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04-06-2026

लक्जरी ब्रांड्स के टार्गेट पर एआई बिलिनेयर

  •  कोई तीन साल हो गए लक्जरी ब्रांड्स स्लो सेल्स के चैलेंज से गुजर रहे हैं। चीन जैसा बाहुबली लक्जरी मार्केट ठंडा पड़ा है और थोड़ी बहुत जो भी ग्रोथ हो रही है वो देसी लक्जरी ब्रांड्स हथिया रहे हैं। दूसरी ओर लक्जरी ब्रांड्स अपने ही घर यूरोप में स्लो सेल्स से परेशान हैं। ऐसे में यूरोप के बड़े लक्जरी ब्रांड्स को अब अमेरिका में ही ग्रोथ नजर आ रही है। अमेरिका में लक्जरी ब्रांड्स रिटेल नेटवर्क का विस्तार कर रहे हैं और बायर को कन्वर्ट करने के लिए फैशन शो कर रहे हैं। यूरोपीय लक्जरी ब्रांड्स को लगता है कि अमेरिका में एआई और टेक्नोलॉजी सैक्टर में आए बूम  से बिलिनेयर की नई फसल तैयार हुई है जिसे काटा जा सकता है। अन्य मार्केट्स में कमजोर कंज्यूमर सेंटिमेंट और घटती परचेज पावर के कारण ग्लोबल लक्जरी इंडस्ट्री लगातार तीन साल से प्रेशर में है। जैसे ही रिकवरी के ग्रीन शूट्स दिखने लगे वैसे ही लक्जरी कंपनियों का मक्का पश्चिम एशिया यानी खाड़ी के देश जंग में फंस गए। जंग के कारण इंटरनेशनल फ्लाइट्स के पर कतरने पड़े हैं जिसके कारण जंग का असर वेस्ट एशिया से कहीं दूर तक पड़ रहा है। चीन जो दो दशक से लक्जरी सेल्स का ग्रोथ ड्राइवर बना हुआ था अब डिफ्लेशन यानी प्राइस में कमी और रियल एस्टेट संकट के लॉन्ग-टर्म असर की चपेट में है। ऐसे में चहुंओर फंसी लक्जरी इंडस्ट्री को अब अमेरिकन इलीट्स में ही सहारा नजर आ रहा है। लंदन की इंवेस्टमेंट कंपनी एलायंसबर्नस्टीन के मार्कस मॉरिस-आयटन के अनुसार अमेरिका के हाई-इनकम बायर यूरोप और अन्य क्षेत्रों की तुलना में कहीं अधिक मजबूत साबित हुए हैं। एआई बूम के कारण अमेरिका में इलीट्स की परचेजिंग पावर बढ़ रही है। ग्लोबल लक्जरी रिटेल रिपोर्ट के अनुसार 2025 में पहली बार नॉर्थ अमेरिका नए लक्जरी स्टोर ओपनिंग का ग्लोबल लीडर बन बैठा। 2025 में दुनिया भर में खुले नए लक्जरी स्टोर्स में लगभग 27 परसेंट नॉर्थ अमेरिका में खुले। यूरोप 26 परसेंट के साथ दूसरे और चीन 19 परसेंट के साथ तीसरे स्थान पर रहा। दुनियाभर में देखें तो नए लक्जरी स्टोर्स की संख्या 2020 के बाद सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई। एनेलिस्ट्स के अनुसार अमेरिका की हाई असैट वेल्यू के मुकाबले ज्यादातर लक्जरी ब्रांड्स ने इसका पूरा इस्तेमाल नहीं किया है। इसलिए मौका मिल रहा है तो लक्जरी ब्रांड अमेरिका में रिटेल और मार्केटिंग पर इंवेस्टमेंट बढ़ा रहे हैं। इतालियन लक्जरी आउटरवियर कंपनी मॉन्क्लर इस वर्ष अपने ज्यादातर नए स्टोर अमेरिका में खोलेगी। मार्केट कन्सल्टेंट बैन एंड कंपनी का कहना है कि लक्जरी इंडस्ट्री इस समय दो-रफ्तार वाली दुनिया का अक्स बन गई है। एक ओर अमेरिका और एशिया के मार्केट्स में तेज ग्रोथ हे जबकि यूरोप और वेस्ट एशिया ईरान वॉर के कारण टूरिज्म और घटते खर्च की चपेट में हैं। अमेरिकी लक्जरी बायर सेंटिमेंट सुधरने का फायदा अमेरिकी कंपनियों राल्फ लॉरेन और कोच ब्रांड की ओनर टेपेस्ट्री को भी मिला है। हालांकि मॉर्गन स्टेनली के एनेलिस्ट एडुआर्ड ओबैं का कहना है कि अमेरिका में आने वाले नए आईपीओ लक्जरी रिस्टवॉच और ज्यूलरी की डिमांड को अनलॉक कर सकते हैं। ग्लोबल लक्जरी स्पेंडिंग में अमेरिका का शेयर केवल 20 से 22 परसेंट है। और रियल रिकवरी के लिए चीन का पटरी पर लौटना जरूरी है और चीन के घाटे की भरपाई अमेरिका नहीं कर सकता।

