मई 2026 से जापान अपने एयरपोर्ट्स पर ह्यूमेनॉइड रोबोट्स का ट्रायल शुरू करने जा रहा है। जापान एयरलाइंस की ग्राउंड सर्विस यूनिट और जीएमओ एआई एंड रोबोटिक्स के सहयोग से चलाये जा रहे इस प्रोजेक्ट का मुख्य उद्देश्य ग्राउंड ऑपरेशंस जैसे बैगेज और कार्गो हैंडलिंग में बढ़ती मजदूरों की कमी और काम के बोझ को कम करना है। एयरपोर्ट ग्राउंड हैंडलिंग में विमान को खींचना, सामान लोड/अनलोड करना और सीमित जगह में भारी मशीनरी चलाना शामिल होता है। ये काम काफी हद तक मैनुअल लेबर पर निर्भर हैं और शारीरिक रूप से थकाने वाले होते हैं। अब तक के ऑटोमेशन सिस्टम या सिंगल-टास्क रोबोट्स इन जटिल परिस्थितियों में प्रभावी नहीं रहे हैं। ऐसे में ह्यूमेनॉइड रोबोट्स जो इंसानों की तरह दिखते और चलते हैं इस तरह के माहौल में बिना बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर बदलाव के काम कर सकते हैं। बढ़ते टूरिज्म और घटती वर्किंग-एज आबादी के कारण जापान का एविएशन सेक्टर इस समय गंभीर लेबर शॉर्टेज का सामना कर रहा है। 2026 के पहले दो महीनों में ही 70 लाख से ज्यादा विदेशी पर्यटक जापान पहुंचे, जबकि 2025 में यह संख्या 4.27 करोड़ रही। अनुमान है कि 2040 तक देश को 65 लाख से ज्यादा विदेशी कामगारों की जरूरत पड़ेगी। इस ट्रायल के लिए पहले एयरपोर्ट ऑपरेशंस का विश्लेषण होगा, फिर सिमुलेटेड वातावरण में परीक्षण किए जाएंगे, और अंत में रोबोट्स को असली ऑपरेशंस में उतारा जाएगा। शुरुआती चरण में रोबोट्स बैगेज मूवमेंट, कार्गो हैंडलिंग और एयरक्राफ्ट केबिन की सफाई जैसे काम करेंगे। करीब 130 सेमी ऊंचे ये रोबोट 2-3 घंटे तक एक चार्ज में काम कर सकते हैं और इंसानी कर्मचारियों के साथ इंटरैक्ट भी कर सकते हैं। जीएमओ इंटरनेट ग्रुप ने 2026 को ह्यूमेनॉइड का पहला साल घोषित किया है। ये रोबोट्स जनरल-पर्पज (सामान्य काम करने वाली मशीन) मशीन के रूप में विकसित हो रहे हैं जो वक्त और परिस्थिति के आधार पर अलग-अलग कामों में ढल सकते हैं।