TOP

ई - पेपर Subscribe Now!

ePaper
Subscribe Now!

Download
Android Mobile App

Daily Business Newspaper | A Knowledge Powerhouse in Hindi

08-04-2026

ईरान वॉर से एक्सपोर्ट पर पड़ रही ‘मार’!

  •  राजस्थान का बीकानेर शहर अपनी मिठास और तीखेपन के लिए देश-दुनिया में विशेष रूप से याद किया जाता है और भुजिया, पापड़ और नमकीन के मामले में बीकानेर ने अपनी एक अलग पहचान बनाई है, लेकिन वर्तमान समय में मिडिल ईस्ट में जारी अमरीका-इजरायल-ईरान वॉर के कारण बीकानेर का विश्व प्रसिद्ध नमकीन उद्योग गंभीर संकट का सामना कर रहा है। भुजिया, पापड़ और नमकीन सेव जैसे फूड प्रोडक्ट युद्धग्रस्त देशों में एक्सपोर्ट नहीं हो पा रहे हैं। शिपिंग रूट्स में व्यवधान और शिपिंग कॉस्ट अधिक बढ़ जाने से नमकीन उद्योग को डिलीवरी में देरी और कॉस्ट में इजाफा झेलना पड़ रहा है। नमकीन कारोबारियों के मुताबिक एक्सपोर्ट के साथ-साथ पाम ऑयल और सोयाबीन एडिबल ऑयल जैसे जरूरी रॉ-मटेरियल के इंपोर्ट पर भी गहरा असर पड़ा है। यही नहीं क्रूड ऑयल की बढ़ती रेट्स से पैकेजिंग की कॉस्ट 30-40 फीसदी तक बढ़ गई है, जिससे नमकीन, भुजिया व पापड़ मैन्युफैक्चरर के लिए कॉस्ट अधिक आ रही है। यह समय नमकीन के कारोबार के लिए बहुत महत्वपूर्ण होता है क्योंकि एक्सपोर्ट के ‘व्यस्ततम समय’ के लिए तैयारियां आमतौर पर इसी समय शुरू हो जाती हैं। प्रोडक्ट्स की सप्लाई के समय को लेकर बनी अनिश्चितता और बढ़े फ्रेट चार्ज की वजह से उद्यमी अपनी रणनीति पर पुनर्विचार को मजबूर हैं। रॉ-मटेरियल और पैकेजिंग मटेरियल की रेट्स बढ़ जाने से बड़े उद्योगों के साथ छोटे उद्योगों के भी बंद होने का खतरा मंडरा रहा है। गौरतलब है कि बीकानेर से खाड़ी देशों व यूरोप के देशों में बड़ी मात्रा में नमकीन, भुजिया, पापड़, मसाले और दूसरे सामान एक्सपोर्ट होते हैं। भीखाराम चांदमल भुजियावाला प्रा.लि. के डायरेक्टर आशीष अग्रवाल का कहना है कि ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट में भारी बढ़ोतरी हो गई है व पिछले एक महीने में एडिबल ऑयल की रेट्स में भी करीब 20 फीसदी की बढ़ोतरी हो चुकी है, जिसका सीधा असर प्रोडक्शन कॉस्ट पर पड़ रहा है। अमरीका में कंटेनर पहले 30 से 45 दिन में पहुंच