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लक्जरी ब्रांड्स के टार्गेट पर एआई बिलिनेयर

 कोई तीन साल हो गए लक्जरी ब्रांड्स स्लो सेल्स के चैलेंज से गुजर रहे हैं। चीन जैसा बाहुबली लक्जरी मार्केट ठंडा पड़ा है और थोड़ी बहुत जो भी ग्रोथ हो रही है वो देसी लक्जरी ब्रांड्स हथिया रहे हैं। दूसरी ओर लक्जरी ब्रांड्स अपने ही घर यूरोप में स्लो सेल्स से परेशान हैं। ऐसे में यूरोप के बड़े लक्जरी ब्रांड्स को अब अमेरिका में ही ग्रोथ नजर आ रही है। अमेरिका में लक्जरी ब्रांड्स रिटेल नेटवर्क का विस्तार कर रहे हैं और बायर को कन्वर्ट करने के लिए फैशन शो कर रहे हैं। यूरोपीय लक्जरी ब्रांड्स को लगता है कि अमेरिका में एआई और टेक्नोलॉजी सैक्टर में आए बूम  से बिलिनेयर की नई फसल तैयार हुई है जिसे काटा जा सकता है। अन्य मार्केट्स में कमजोर कंज्यूमर सेंटिमेंट और घटती परचेज पावर के कारण ग्लोबल लक्जरी इंडस्ट्री लगातार तीन साल से प्रेशर में है। जैसे ही रिकवरी के ग्रीन शूट्स दिखने लगे वैसे ही लक्जरी कंपनियों का मक्का पश्चिम एशिया यानी खाड़ी के देश जंग में फंस गए। जंग के कारण इंटरनेशनल फ्लाइट्स के पर कतरने पड़े हैं जिसके कारण जंग का असर वेस्ट एशिया से कहीं दूर तक पड़ रहा है। चीन जो दो दशक से लक्जरी सेल्स का ग्रोथ ड्राइवर बना हुआ था अब डिफ्लेशन यानी प्राइस में कमी और रियल एस्टेट संकट के लॉन्ग-टर्म असर की चपेट में है। ऐसे में चहुंओर फंसी लक्जरी इंडस्ट्री को अब अमेरिकन इलीट्स में ही सहारा नजर आ रहा है। लंदन की इंवेस्टमेंट कंपनी एलायंसबर्नस्टीन के मार्कस मॉरिस-आयटन के अनुसार अमेरिका के हाई-इनकम बायर यूरोप और अन्य क्षेत्रों की तुलना में कहीं अधिक मजबूत साबित हुए हैं। एआई बूम के कारण अमेरिका में इलीट्स की परचेजिंग पावर बढ़ रही है। ग्लोबल लक्जरी रिटेल रिपोर्ट के अनुसार 2025 में पहली बार नॉर्थ अमेरिका नए लक्जरी स्टोर ओपनिंग का ग्लोबल लीडर बन बैठा। 2025 में दुनिया भर में खुले नए लक्जरी स्टोर्स में लगभग 27 परसेंट नॉर्थ अमेरिका में खुले। यूरोप 26 परसेंट के साथ दूसरे और चीन 19 परसेंट के साथ तीसरे स्थान पर रहा। दुनियाभर में देखें तो नए लक्जरी स्टोर्स की संख्या 2020 के बाद सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई। एनेलिस्ट्स के अनुसार अमेरिका की हाई असैट वेल्यू के मुकाबले ज्यादातर लक्जरी ब्रांड्स ने इसका पूरा इस्तेमाल नहीं किया है। इसलिए मौका मिल रहा है तो लक्जरी ब्रांड अमेरिका में रिटेल और मार्केटिंग पर इंवेस्टमेंट बढ़ा रहे हैं। इतालियन लक्जरी आउटरवियर कंपनी मॉन्क्लर इस वर्ष अपने ज्यादातर नए स्टोर अमेरिका में खोलेगी। मार्केट कन्सल्टेंट बैन एंड कंपनी का कहना है कि लक्जरी इंडस्ट्री इस समय दो-रफ्तार वाली दुनिया का अक्स बन गई है। एक ओर अमेरिका और एशिया के मार्केट्स में तेज ग्रोथ हे जबकि यूरोप और वेस्ट एशिया ईरान वॉर के कारण टूरिज्म और घटते खर्च की चपेट में हैं। अमेरिकी लक्जरी बायर सेंटिमेंट सुधरने का फायदा अमेरिकी कंपनियों राल्फ लॉरेन और कोच ब्रांड की ओनर टेपेस्ट्री को भी मिला है। हालांकि मॉर्गन स्टेनली के एनेलिस्ट एडुआर्ड ओबैं का कहना है कि अमेरिका में आने वाले नए आईपीओ लक्जरी रिस्टवॉच और ज्यूलरी की डिमांड को अनलॉक कर सकते हैं। ग्लोबल लक्जरी स्पेंडिंग में अमेरिका का शेयर केवल 20 से 22 परसेंट है। और रियल रिकवरी के लिए चीन का पटरी पर लौटना जरूरी है और चीन के घाटे की भरपाई अमेरिका नहीं कर सकता।


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