TOP

ई - पेपर Subscribe Now!

ePaper
Subscribe Now!

Download
Android Mobile App

Daily Business Newspaper | A Knowledge Powerhouse in Hindi

19-05-2026

डॉलर नहीं पेटेंट हैं सबसे वेल्यूएबल करेंसी!

  •  आज की दुनिया में टेक्नोलॉजी और उसका व्यावसायिक उपयोग किसी भी देश की आर्थिक प्रगति का सबसे बड़ा आधार बन चुका है। एपल,  माइक्रोसॉफ्ट, एल्फाबेट, मेटा, एनवीडिया और टेस्ला जैसी मल्टीनेशनल कंपनियों का वेल्यूएशन कई देशों के जीडीपी से भी ज्यादा है। यानी मॉडर्न इकोनॉमी में टेक्नोलॉजी सबसे बड़ा असैट बन चुकी है। पेटेंट एक कानूनी अधिकार होता है, जो किसी नई और यूनीक टेक्नोलॉजी, प्रोडक्ट या प्रोसेस के लिए आमतौर पर 20 वर्ष तक दिया जाता है। पेटेंट मिलने के बाद कोई व्यक्ति या कंपनी उस तकनीक के उपयोग पर विशेष अधिकार प्राप्त कर लेती है और दूसरों को उसके व्यावसायिक उपयोग से रोक सकती है। सरल शब्दों में कहें तो पेटेंट किसी आविष्कार के व्यावसायिक शोषण का विशेषाधिकार है। दवा उद्योग की नई दवाइयां, 4जी और 5जी मोबाइल टेक्नोलॉजी, वाई-फाई सिस्टम, एबीएस ब्रेकिंग टेक्नोलॉजी और इलेक्ट्रिक वेहीकल्स की बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम ऐसे ही कुछ टेक्नोलॉजी पेटेंट्स हैं जिन्होंने दुनिया बदल कर रख दी है। और जिन इनोवेटर या कंपनियों ने इन्हें डवलप कर पेटेंट कराया उनकी पांचों अंगुलियां घी में हैं। पेटेंट को अन्य कंपनियों को लाइसेंस देकर भी आय अर्जित की जा सकती है। यही कारण है कि नॉलेज और टेक्नोलॉजी आधारित मॉडर्न इकोनॉमी में पेटेंट दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण करेंसी बन चुके हैं। पेटेंट की संख्या से कंपनी या देश के आरएंडडी इंवेस्टमेंट का भी पता चलता है। जिन कंपनियों के पास बड़े पेटेंट पोर्टफोलियो होते हैं, वे इनसे मोटी कमाई करती हैं। लगभग एक दशक पहले माइक्रोसॉफ्ट ने केवल एंड्रॉयड से जुड़े पेटेंट लाइसेंसिंग से करीब 2 बिलियन डॉलर की कमाई की थी। भारत भी डिजिटल इकोनॉमी बनने की ओर बढ़ रहा है और घरेलू इनोवेशन में लगातार वृद्धि हो रही है। पेटेंट, डिजाइन और ट्रेडमार्क कंट्रोलर जनरल ऑफिस की लेटेस्ट रिपोर्ट के अनुसार भारत में पेटेंट आवेदन 75 हजार के पार पहुंच गए हैं, जिनमें 61.9 परसेंट से अधिक आवेदन भारतीय नागरिकों द्वारा दायर किए गए। वल्र्ड इंटेलेक्चुअल प्रोपर्टी ऑर्गेनाइजेशन के ग्लोबल इनोवेशन इंडेक्स 2025 में भारत 139 देशों में 38वें स्थान पर पहुंच गया। यह 2020 में 48वें स्थान से लगभग 10 पायदान की छलांग है। भारत सरकार विकसित भारत विजन के तहत 6जी तकनीक पर विशेष ध्यान दे रही है, ताकि अगली पीढ़ी की कनेक्टिविटी में भारत नेतृत्व हासिल कर सके। इसके अलावा सरकार खनिज और माइनिंग क्षेत्र में भी पेटेंट को प्रोत्साहित कर रही है। पेटेंट के व्यवसायीकरण का सबसे लोकप्रिय तरीका लाइसेंसिंग है। भारत की नेशनल आईपीआर नीति 2016 में भी इसे मान्यता दी गई है। लाइसेंसिंग कई प्रकार की हो सकती है, जैसे द्विपक्षीय समझौते या पेटेंट पूल। पेटेंट पूल में कई कंपनियां अपने पेटेंट को एक साथ जोडक़र एक साझा लाइसेंसिंग प्लेटफॉर्म तैयार करती हैं। इसी तरह सॉवरेन पेटेंट फंड की अवधारणा भी तेजी से उभरी है। यह ऐसे सरकारी फंड होते हैं, जो पेटेंट खरीदने और उनका प्रबंधन करने के लिए बनाए जाते हैं।

Share
डॉलर नहीं पेटेंट हैं सबसे वेल्यूएबल करेंसी!