जाता था, जो अब 60 से 75 दिनों में पहुंच रहा है। अग्रवाल ने यहां तक कहा कि इंडस्ट्री में कोविड जैसी स्थिति उत्पन्न हो रही है। बीकानेर में मसाले सेगमेंट की प्रमुख प्लेयर लोंगी इंडस्ट्रीज के प्रवीण शर्मा ने बताया कि बीकानेर में नमकीन, भुजिया व पापड़ से जुड़ी करीब चार-पांच कंपनियां ही एक्सपोर्ट करती है। अधिकांश नमकीन इंडस्ट्री डोमेस्टिक मार्केट पर ही निर्भर है। वॉर का नमकीन इंडस्ट्री के साथ सप्लायर्स पर भी इंपैक्ट दिखाई दे रहा है। इंडस्ट्री में हालांकि लेबर की किसी भी प्रकार की कमी नहीं है। शर्मा भी मानते हैं कि वॉर यदि लंबे समय तक चला तो स्थिति चिंताजनक हो सकती है। इंडस्ट्री के अनुसार अरब देशों में बीकानेरी नमकीन (स्नैक्स) और मसालों की डिमांड काफी ज़्यादा रहती है, लेकिन सप्लाई चेन डिस्टर्ब होने से इंडस्ट्री को काफी नुकसान उठाना पड़ रहा है। बीकानेर से हर महीने भुजिया, पापड़ और नमकीन के 15 से 20 कंटेनर एक्सपोर्ट किए जाते हैं। दूसरे सामान के करीब 60 कंटेनर भी बाहर भेजे जाते हैं। फिलहाल इस कारोबार का एक बड़ा हिस्सा ठप पड़ गया है। बताया जा रहा है कि करोड़ों रुपये की खेप पोर्ट पर या रास्ते में अटकी हुई हैं। खाओसा ब्रांड से फूड प्रोडक्ट्स बेचने वाली कंपनी खंडेलवाल फूड्स के प्रमुख योगेश खंडेलवाल के मुताबिक नमकीन इंडस्ट्री की कॉस्ट पहले से काफी अधिक बढ़ गई है, जिसके कारण नमकीन इंडस्ट्री को विभिन्न समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। एडिबल ऑयल की रेट्स 20 से 25 फीसदी, पैकिंग मटेरियल की रेट्स 50 फीसदी व इंडस्ट्रीयल फ्यूल की रेट्स काफी अधिक बढ़ जाने से इंडस्ट्री पर दोहरी मार पड़ रही है। बढ़ी हुई रेट्स में भी पैकिंग मटेरियल उपलब्ध नहीं है। खंडेलवाल के अनुसार बीकानेर में प्रतिदिन करीब 300 मीट्रिक टन नमकीन का प्रोडक्शन होता है। यहां पर नमकीन भुजिया की छोटी-बड़ी मिलाकर करीब 250 से 300 इंडस्ट्री कार्यरत है। इसी तरह श्रीराम पापड्स प्रा.लि. के फाउंडर रमेश सिंघी के अनुसार भी पैकेजिंग मटेरियल महंगा होने से ऑर्गेनाइज्ड सेक्टर को एडिशनल कॉस्ट वहन करनी पड़ रही है जिसके कारण खासकर नमकीन भुजिया जैसे मामले में कस्टमर के अनऑर्गेनाइज्ड सेक्टर की ओर शिफ्ट होने की आशंका है ।

