जोधपुर/जयपुर। अमरीका-इजरायल-ईरान वॉर ने राजस्थान की इकोनॉमी पर गहरा असर डाला है। असल में क्रूड ऑयल से रिलेटेड प्रोडक्ट्स होने के कारण प्लास्टिक पैकेजिंग इंडस्ट्री के प्रमुख रॉ-मटेरियल नेचुरल पॉली, पॉलिस्टर, मेटिलाइज, रुष्ठक्कश्व व इंक आदि की रेट्स में 40 से 50 फीसदी वृद्धि हो जाने से इंडस्ट्री को विभिन्न समस्याओं से जूझना पड़ रहा है। इंडस्ट्री के जानकारों के मुताबिक कॉस्ट में यह बढ़ोतरी मुख्य रूप से खाड़ी देशों से इंपोर्ट होने वाले क्रूड ऑयल की सप्लाई में कमी और स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज जैसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों पर तनाव के कारण हुई है। प्लास्टिक का प्रोडक्शन मुख्य रूप से नैफ्था से होता है, जो क्रूड ऑयल का बॉय-प्रोडक्ट है। अमरीका-इजरायल-ईरान वॉर की वजह से मालवाहक जहाजों का किराया और इंश्योरेंस कॉस्ट भी बढ़ गई है, जिससे भी रॉ-मटेरियल की रेट्स में पिछले एक महिने में बड़ा उछाल देखने को मिला है। कुल मिलाकर रॉ-मटेरियल कॉस्ट के 50 फीसदी तक बढ़ जाने से प्लास्टिक पैकेजिंग इंडस्ट्री के मार्जिन गड़बड़ा गए हैं। इंडस्ट्री के जानकारों के अनुसार अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच हुए वॉर व इससे बढ़ी ग्लोबल टेंशन के चलते उपजे क्रूड ऑयल-एलपीजी गैस संकट से इंडिया समेत पूरी दुनिया जूझ रही है, लेकिन असर सिर्फ इन तक सीमित नहीं है, बल्कि इंडिया में कई और चीजों पर भी देखने को मिलने लगा है। आगामी कुछ सप्ताह में कई ऐसे प्रोडक्ट्स महंगे हो सकते हैं, जिनका हर घर में रोजमर्रा के रूप में इस्तेमाल होता है। दरअसल मिडिल ईस्ट में 40 दिन तक चले वॉर के कारण सप्लाई चेन पर पड़े बुरे असर की वजह से पॉलिमर की कीमतों में पिछले एक माह में तेज बढ़ोतरी देखने को मिली है। इंडिया में रिलायंस, गेल व इंडियन ऑयल समेत कुछ ही कंपनियां है, जो पॉलिमर या फिर क्रूड ऑयल बेस्ड रॉ-मटेरियल का प्रोडक्शन करती है। देश की तीसरी सबसे बड़ी प्लास्टिक पैकेजिंग इंडस्ट्री जोधपुर बेस्ड उमा गु्रप लिमिटेड के चेयरमैन व मैनेजिंग डायरेक्टर श्रीपाल लोढ़ा के मुताबिक ईरान-इजराइल युद्ध और जियो पॉलिटिकल स्थिति के कारण क्रूड ऑयल की कीमतों में उछाल से इंडियन प्लास्टिक पैकेजिंग इंडस्ट्री गंभीर संकट में है। इंडिया के लिए ये बात इसलिए भी खास है, क्योंकि रोजमर्रा के कंज्यूमर प्रोडक्ट्स की कम लागत वाली पैकेजिंग में प्लास्टिक का व्यापक रूप से उपयोग किया जाता है। पॉलिमर की रेट्स में भारी बढ़ोतरी होने से प्रोडक्शन ठप हो गया है, जिससे फूड, फार्मास्युटिकल व एफएमसीजी सेक्टर के लिए पैकेजिंग महंगी हो गई है। लोढ़ा के अनुसार रॉ-मटेरियल की रेट्स बढ़ जाने से ओवरऑल इंडस्ट्री का कैपेसिटी यूटिलाइजेशन 50 फीसदी रह गया है। अमरीका-ईरान में दो हफ्ते के लिए सीजफायर पर सहमति बन जाने से प्लास्टिक पैकेजिंग इंडस्ट्री ने राहत की सांस महसूस की है। देश की तीसरी सबसे बड़ी एल्युमीनियम फॉइल मैन्युफैक्चरिंग कंपनी पाली बेस्ड पीजी फॉइल्स लिमिटेड के डायरेक्टर साहिल शाह के अनुसार इंडस्ट्री के बेसिक रॉ-मटेरियल एल्युमीनियम फॉइल, केमिकल आदि की रेट्स 23 फीसदी तक बढ़ गई है, जो पूरी की पूरी कस्टमर्स पर पासऑन हो रही है। फ्रेट चार्ज के बढ़ जाने से एल्युमीनियम फॉइल की रेट्स काफी अधिक बढ़ गई है। वॉर के बाद से फार्मास्युटिकल्स कंपनियों से प्राप्त ऑडर्स की संख्या बढ़ी है, क्योंकि इन कंपनियों के दूसरे सप्लायर्स बढ़ी हुई रेट्स में भी समय पर माल की आपूर्ति नहीं कर पा रहे हैं। कंपनी वर्तमान में 23 देशों में एक्सपोर्ट का कार्य कर रही है। प्लास्टिक पैकेजिंग मैन्युफैक्चरिंग से जुड़ी औद्योगिक संस्था राजस्थान लैमिनेटर्स प्लास्टिक पैकेजिंग एसोसिएशन के सचिव चंद्रेश राज लोढ़ा का कहना हैं कि जोधपुर में 8 से 10 प्लास्टिक पैकेजिंग इंडस्ट्री कार्यरत है। इंडस्ट्री के मार्जिन काफी कम हो गए है। लोढ़ा के मुताबिक सरकार को छोटे उद्योगों को कोविड की तर्ज पर इन्सेंटिव देने की जरूरत है। गुजरात के गांधीनगर बेस्ड उमा कन्वर्टर लिमिटेड के डायरेक्टर अभिषेक सुमेर राज लोढ़ा के अनुसार रॉ-मटेरियल की रेट्स 50 फीसदी से ज्यादा इन्क्रीज हो गई है। गैस की किल्लत के चलते इंडस्ट्री ने गैस के विकल्प के रूप में डीजल का उपयोग करना शुरू किया है, जिसके कारण इंडस्ट्री की प्रोडक्शन कॉस्ट 3 रुपए प्रति किलो बढ़ गई है। बढ़ी हुई रेट्स कस्टमर को पास ऑन करने के अलावा और कोई ऑप्शन नहीं है।
