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Daily Business Newspaper | A Knowledge Powerhouse in Hindi

01-05-2026

हेयर ग्रोथ में दिख रहा अपॉर्चुनिटी का सफा-चट्ट मैदान

  •  भारत में हेयर ग्रोथ प्रोडक्ट्स का मार्केट बहुत तेजी से बढ़ रहा है और कंज्यूमर वेलनेस सेगमेंट के रूप में उभर रहा है। रेडसीर स्ट्रेटेजी कन्सल्टेंट्स की रिपोर्ट के अनुसार, एलोपेसिया (बाल झडऩे) से जुड़ा मार्केट 2023 के $26.7 करोड़ डॉलर से बढक़र 2028 तक $54.6 करोड़ डॉलर तक पहुंच सकता है। यानी यह सेगमेंट अगले कुछ वर्षों में दोगुने से ज्यादा होने की राह पर है।रिपोर्ट के मुताबिक, यह बाजार 14-15 परसेंट सीएजीआर से बढऩे का अनुमान है और एक ऐसे मोड़ पर पहुंच चुका है जहां कंज्यूमर डिमांड, प्रोडक्ट इनोवेशन और एफएमजीसी इंवेस्टमेंट तीनों एक साथ मिल रहे हैं। इससे बड़े ब्रांड्स के लिए वाइट स्पेस अपॉर्चुनिटी यानी खाली मैदान में खेलने के मौके हैं। इस बदलाव का सबसे बड़ा ड्राइवर सप्लीमेंट्स सेगमेंट है, जो इस कैटेगरी में सबसे तेजी से बढ़ रहा है और 2028 तक करीब 18 परसेंट सीएजीआर से बढऩे की उम्मीद है। यह पारंपरिक टॉपिकल सॉल्यूशंस (तेल, सीरम आदि जिन्हें ऊपर लगाया जाता है) से आगे निकल रहा है। यह ट्रेंड कंज्यूमर के बदलते व्यवहार को दर्शाता है। अब लोग डॉक्टरी ट्रीटमेंट की बजाय रोजमर्रा के, नॉन-इनवेसिव और प्रिवेंटिव वेलनेस प्रोडक्ट्स को ज्यादा अपनाने लगे हैं।भारत में करीब 8.2 करोड़ शहरी लोग बाल झडऩे की समस्या से जूझ रहे हैं, लेकिन सिर्फ लगभग 50 लाख लोग ही ओटीसी (बिना डॉक्टरी पर्ची) सॉल्यूशंस का उपयोग कर रहे हैं। इससे पता चलता है कि बाजार अभी भी काफी हद तक सीमित दायरे में चल रहा है और इसमें बड़ी ग्रोथ की संभावना मौजूद है। मास मार्केट का सबसे बड़ा अवसर अफोर्डेबिलिटी में है। 90 परसेंट से ज्यादा उपभोक्ता हर महीने  1 हजार से कम खर्च करना चाहते हैं, जबकि कई संगठित ब्रांड्स के प्रोडक्ट्स इससे महंगे हैं। यही गैप एफएमसीजी और ब्यूटी कंपनियों को आकर्षित कर रहा है। डिस्ट्रिब्यूशन भी तेजी से बदल रहा है। पहले यह बाजार पूरी तरह फार्मा-ड्रिवन था, फिर एफएमसीजी कंपनियां जुड़ीं, और अब यह ओम्नीचैनल मॉडल में बदल चुका है। आज दर्जनों नेशनल और रीजनल ब्रांड, डी2सी ब्रांड्स, ई-कॉमर्स, क्विक कॉमर्स और ऑफलाइन रिटेल सभी मिलकर ग्रोथ को बढ़ा रहे हैं। बड़े कॉर्पोरेट निवेश भी इस ट्रेंड को मजबूत कर रहे हैं। हिंदुस्तान यूनीलिवर ने ओ•िावा और वेलबीइंग न्यूट्रिशन में निवेश किया,  वहीं पैराशूट वाली कंपनी मेरिको ने प्लिक्स को खरीदा है जबकि टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स ने ऑर्गेनिक इंडिया का अधिग्रहण किया। यानी इस सेगमेंट में बड़े एफएमसीजी खिलाडिय़ों की रुचि बढ़ रही है।