Share
ईरान वॉर से एक्सपोर्ट पर पड़ रही ‘मार’!

 राजस्थान का बीकानेर शहर अपनी मिठास और तीखेपन के लिए देश-दुनिया में विशेष रूप से याद किया जाता है और भुजिया, पापड़ और नमकीन के मामले में बीकानेर ने अपनी एक अलग पहचान बनाई है, लेकिन वर्तमान समय में मिडिल ईस्ट में जारी अमरीका-इजरायल-ईरान वॉर के कारण बीकानेर का विश्व प्रसिद्ध नमकीन उद्योग गंभीर संकट का सामना कर रहा है। भुजिया, पापड़ और नमकीन सेव जैसे फूड प्रोडक्ट युद्धग्रस्त देशों में एक्सपोर्ट नहीं हो पा रहे हैं। शिपिंग रूट्स में व्यवधान और शिपिंग कॉस्ट अधिक बढ़ जाने से नमकीन उद्योग को डिलीवरी में देरी और कॉस्ट में इजाफा झेलना पड़ रहा है। नमकीन कारोबारियों के मुताबिक एक्सपोर्ट के साथ-साथ पाम ऑयल और सोयाबीन एडिबल ऑयल जैसे जरूरी रॉ-मटेरियल के इंपोर्ट पर भी गहरा असर पड़ा है। यही नहीं क्रूड ऑयल की बढ़ती रेट्स से पैकेजिंग की कॉस्ट 30-40 फीसदी तक बढ़ गई है, जिससे नमकीन, भुजिया व पापड़ मैन्युफैक्चरर के लिए कॉस्ट अधिक आ रही है। यह समय नमकीन के कारोबार के लिए बहुत महत्वपूर्ण होता है क्योंकि एक्सपोर्ट के ‘व्यस्ततम समय’ के लिए तैयारियां आमतौर पर इसी समय शुरू हो जाती हैं। प्रोडक्ट्स की सप्लाई के समय को लेकर बनी अनिश्चितता और बढ़े फ्रेट चार्ज की वजह से उद्यमी अपनी रणनीति पर पुनर्विचार को मजबूर हैं। रॉ-मटेरियल और पैकेजिंग मटेरियल की रेट्स बढ़ जाने से बड़े उद्योगों के साथ छोटे उद्योगों के भी बंद होने का खतरा मंडरा रहा है। गौरतलब है कि बीकानेर से खाड़ी देशों व यूरोप के देशों में बड़ी मात्रा में नमकीन, भुजिया, पापड़, मसाले और दूसरे सामान एक्सपोर्ट होते हैं। भीखाराम चांदमल भुजियावाला प्रा.लि. के डायरेक्टर आशीष अग्रवाल का कहना है कि ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट में भारी बढ़ोतरी हो गई है व पिछले एक महीने में एडिबल ऑयल की रेट्स में भी करीब 20 फीसदी की बढ़ोतरी हो चुकी है, जिसका सीधा असर प्रोडक्शन कॉस्ट पर पड़ रहा है। अमरीका में कंटेनर पहले 30 से 45 दिन में पहुंच जाता था, जो अब 60 से 75 दिनों में पहुंच रहा है। अग्रवाल ने यहां तक कहा कि इंडस्ट्री में कोविड जैसी स्थिति उत्पन्न हो रही है। बीकानेर में मसाले सेगमेंट की प्रमुख प्लेयर लोंगी इंडस्ट्रीज के प्रवीण शर्मा ने बताया कि बीकानेर में नमकीन, भुजिया व पापड़ से जुड़ी करीब चार-पांच कंपनियां ही एक्सपोर्ट करती है। अधिकांश नमकीन इंडस्ट्री डोमेस्टिक मार्केट पर ही निर्भर है। वॉर का नमकीन इंडस्ट्री के साथ सप्लायर्स पर भी इंपैक्ट दिखाई दे रहा है। इंडस्ट्री में हालांकि लेबर की किसी भी प्रकार की कमी नहीं है। शर्मा भी मानते हैं कि वॉर यदि लंबे समय तक चला तो स्थिति चिंताजनक हो सकती है। इंडस्ट्री के अनुसार अरब देशों में बीकानेरी नमकीन (स्नैक्स) और मसालों की डिमांड काफी ज़्यादा रहती है, लेकिन सप्लाई चेन डिस्टर्ब होने से इंडस्ट्री को काफी नुकसान उठाना पड़ रहा है। बीकानेर से हर महीने भुजिया, पापड़ और नमकीन के 15 से 20 कंटेनर एक्सपोर्ट किए जाते हैं। दूसरे सामान के करीब 60 कंटेनर भी बाहर भेजे जाते हैं। फिलहाल इस कारोबार का एक बड़ा हिस्सा ठप पड़ गया है। बताया जा रहा है कि करोड़ों रुपये की खेप पोर्ट पर या रास्ते में अटकी हुई हैं। खाओसा ब्रांड से फूड प्रोडक्ट्स बेचने वाली कंपनी खंडेलवाल फूड्स के प्रमुख योगेश खंडेलवाल के मुताबिक नमकीन इंडस्ट्री की कॉस्ट पहले से काफी अधिक बढ़ गई है, जिसके कारण नमकीन इंडस्ट्री को विभिन्न समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। एडिबल ऑयल की रेट्स 20 से 25 फीसदी, पैकिंग मटेरियल की रेट्स 50 फीसदी व इंडस्ट्रीयल फ्यूल की रेट्स काफी अधिक बढ़ जाने से इंडस्ट्री पर दोहरी मार पड़ रही है। बढ़ी हुई रेट्स में भी पैकिंग मटेरियल उपलब्ध नहीं है। खंडेलवाल के अनुसार बीकानेर में प्रतिदिन करीब 300 मीट्रिक टन नमकीन का प्रोडक्शन होता है। यहां पर नमकीन भुजिया की छोटी-बड़ी मिलाकर करीब 250 से 300 इंडस्ट्री कार्यरत है। इसी तरह श्रीराम पापड्स प्रा.लि. के फाउंडर रमेश सिंघी के अनुसार भी पैकेजिंग मटेरियल महंगा होने से ऑर्गेनाइज्ड सेक्टर को एडिशनल कॉस्ट वहन करनी पड़ रही है जिसके कारण खासकर नमकीन भुजिया जैसे मामले में कस्टमर के अनऑर्गेनाइज्ड सेक्टर की ओर शिफ्ट होने की आशंका है ।


Label

PREMIUM

CONNECT WITH US

X
Login
X

Login

X

Click here to make payment and subscribe
X

Please subscribe to view this section.

X

Please become paid subscriber to read complete news