भारत के एल्कोबेव मार्केट में बड़ा कल्चरल शिफ्ट हो रहा है। यंग कंज्यूमर अब ऐसी शराब पसंद कर रहे हैं जिसका स्वाद पारंपरिक शराब जैसा तेज, कड़वा या भारी न हो। जामुन, आम, पुदीना, ठंडाई, सिट्रस और अन्य फलों व भारतीय फ्लेवर तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं। कंपनियों का मानना है कि जेनजी जेनरेशन अब फ्लेवर, एक्सपीरियंस और सोशल ड्रिंकिंग कल्चर की ओर बढ़ रही है। स्मिरनॉफ वोडका और जॉनी वॉकर व्हिस्की वाली यूनाइटेड स्पिरिट्स ने हाल ही कहा कि कंपनी की ग्रोथ में ज्यादातर शेयर फ्लेवर इनोवेशन से आ रहा है। कंपनी के अनुसार मिंटी जामुन जैसे नए फ्लेवर महीने दर महीने रिकॉर्ड सेल्स कर रहे हैं। कंपनी ने कहा कि यंग कंज्यूमर अब केवल शराब नहीं खरीद रहे, बल्कि वे एक नया एक्सपीरियंस तलाश रहे हैं। रेडिको खेतान की मैजिक मोमेंट्स वोडका वित्त वर्ष26 में 21 परसेंट ग्रोथ के साथ 86 लाख केस तक पहुंच गई। कंपनी अब फ्लेवर ऑफ इंडिया सीरीज के तहत और नए प्रोडक्ट्स का नेशनल रोलआउट करने की तैयारी कर रही है। ट्रेड एनेलिस्ट्स का कहना है कि पहले भारत में शराब ज्यादातर स्ट्रॉन्ग व्हिस्की, प्रीमियम स्टेटस और मर्दानगी की छवि के साथ चस्पा थी। लेकिन अब कंपनियां म्यूजिक कॉन्सर्ट, गेमिंग क्रिएटर्स, सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स और लाइफस्टाइल मार्केटिंग के जरिए युवाओं को आकर्षित कर रही हैं। यूनाइटेड स्पिरिट्स ने अपनी स्ट्रेटेजी को रिपर्टरी ड्रिंकिंग कहा है। इसका मतलब है कि कंज्यूमर अब अलग-अलग मौकों पर अलग-अलग फ्लेवर और कैटेगरी ट्राई कर रहा है जिससे लाइट, स्वीट और ई•ाी ड्रिंक्स की डिमांड बढ़ रही है। एनेलिस्ट्स के अनुसार नए ग्रोथ मार्केट को अनलॉक करने के लिए कंपनियां अब वेस्टर्न लक्जरी इमेज के बजाय भारतीय फ्लेवर और लोकल मेमोरीज पर जोर दे रही हैं। इससे यंग कंज्यूमर को लोकल कनेक्शन महसूस होता है। दिग्गज वाइनमेकर सुला वाइनयार्ड इस बदलते ट्रेंड का फायदा उठाने में जुटी है। कंपनी वाइन टूरिज्म, म्यूजिक कॉन्सर्ट और हॉस्पिटैलिटी बिजनस का तेजी से विस्तार कर रही है। दावा है कि उसका लोकप्रिय सुलाफेस्ट लगातार हाउसफुल रहा है और म्यूजिक और वाइन लवर्स की जमात बढ़ाने के लिए कंपनी नई सुविधाएं जोड़ी जा रही हैं।