भारतीय उद्योग व्यापार मण्डल ने वाणिज्य मंत्रालय को पत्र लिखकर कहा है कि भारत को अब दालों की आयात करने की जरूरत नहीं है। भारत में साल भर में करीब 240 लाख टन दालों की खपत होती है। कई वर्षों से भारत 200 लाख टन दालों का उत्पादन कर रहा है, 40 लाख टन दालें कम रहती है जिनमें मुख्यतया अरहर व चना ज्यादा कम रहते हैं। इसलिये भारत, म्यांमार से अरहर मूंग, उड़द आदि आयात करता है और ऑस्ट्रेलिया से चना आयात करता है। इस वर्ष चने की फसल 40 लाख टन बढक़र आ रही है। महाराष्ट्र में 30 लाख टन चना बढ़ा है और राजस्थान में गत वर्ष 15 लाख टन के मुकाबले बढक़र 26 लाख टन चने की पैदावार संभावित हो गयी है। इस कारण से देश में 40 लाख टन चने की पैदावार अधिक हो रही है। गत वर्ष यह पैदावार 70 लाख टन थी, जो इस बार 110 लाख टन संभावित है। केन्द्र सरकार द्वारा चने का घोषित समर्थन मूल्य 5875 रुपये प्रति क्विंटल है परन्तु मण्डियों में यह भाव 5150 से 5250 रुपये प्रति क्विंटल चल रहे हैं। सारा चना स्टॉक में जा रहा है। राजस्थान में किये गये सर्वे में सामने आया है कि पाली, जालौर, सांचौर जिले से 50 ट्रक चना रोज लोड हो रहा है और कच्ची मण्डियों में चने के भाव 5150 से 5175 रुपये प्रति क्विंटल चल रहे हैं। केकड़ी, मालपुरा, टोंक, मदनगंज में भी चने की आमद भरपूर हो रही है। कोटा, रामगंजमण्डी, बारां आदि मण्डियों में भी चने की आवक शुरू हो गयी है। बीकानेर, श्रीगंगानगर की सभी मण्डियां, अलवर जिला चने की पैदावार से भरा पड़ा है। भारतीय उद्योग व्यापार मण्डल के राष्ट्रीय अध्यक्ष बाबूलाल गुप्ता ने मांग की है कि केन्द्र सरकार सभी जगह समर्थन मूल्य पर खरीद करें। देश की सभी मण्डियों में खरीद कच्चे आढतिये के मार्फत की जायें। सरकार शीघ्र समर्थन मूल्य पर खरीद चालू करें, ताकि किसान को अगली बार चना बोने के लिये प्रोत्साहित किया जा सके। गुप्ता ने यह भी मांग की है कि केन्द्र सरकार बाहर से आने वाले चने पर रोक लगाये। यदि समर्थन मूल्य पर चना नहीं खरीद गया और केन्द्र सरकार द्वारा चने का आयात नहीं रोका गया तो किसान को 5 हजार रुपये क्विंटल से अधिक भाव नहीं मिलेंगे जो किसान के लिये घाटे का सौदा होगा।