TOP

ई - पेपर Subscribe Now!

ePaper
Subscribe Now!

Download
Android Mobile App

Daily Business Newspaper | A Knowledge Powerhouse in Hindi

07-04-2026

‘कंपनियों का Working Capital सिस्टम बिगड़ा, लोन की किश्तों में राहत की मांग’

  •  मिडिल-ईस्ट में एक माह से अधिक समय से जारी युद्ध के हालातों ने दक्षिणी राजस्थान, विशेषकर भीलवाड़ा के कपड़ा उद्योग और खनिज निर्यात व्यापार के सामने गंभीर संकट खड़ा कर दिया है। युद्ध के कारण बिगड़े ग्लोबल ट्रेड सिस्टम, नकदी तरलता का संकट के साथ उद्योगों पर विभिन्न प्रकार के वित्तीय ऋण भार के चलते बैंकों के ऋणों की किश्त चुकाने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इस समस्या को मद्देनजर रखते हुए मेवाड़ चैम्बर ऑफ कॉमर्स एण्ड इण्डस्ट्री सहित कई व्यावसायिक संगठनों ने इंडस्ट्री को इन कठिन हालात से उबारने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर और केन्द्र सरकार को पत्र लिखकर विशेष राहत पैकेज की मांग की है। मेवाड़ चैम्बर ऑफ कॉमर्स एण्ड इण्डस्ट्री के मानद महासचिव आर.के. जैन ने आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा को भेजे पत्र में भीलवाड़ा के उद्योगों के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए एक प्रतिवेदन में आग्रह किया है कि उद्योगों को ऋण की किश्तें और ब्याज चुकाने के लिए कम से कम छह महीने का मोरेटोरियम दिया जाए। जैन ने प्रतिवेदन में बताया कि युद्ध की अनिश्चितता ने कंपनियों के वर्किंग कैपिटल के गणित को पूरी तरह बिगाड़ दिया है। इसलिए टर्म लोन की किश्तों और ब्याज के भुगतान को मूल समय सीमा समाप्त होने के बाद चुकाने की अनुमति दी जाए और इस पर कोई अतिरिक्त ब्याज व पैनल्टी नहीं वसूला जाए। एमएसएमई और बड़े उद्योगों के लिए एनपीए घोषित करने के नियमों में कम से कम एक साल की ढील दी जाए। औद्योगिक संगठनों की ओर से मांग की गई है कि बैंकों को निर्देश दिए जाएं कि वे निर्यात और अन्य जरूरतों के लिए वर्किंग कैपिटल का विशेष मूल्यांकन करें और ड्राइंग पावर मानदंडों में ढील दें। उद्योगों के बैंक खातों को राहत के रुप में मोरेटोरियम का लाभ सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों के साथ-साथ उन खातों को भी मिले जो पहले से एनपीए की श्रेणी में हैं।

Share
‘कंपनियों का Working Capital सिस्टम बिगड़ा, लोन की किश्तों में राहत की मांग’

 मिडिल-ईस्ट में एक माह से अधिक समय से जारी युद्ध के हालातों ने दक्षिणी राजस्थान, विशेषकर भीलवाड़ा के कपड़ा उद्योग और खनिज निर्यात व्यापार के सामने गंभीर संकट खड़ा कर दिया है। युद्ध के कारण बिगड़े ग्लोबल ट्रेड सिस्टम, नकदी तरलता का संकट के साथ उद्योगों पर विभिन्न प्रकार के वित्तीय ऋण भार के चलते बैंकों के ऋणों की किश्त चुकाने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इस समस्या को मद्देनजर रखते हुए मेवाड़ चैम्बर ऑफ कॉमर्स एण्ड इण्डस्ट्री सहित कई व्यावसायिक संगठनों ने इंडस्ट्री को इन कठिन हालात से उबारने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर और केन्द्र सरकार को पत्र लिखकर विशेष राहत पैकेज की मांग की है। मेवाड़ चैम्बर ऑफ कॉमर्स एण्ड इण्डस्ट्री के मानद महासचिव आर.के. जैन ने आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा को भेजे पत्र में भीलवाड़ा के उद्योगों के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए एक प्रतिवेदन में आग्रह किया है कि उद्योगों को ऋण की किश्तें और ब्याज चुकाने के लिए कम से कम छह महीने का मोरेटोरियम दिया जाए। जैन ने प्रतिवेदन में बताया कि युद्ध की अनिश्चितता ने कंपनियों के वर्किंग कैपिटल के गणित को पूरी तरह बिगाड़ दिया है। इसलिए टर्म लोन की किश्तों और ब्याज के भुगतान को मूल समय सीमा समाप्त होने के बाद चुकाने की अनुमति दी जाए और इस पर कोई अतिरिक्त ब्याज व पैनल्टी नहीं वसूला जाए। एमएसएमई और बड़े उद्योगों के लिए एनपीए घोषित करने के नियमों में कम से कम एक साल की ढील दी जाए। औद्योगिक संगठनों की ओर से मांग की गई है कि बैंकों को निर्देश दिए जाएं कि वे निर्यात और अन्य जरूरतों के लिए वर्किंग कैपिटल का विशेष मूल्यांकन करें और ड्राइंग पावर मानदंडों में ढील दें। उद्योगों के बैंक खातों को राहत के रुप में मोरेटोरियम का लाभ सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों के साथ-साथ उन खातों को भी मिले जो पहले से एनपीए की श्रेणी में हैं।


Label

PREMIUM

CONNECT WITH US

X
Login
X

Login

X

Click here to make payment and subscribe
X

Please subscribe to view this section.

X

Please become paid subscriber to read complete news