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हेयर ग्रोथ में दिख रहा अपॉर्चुनिटी का सफा-चट्ट मैदान

 भारत में हेयर ग्रोथ प्रोडक्ट्स का मार्केट बहुत तेजी से बढ़ रहा है और कंज्यूमर वेलनेस सेगमेंट के रूप में उभर रहा है। रेडसीर स्ट्रेटेजी कन्सल्टेंट्स की रिपोर्ट के अनुसार, एलोपेसिया (बाल झडऩे) से जुड़ा मार्केट 2023 के $26.7 करोड़ डॉलर से बढक़र 2028 तक $54.6 करोड़ डॉलर तक पहुंच सकता है। यानी यह सेगमेंट अगले कुछ वर्षों में दोगुने से ज्यादा होने की राह पर है।रिपोर्ट के मुताबिक, यह बाजार 14-15 परसेंट सीएजीआर से बढऩे का अनुमान है और एक ऐसे मोड़ पर पहुंच चुका है जहां कंज्यूमर डिमांड, प्रोडक्ट इनोवेशन और एफएमजीसी इंवेस्टमेंट तीनों एक साथ मिल रहे हैं। इससे बड़े ब्रांड्स के लिए वाइट स्पेस अपॉर्चुनिटी यानी खाली मैदान में खेलने के मौके हैं। इस बदलाव का सबसे बड़ा ड्राइवर सप्लीमेंट्स सेगमेंट है, जो इस कैटेगरी में सबसे तेजी से बढ़ रहा है और 2028 तक करीब 18 परसेंट सीएजीआर से बढऩे की उम्मीद है। यह पारंपरिक टॉपिकल सॉल्यूशंस (तेल, सीरम आदि जिन्हें ऊपर लगाया जाता है) से आगे निकल रहा है। यह ट्रेंड कंज्यूमर के बदलते व्यवहार को दर्शाता है। अब लोग डॉक्टरी ट्रीटमेंट की बजाय रोजमर्रा के, नॉन-इनवेसिव और प्रिवेंटिव वेलनेस प्रोडक्ट्स को ज्यादा अपनाने लगे हैं।भारत में करीब 8.2 करोड़ शहरी लोग बाल झडऩे की समस्या से जूझ रहे हैं, लेकिन सिर्फ लगभग 50 लाख लोग ही ओटीसी (बिना डॉक्टरी पर्ची) सॉल्यूशंस का उपयोग कर रहे हैं। इससे पता चलता है कि बाजार अभी भी काफी हद तक सीमित दायरे में चल रहा है और इसमें बड़ी ग्रोथ की संभावना मौजूद है। मास मार्केट का सबसे बड़ा अवसर अफोर्डेबिलिटी में है। 90 परसेंट से ज्यादा उपभोक्ता हर महीने  1 हजार से कम खर्च करना चाहते हैं, जबकि कई संगठित ब्रांड्स के प्रोडक्ट्स इससे महंगे हैं। यही गैप एफएमसीजी और ब्यूटी कंपनियों को आकर्षित कर रहा है। डिस्ट्रिब्यूशन भी तेजी से बदल रहा है। पहले यह बाजार पूरी तरह फार्मा-ड्रिवन था, फिर एफएमसीजी कंपनियां जुड़ीं, और अब यह ओम्नीचैनल मॉडल में बदल चुका है। आज दर्जनों नेशनल और रीजनल ब्रांड, डी2सी ब्रांड्स, ई-कॉमर्स, क्विक कॉमर्स और ऑफलाइन रिटेल सभी मिलकर ग्रोथ को बढ़ा रहे हैं। बड़े कॉर्पोरेट निवेश भी इस ट्रेंड को मजबूत कर रहे हैं। हिंदुस्तान यूनीलिवर ने ओ•िावा और वेलबीइंग न्यूट्रिशन में निवेश किया,  वहीं पैराशूट वाली कंपनी मेरिको ने प्लिक्स को खरीदा है जबकि टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स ने ऑर्गेनिक इंडिया का अधिग्रहण किया। यानी इस सेगमेंट में बड़े एफएमसीजी खिलाडिय़ों की रुचि बढ़ रही है।


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