राजस्थान में महिलाएं अब तेजी से अपना खुद का काम शुरू कर रही हैं। रूस्रूश्व यानी छोटे और मध्यम बिजनेस में महिलाओं की भागीदारी लगातार बढ़ रही है, जिससे राज्य की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिल रही है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, राजस्थान में 2020-21 में लगभग 29 हजार से ज्यादा महिलाओं के बिजनेस दर्ज थे, जो 2023-24 में बढक़र करीब 4 लाख (3.99 लाख) से ज्यादा हो गए। इसके बाद भी यह संख्या ऊंचे स्तर पर बनी हुई है, जो महिलाओं की बढ़ती हिस्सेदारी को दिखाती है। इसी तरह कुल रूस्रूश्व की संख्या भी तेजी से बढ़ी है। 2020-21 में जहां करीब 2.33 लाख रूस्रूश्व थे, वहीं 2023-24 में यह बढक़र 11 लाख से ज्यादा हो गए। इससे साफ है कि राजस्थान में बिजनेस का माहौल तेजी से बदल रहा है और महिलाएं इसमें अहम भूमिका निभा रही हैं। महिलाओं के बिजनेस बढऩे के साथ-साथ रोजगार के मौके भी तेजी से बढ़े हैं। 2020-21 में राजस्थान में करीब 2.27 लाख महिलाएं रूस्रूश्व सेक्टर में काम कर रही थीं। यह संख्या 2023-24 में बढक़र 6.74 लाख हो गई और 2025-26 तक 11 लाख (11.09 लाख) से ज्यादा पहुंच गई। इससे साफ है कि महिलाएं अब सिर्फ अपना काम ही नहीं कर रहीं, बल्कि दूसरों को भी रोजगार दे रही हैं। खास बात यह है कि अब महिलाएं छोटे स्तर से आगे बढक़र अपने बिजनेस को बड़ा कर रही हैं। कई जगहों पर महिलाएं मिलकर ग्रुप में काम कर रही हैं, जिससे उनकी कमाई बढ़ रही है और आत्मविश्वास भी मजबूत हो रहा है। हालांकि आगे बढऩे के लिए अभी भी कुछ चीजों पर ध्यान देने की जरूरत है। अगर महिलाओं को आसान लोन, सही ट्रेनिंग और बाजार तक सीधी पहुंच मिले, तो राजस्थान में यह बदलाव और भी तेज हो सकता है। कुल मिलाकर, राजस्थान में महिलाओं का बिजऩेस अब एक मजबूत ट्रेंड बन चुका है, जो रोजगार बढ़ाने और राज्य की अर्थव्यवस्था को आगे ले जाने में अहम भूमिका निभा रहा है।
