंपनियों ने फ्रेट चार्ज कई गुना बढ़ा दिए हैं, जिसके कारण इंडस्ट्री की कॉस्टिंग काफी अधिक बढ़ गई है। - नंदकिशोर मंत्री, प्रमुख, मंत्री ग्रेनाइट इंडस्ट्रीज, जालोर
जालोर में ग्रेनाइट की छोटी-बड़ी मिलाकर करीब 1400 फैक्ट्रियां कार्यरत है। इन फैक्ट्रियों में करीब 14 से 15 हजार श्रमिकों को रोजगार मिलता है, लेकिन एलपीजी गैस के अभाव में श्रमिकों को मजबूरन पलायन करना पड़ रहा है। गल्फ कंट्री खासकर दुबई व टर्की जालोर की ग्रेनाइट इंडस्ट्री के लिए बहुत बड़े बॉयर है, लेकिन वॉर के कारण फैक्ट्रियों का प्रोडक्शन ठप हो गया है। - धर्मेंद्र जैन, प्रमुख, स्पेस ग्रेनाइट प्रा.लि., जालोर
ग्रेनाइट इंडस्ट्री को एलपीजी की सुचारू आपूर्ति नहीं होने से इंडस्ट्री का प्रोडक्शन बंद हो गया है। ग्रेनाइट के स्लैब में फ्लैमिंग के दौरान एलपीजी का वृहद स्तर पर उपयोग किया जाता है, लेकिन गैस के अभाव में संबंधित फैक्ट्रियों का प्रोडक्शन बाधित हो गया है। मोरबी जैसे हालात जालोर में दिखाई देने लगे हैं। मोरबी में भी गैस के अभाव में टाइल्स इंडस्ट्री ने शटडाउन ले रखा है। - लाल सिंह राठौड़, डायरेक्टर, शिवशक्ति ग्रेनाइट गु्रप