TOP

ई - पेपर Subscribe Now!

ePaper
Subscribe Now!

Download
Android Mobile App

Daily Business Newspaper | A Knowledge Powerhouse in Hindi

07-05-2026

रोबोट का हाथ, बोलो जय जगन्नाथ

  • चीन की एक रोबोटिक्स स्टार्टअप है लिंकरबोट। यह रोबोट नहीं बल्कि उसके लिए हाथ बनाती है। दावा है कि यह रोबोटिक हाथ बनाने वाली ग्लोबल लीडर है। यही रोबोटिक हाथ लिंकरबोट के लिए जगन्नाथ साबित हो रहे हैं। कंपनी 6 बिलियन डॉलर यानी करीब 55 हजार करोड़ रुपये के वेल्यूएशन पर फंड जुटाने की कोशिश में है। अभी हाल ही कंपनी ने इससे आधे ही वेल्यूएशन पर फंडिंग ली थी। पिछला फंडिंग राउंड 3 बिलियन डॉलर के वेल्यूएशन पर था। सिर्फ दो साल पहले अलीबाबा वाले एंट ग्रुप और सिकॉइया के स्पिनऑफ हॉन्गशान ग्रुप की शुरुआती फंडिंग वाली इस यूनिकॉर्न का दावा है कि उसका हाई-डिग्री-ऑफ-फ्रीडम रोबोटिक हाथों के ग्लोबल मार्केट में 80 परसेंट से भी ज्यादा शेयर है। कंपनी का प्लान प्रोडक्शन को 5 हजार प्रतिमाह से 10 हजार यूनिट्स तक पहुंचाने का है। चीन लगातार अपनी रोबोटिक्स खासकर ह्यूमेनॉइड रोबोटिक इंडस्ट्री को ग्लोबल लेवल पर पहुंचाने के लिए बड़े इवेंट्स कर रहा है इनमें मैराथन से लेकर फुटबॉल मैच तक शामिल हैं। अभी पिछले महीने ही यूनिट्री रोबोटिक्स जैसी ग्लोबल लीडर ने अपने प्रोडक्ट्स और टेक्नोलॉजी के डवलपमेंट को शोकेस करने के लिए रोबोट हाथ मैराथन का आयोजन किया था। यूनिट्री ने मार्च में 7 बिलियन डॉलर के वेल्यूएशन पर आईपीओ लाने की बात कही थी। दूसरे कंपीटिटिव ह्यूमेनॉइड रोबोट मेकर स्कवायर रोबोट जहां घरेलू कामों के लिए रोबोटिक हाथों को ट्रेन करने पर फोकस कर रहे हैं वहीं लिंकरबोट की हाई-वेल्यू ह्यूमन क्राफ्ट्समैनशिप (इंसानी नफासत या कलाकारी) वाले रोबोटिव हाथ डिजाइन करने में महारथ है। कंपनी का दावा है कि वह हाथ नहीं बल्कि इंसान जैसी कुशलता वाले कामों के लिए हार्डवेयर तैयार कर रही है। कंपनी ने इंसानी कामों की नफासत की ट्रेनिंग रोबोटिक हाथ को देने के लिए लिंकरस्किलनेट नाम से एक प्लेटफॉर्म तैयार किया है जिसे दुनिया का सबसे बड़ा वास्तविक डेक्सटेरस (दोनों हाथ से काम करने वाला) मैनिपुलेशन डेटा सेट कहा जा रहा है। यह प्लेटफॉर्म एक मल्टीमोडल डेटा कलेक्शन सिस्टम है, जो मानव कौशल को स्टेंडरडाइज कर दोहराने की क्षमताओं में बदलता है। इस डेटाबेस में अब तक 500 से अधिक काम (स्किल) शामिल किए जा चुके हैं। क्नोलॉजी कंसल्टेंसी स्टीलर में रोबोटिक्स और ऑटोमेशन लीड जॉर्ज स्टीलर कहते है हाथ पूरे ह्यूमेनॉइड रोबोट का सबसे जटिल हिस्सा है। एलन मस्क के अनुसार उनके टेस्ला ऑप्टिमस प्रोजेक्ट में कंपनी की आधी से भी ज्यादा इंजीनियरिंग क्षमता खप जाती है। मस्क का दावा है ऑप्टिमस के लेटेस्ट मॉडल में इंसानी हाथ जैसी नफासत (सफाई या कलाकारी) होगी। लिंकरबोट के फाउंडर एलेक्स झाउ कहते हैं कि वे अपने रोबोट्स को पियानो बजाने, मसाज करने और यहां तक कि दांतों का ईलाज जैसे काम करते देखना चाहते हैं। वे कहते हैं कि बेसिक लेबर के मुकाबले इस तरह से कामों की वेल्यू और अर्निंग कम से कम तीन गुना ज्यादा होती है। लिंकरबोट से बनाए रोबोटिक हाथ स्क्रू कसने से लेकर सॉफ्ट वस्तुओं को पकडऩे और तो और सुई में धागा डालने जैसा बारीक काम भी कर सकते हैं। कंपनी का सबसे बेसिक हाथ का मॉडल ओ6 केवल 370 ग्राम वजन का है लेकिन 50 किलो वजन उठा सकता है। कंपनी ज्यादातर कंपोनेंट्स—जैसे जॉइंट मॉड्यूल, मोटर और रिड्यूसर खुद ही बनाती है और ऐसे खास पॉलिमर का उपयोग करती है, जो स्वयं-लुब्रिकेटिंग है और जिसमें जंग नहीं लगती। कंपनी एक नई इंटेलीजेंट प्रोडक्शन लाइन बना रही है जिसमें रोबोटिक हाथ  से अन्य हाथ बनाए जाएंगे।

