दिग्गज स्विस रिस्टवॉच मेकर स्वाच और उसकी लक्जरी पार्टनर ऑदेमार्स पिगे आमतौर पर मिडल एज्ड, सक्सैसफुल, इलीट बायर्स के लिए प्रोडक्ट लॉन्च करती हैं। लेकिन जेन•ाी का एक बाइंग पैटर्न ऐसा है जिसे कैश करने का लालच इन ग्लोबल दिग्गजों को एक नई टेरिटरी की ओर खींच रहा है। जेन•ाी के इस बाइंग पैटर्न का नाम है ड्रॉप कल्चर। ड्रॉप कल्चर दरअसल एक स्ट्रेटेजी है जिसके दम पर नाइके स्नीकर से लेकर लबुबु टॉइज और चिकन सैंडविच पॉपआई•ा तक मोटा माल कमा चुके हैं। ड्रॉप कल्चर का मतलब है लिमिटेड संख्या में किसी खास प्रोडक्ट को अचानक लॉन्च कर ऐसी सनसनी पैदा करना जिससे बायर्स में फोमो या फीयर ऑफ मिसिंग आउट या फिर कहें जो पीछे छूट जाने जैसी भावना घर कर जाए। यह स्ट्रेटेजी पहली बार 1990 के दशक में स्ट्रीटवियर और स्नीकर ब्रांड्स ने अपनाई थी, लेकिन अब टिकटॉक और इंस्टाग्राम ने इसे वायरल कल्चर बना दिया है। नए जमाने में किसी प्रोडक्ट की असली पावर क्वॉलिटी नहीं बल्कि रेअरिटी (दुर्लभता) और सोशल मीडिया हाइप है। स्वाच ने हाल ही में ऑदेमार्स पिगे के साथ मिलकर रॉयल पॉप नाम से पॉकेट वॉच कलेक्शन लॉन्च किया। यह घडिय़ां स्वाच की कलरफुल और रेट्रो पहचान को ऑडेमार्स पिगे की प्रीमियम लक्जरी इमेज के साथ जोड़ती हैं। वैसे तो यह ट्रिक ही है लेकिन तीर टार्गेट पर लगा और कंपनी के कई स्टोर्स के बाहर भारी भीड़ लग गई। मिलान में तो घडिय़ां खरीदने की होड़ में बायर्स के बीच हाथापाई तक हो गई। भीड़ को कंट्रोल करने के लिए कुछ स्टोर्स को अस्थायी रूप से बंद करना पड़ गया। यह विवाद अपने आप में मार्केटिंग का हिस्सा बन गया। मार्केटिंग विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी घटनाएं ब्रांड को और ज्यादा चर्चा में ले आती हैं। मार्केटिंग के प्रोफेसर रोमन पाव्ल्युचेंको के अनुसार, मार्केटिंग के नजरिए से यह स्वाच के लिए सोने का खजाना साबित हो सकता है। इस तरह का हंगामा ब्रांड के लिए हेलो इफेक्ट पैदा करता है, जिसमें लोग केवल प्रोडक्ट नहीं बल्कि उससे जुड़ी चर्चा और सामाजिक पहचान के लिए पैसा खर्च करते हैं। असल में जेन•ाी बायर अब प्रोडक्ट सिर्फ इस्तेमाल के लिए नहीं खरीदते, बल्कि कल्चरल मोमेंट खरीदते हैं। जब कोई प्रोडक्ट लिमिटेड मात्रा में आता है और सोशल मीडिया पर वायरल हो जाता है, तो वह स्टेटस सिंबल में बदल जाता है। पॉपआई•ा के 2019 में आए चिकन सैंडविच के लिए इतने लोग टूट पड़े कि कई जगह हिंसक झड़पें तक हुईं। नतीजा कंपनी की तिमाही सेल्स 38 परसेंट बढ़ गइ। एनेलिस्ट कहते हैं कि लोगों की भीड़ और आपस में उलझने की इतनी चर्चा हुई जितनी लगभग 6.5 करोड़ डॉलर की मीडिया कवरेज से मिलती। इसी तरह चीन की टॉय रिटेलर पॉपमार्ट की लबुबु डॉल को लेकर ऐसा क्रेज बना कि ब्रिटेन में कंपनी को स्टोर को सेल्स बंद करनी पड़ गई। नतीजा 2025 में कंपनी की सेल्स इनकम 185 परसेंट बढ़ गई। एनेलिस्ट्स के अनुसार लोग इन उत्पादों को केवल इस्तेमाल के लिए नहीं खरीदते, बल्कि कलेक्ट करने और सोशल मीडिया पहचान के लिए खरीदते हैं। ऑदेमार्स पिगे जैसे अल्ट्रा-लक्जरी ब्रांड्स की प्राइस पोजिशनिंग और टार्गेट कस्टमर बहुत नीश होते हैं लेकिन 335 पाउंड की रॉयल पॉप घडिय़ां जेन•ाी को पहली बार इस लक्जरी ब्रांड्स के साथ जुडऩे का मौका दे रही हैं। लक्जरी वॉच प्लेटफॉर्म क्रोनो हंटर के सिमोन लजारस के अनुसार यही इस स्ट्रेटेजी की असली ताकत है। लोग पैसा भी खर्च करते हैं और उन्हें ये लगता है कि सिर्फ इतने से बजट में लक्जरी ब्रांड घर ला रहे हैं। इसमें हर्ड मेंटैलिटी यानी भीड़ मानसिकता भी बड़ी भूमिका निभाती है। जब लोग लंबी कतार देखते हैं, तो उन्हें लगता है कि प्रोडक्ट बेहद खास है और वे उसे मिस नहीं करना चाहते। यानी कंज्यूमर बिहेवियर में वायरैलिटी एक जबरदस्त मार्केटिंग टूल बन चुकी है। हाल के सालों में स्वाच पर इंवेस्टर्स का प्रेशर रहा है और वे कंपनी की स्ट्रेटेजी पर सवाल उठाते रहे हैं। ऐसे में रॉयल पॉप लॉन्च कंपनी के लिए केवल एक घड़ी लॉन्च नहीं बल्कि ब्रांड रीइमेजिंग का प्रयास है। रिपोर्ट्स कहती हैं कि रॉयल पॉप पॉकेट वॉच रेंज का कंपनी का रेवेन्यू 3 परसेंट बढ़ सकता है।