 आज की दुनिया में टेक्नोलॉजी और उसका व्यावसायिक उपयोग किसी भी देश की आर्थिक प्रगति का सबसे बड़ा आधार बन चुका है। एपल,  माइक्रोसॉफ्ट, एल्फाबेट, मेटा, एनवीडिया और टेस्ला जैसी मल्टीनेशनल कंपनियों का वेल्यूएशन कई देशों के जीडीपी से भी ज्यादा है। यानी मॉडर्न इकोनॉमी में टेक्नोलॉजी सबसे बड़ा असैट बन चुकी है। पेटेंट एक कानूनी अधिकार होता है, जो किसी नई और यूनीक टेक्नोलॉजी, प्रोडक्ट या प्रोसेस के लिए आमतौर पर 20 वर्ष तक दिया जाता है। पेटेंट मिलने के बाद कोई व्यक्ति या कंपनी उस तकनीक के उपयोग पर विशेष अधिकार प्राप्त कर लेती है और दूसरों को उसके व्यावसायिक उपयोग से रोक सकती है। सरल शब्दों में कहें तो पेटेंट किसी आविष्कार के व्यावसायिक शोषण का विशेषाधिकार है। दवा उद्योग की नई दवाइयां, 4जी और 5जी मोबाइल टेक्नोलॉजी, वाई-फाई सिस्टम, एबीएस ब्रेकिंग टेक्नोलॉजी और इलेक्ट्रिक वेहीकल्स की बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम ऐसे ही कुछ टेक्नोलॉजी पेटेंट्स हैं जिन्होंने दुनिया बदल कर रख दी है। और जिन इनोवेटर या कंपनियों ने इन्हें डवलप कर पेटेंट कराया उनकी पांचों अंगुलियां घी में हैं। पेटेंट को अन्य कंपनियों को लाइसेंस देकर भी आय अर्जित की जा सकती है। यही कारण है कि नॉलेज और टेक्नोलॉजी आधारित मॉडर्न इकोनॉमी में पेटेंट दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण करेंसी बन चुके हैं। पेटेंट की संख्या से कंपनी या देश के आरएंडडी इंवेस्टमेंट का भी पता चलता है। जिन कंपनियों के पास बड़े पेटेंट पोर्टफोलियो होते हैं, वे इनसे मोटी कमाई करती हैं। लगभग एक दशक पहले माइक्रोसॉफ्ट ने केवल एंड्रॉयड से जुड़े पेटेंट लाइसेंसिंग से करीब 2 बिलियन डॉलर की कमाई की थी। भारत भी डिजिटल इकोनॉमी बनने की ओर बढ़ रहा है और घरेलू इनोवेशन में लगातार वृद्धि हो रही है। पेटेंट, डिजाइन और ट्रेडमार्क कंट्रोलर जनरल ऑफिस की लेटेस्ट रिपोर्ट के अनुसार भारत में पेटेंट आवेदन 75 हजार के पार पहुंच गए हैं, जिनमें 61.9 परसेंट से अधिक आवेदन भारतीय नागरिकों द्वारा दायर किए गए। वल्र्ड इंटेलेक्चुअल प्रोपर्टी ऑर्गेनाइजेशन के ग्लोबल इनोवेशन इंडेक्स 2025 में भारत 139 देशों में 38वें स्थान पर पहुंच गया। यह 2020 में 48वें स्थान से लगभग 10 पायदान की छलांग है। भारत सरकार विकसित भारत विजन के तहत 6जी तकनीक पर विशेष ध्यान दे रही है, ताकि अगली पीढ़ी की कनेक्टिविटी में भारत नेतृत्व हासिल कर सके। इसके अलावा सरकार खनिज और माइनिंग क्षेत्र में भी पेटेंट को प्रोत्साहित कर रही है। पेटेंट के व्यवसायीकरण का सबसे लोकप्रिय तरीका लाइसेंसिंग है। भारत की नेशनल आईपीआर नीति 2016 में भी इसे मान्यता दी गई है। लाइसेंसिंग कई प्रकार की हो सकती है, जैसे द्विपक्षीय समझौते या पेटेंट पूल। पेटेंट पूल में कई कंपनियां अपने पेटेंट को एक साथ जोडक़र एक साझा लाइसेंसिंग प्लेटफॉर्म तैयार करती हैं। इसी तरह सॉवरेन पेटेंट फंड की अवधारणा भी तेजी से उभरी है। यह ऐसे सरकारी फंड होते हैं, जो पेटेंट खरीदने और उनका प्रबंधन करने के लिए बनाए जाते हैं।


Label

PREMIUM

CONNECT WITH US

X
Login
X

Login

X

Click here to make payment and subscribe
X

Please subscribe to view this section.

X

Please become paid subscriber to read complete news