Share
रोबोट का हाथ, बोलो जय जगन्नाथ

चीन की एक रोबोटिक्स स्टार्टअप है लिंकरबोट। यह रोबोट नहीं बल्कि उसके लिए हाथ बनाती है। दावा है कि यह रोबोटिक हाथ बनाने वाली ग्लोबल लीडर है। यही रोबोटिक हाथ लिंकरबोट के लिए जगन्नाथ साबित हो रहे हैं। कंपनी 6 बिलियन डॉलर यानी करीब 55 हजार करोड़ रुपये के वेल्यूएशन पर फंड जुटाने की कोशिश में है। अभी हाल ही कंपनी ने इससे आधे ही वेल्यूएशन पर फंडिंग ली थी। पिछला फंडिंग राउंड 3 बिलियन डॉलर के वेल्यूएशन पर था। सिर्फ दो साल पहले अलीबाबा वाले एंट ग्रुप और सिकॉइया के स्पिनऑफ हॉन्गशान ग्रुप की शुरुआती फंडिंग वाली इस यूनिकॉर्न का दावा है कि उसका हाई-डिग्री-ऑफ-फ्रीडम रोबोटिक हाथों के ग्लोबल मार्केट में 80 परसेंट से भी ज्यादा शेयर है। कंपनी का प्लान प्रोडक्शन को 5 हजार प्रतिमाह से 10 हजार यूनिट्स तक पहुंचाने का है। चीन लगातार अपनी रोबोटिक्स खासकर ह्यूमेनॉइड रोबोटिक इंडस्ट्री को ग्लोबल लेवल पर पहुंचाने के लिए बड़े इवेंट्स कर रहा है इनमें मैराथन से लेकर फुटबॉल मैच तक शामिल हैं। अभी पिछले महीने ही यूनिट्री रोबोटिक्स जैसी ग्लोबल लीडर ने अपने प्रोडक्ट्स और टेक्नोलॉजी के डवलपमेंट को शोकेस करने के लिए रोबोट हाथ मैराथन का आयोजन किया था। यूनिट्री ने मार्च में 7 बिलियन डॉलर के वेल्यूएशन पर आईपीओ लाने की बात कही थी। दूसरे कंपीटिटिव ह्यूमेनॉइड रोबोट मेकर स्कवायर रोबोट जहां घरेलू कामों के लिए रोबोटिक हाथों को ट्रेन करने पर फोकस कर रहे हैं वहीं लिंकरबोट की हाई-वेल्यू ह्यूमन क्राफ्ट्समैनशिप (इंसानी नफासत या कलाकारी) वाले रोबोटिव हाथ डिजाइन करने में महारथ है। कंपनी का दावा है कि वह हाथ नहीं बल्कि इंसान जैसी कुशलता वाले कामों के लिए हार्डवेयर तैयार कर रही है। कंपनी ने इंसानी कामों की नफासत की ट्रेनिंग रोबोटिक हाथ को देने के लिए लिंकरस्किलनेट नाम से एक प्लेटफॉर्म तैयार किया है जिसे दुनिया का सबसे बड़ा वास्तविक डेक्सटेरस (दोनों हाथ से काम करने वाला) मैनिपुलेशन डेटा सेट कहा जा रहा है। यह प्लेटफॉर्म एक मल्टीमोडल डेटा कलेक्शन सिस्टम है, जो मानव कौशल को स्टेंडरडाइज कर दोहराने की क्षमताओं में बदलता है। इस डेटाबेस में अब तक 500 से अधिक काम (स्किल) शामिल किए जा चुके हैं। क्नोलॉजी कंसल्टेंसी स्टीलर में रोबोटिक्स और ऑटोमेशन लीड जॉर्ज स्टीलर कहते है हाथ पूरे ह्यूमेनॉइड रोबोट का सबसे जटिल हिस्सा है। एलन मस्क के अनुसार उनके टेस्ला ऑप्टिमस प्रोजेक्ट में कंपनी की आधी से भी ज्यादा इंजीनियरिंग क्षमता खप जाती है। मस्क का दावा है ऑप्टिमस के लेटेस्ट मॉडल में इंसानी हाथ जैसी नफासत (सफाई या कलाकारी) होगी। लिंकरबोट के फाउंडर एलेक्स झाउ कहते हैं कि वे अपने रोबोट्स को पियानो बजाने, मसाज करने और यहां तक कि दांतों का ईलाज जैसे काम करते देखना चाहते हैं। वे कहते हैं कि बेसिक लेबर के मुकाबले इस तरह से कामों की वेल्यू और अर्निंग कम से कम तीन गुना ज्यादा होती है। लिंकरबोट से बनाए रोबोटिक हाथ स्क्रू कसने से लेकर सॉफ्ट वस्तुओं को पकडऩे और तो और सुई में धागा डालने जैसा बारीक काम भी कर सकते हैं। कंपनी का सबसे बेसिक हाथ का मॉडल ओ6 केवल 370 ग्राम वजन का है लेकिन 50 किलो वजन उठा सकता है। कंपनी ज्यादातर कंपोनेंट्स—जैसे जॉइंट मॉड्यूल, मोटर और रिड्यूसर खुद ही बनाती है और ऐसे खास पॉलिमर का उपयोग करती है, जो स्वयं-लुब्रिकेटिंग है और जिसमें जंग नहीं लगती। कंपनी एक नई इंटेलीजेंट प्रोडक्शन लाइन बना रही है जिसमें रोबोटिक हाथ  से अन्य हाथ बनाए जाएंगे।


Label

PREMIUM

CONNECT WITH US

X
Login
X

Login

X

Click here to make payment and subscribe
X

Please subscribe to view this section.

X

Please become paid subscriber to read complete news