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Daily Business Newspaper | A Knowledge Powerhouse in Hindi

02-05-2026

डिमांड स्लोडाउन बना चीन का हिमालयी चैलेंज

  •  पांच साल हो गए कोविड के बाद से चीन में कंज्यूमर डिमांड मोटे-मोटे स्टिमुलस पैकेज के बावजूद औंधे मूंह है। ऐसे में सरकार अब प्रोडक्ट के बजाय सर्विस की डिमांड को प्रोमोट करने के लिए एक नए प्लान पर काम कर रही है। एल्डर केयर (बुजुर्गों की देखभाल) हेल्थ सर्विसेस और एंटरटेनमेंट आदि सैक्टर प्रोडक्ट स्लोडाउन के असर को बराबर कर सकते हैं। लेकिन एनेलिस्ट कहते हैं कि इस प्लान को कामयाब बनाने के लिए हाउसहोल्ड इनकम बढ़ानी होगी और सोशल वेलफेयर के लिए बढ़ाकर बजट देने की जरूरत है। बीजिंग का प्लान दरअसल लेबर-इंटेंसिव (जिनसे रोजगार ज्यादा पैदा होते हैं) सर्विसेस को इकोनॉमी के कंजम्पशन मॉडल की ओर मोडने का है। आमतौर पर चीन इंवेस्टमेंट और एक्सपोर्ट को इकोनॉमी का ग्रोथ ड्राइवर मानता है लेकिन वह सर्विस सैक्टर में जॉब क्रिएट कर इन पर से निर्भरता घटाना चाहता है। एनेलिस्ट के अनुसार सरकार इंसेंटिव स्कीम, बाधाओं को कम करने और फास्ट ग्रोथ वाले सैक्टर में इंवेस्टमेंट करने की तैयारी कर रही है। चीन का मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर डिमांड से ज्यादा सप्लाई पर बैठा है लेकिन सर्विस इकोनॉमी आमतौर पर नजरअंदाज ही होती रही है। सरकार की मैन्युफैक्चरिंग फोकस्ड पॉलिसी के चलते इस सैक्टर का ठीक से विकास भी नहीं हो पाया है। एनेलिस्ट कहते हैं कि पॉलिसी मेकर सर्विस कंजम्पशन पर फोकस बढ़ा रहे हैं क्योंकि यहां ग्रोथ की बड़ी संभावनाएं हैं। लेकिन इस सेक्टर का विस्तार बहुत स्लो होता है और वह भी इकोनॉमी की रिकवरी पर निर्भर करेगा। चीन सरकार डोमेस्टिक कंजम्पशन को अभी के 40 परसेंट से बढ़ाकर 2030 तक 45 परसेंट करने का टार्गेट लेकर चल रही है। साथ ही शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा पर खर्च बढ़ाकर ...इंवेस्ट इन पीपुल...का भी वादा किया है।  जैसे-जैसे बड़े कंज्यूमर गुड्स की डिमांड में करेक्शन आ रहा है चीनी परिवार आमदनी का बड़ा हिस्सा सेवाओं पर खर्च कर रहे हैं जिनमें बुजुर्गों की देखभाल से लेकर ट्रेवल और एंटरटेनमेंट तक शामिल हैं। एनेलिस्ट्स के अनुसार चीन के अधिकांश परिवारों के पास अब अमूमन सभी कंज्यूमर गुड्स हैं ऐसे में यह मार्केट मैच्यॉर हो चुका है। चीन में प्रति व्यक्ति आय लगभग 14 हजार डॉलर है।  एचएसबीसी के इकोनॉमिस्ट फ्रेड न्यूमैन के अनुसार इकोनॉमी का रीबैलेंस इस बात पर ज्यादा निर्भर करता है कि कंजम्पशन और इंवेस्टमेंट कैसा है ना कि इस पर कि कंजम्पसन गुड्स का हो रहा है या सर्विसेस का। लेकिन जैसे-जैसे आय बढ़ती है और आबादी बूढ़ी होती है, प्रोडक्ट्स के मुकाबले सर्विसेस की डिमांड तेजी से बढ़ेगी। सरकारी डेटा कहता है कि 2025 में सर्विसेस की सेल्स में 5.5 परसेंट की ग्रोथ हुई जबकि प्रोडक्ट्स की सेल्स सिर्फ 3.7% बढ़ी। 2025 में प्रति व्यक्ति सेवाओं की खपत कुल खर्च का 46.1 परसेंट रही, जो 2014 में 40.3% ही थी। जीडीपी में डोमेस्टिक कंजम्पशन के लिहाज से चीन ग्लोबल औसत से अमूमन 20' पीछे है। जबकि इंवेस्टमेंट का शेयर ग्लोबल औसत से लगभग 20' अधिक है। कुल ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग में चीन का शेयर 30% है। एनेलिस्ट्स के अनुसार सरकार कंजम्पशन सब्सिडी स्कीम्स में प्रोडक्ट्स के साथ ही बुजुर्गों की देखभाल, भोजन, मनोरंजन और ट्रेवल आदि को शामिल करने पर विचार कर रही है। वरिष्ठ नागरिकों के लिए सब्सिडी, नर्सिंग होम सर्विस प्रोवाइडर के लिए ब्याज राहत और घर पर बुजुर्गों की देखभाल के लिए वाउचर दिये जा सकते हैं।  साथ ही लंबी सवेतन छुट्टियां भी दी जा सकती हैं। क्रूज और यॉटिंग जैसे हाई-एंड मनोरंजन पर लगी पाबंदियों में ढील पर भी विचार किया जा रहा है। चीन में प्रति 1 हजार वरिष्ठ नागरिकों पर सिर्फ 30 एल्डर केयर (बुजुर्ग देखभाल) हैं। इसी वजह से बीजिंग की एक हाई-एंड 500-बेड सुविधा दाजिया में जगह रिजर्व करने के लिए कुछ लोगों ने इंश्योरेंस प्लान में 20 लाख युआन का निवेश किया है।

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डिमांड स्लोडाउन बना चीन का हिमालयी चैलेंज

 पांच साल हो गए कोविड के बाद से चीन में कंज्यूमर डिमांड मोटे-मोटे स्टिमुलस पैकेज के बावजूद औंधे मूंह है। ऐसे में सरकार अब प्रोडक्ट के बजाय सर्विस की डिमांड को प्रोमोट करने के लिए एक नए प्लान पर काम कर रही है। एल्डर केयर (बुजुर्गों की देखभाल) हेल्थ सर्विसेस और एंटरटेनमेंट आदि सैक्टर प्रोडक्ट स्लोडाउन के असर को बराबर कर सकते हैं। लेकिन एनेलिस्ट कहते हैं कि इस प्लान को कामयाब बनाने के लिए हाउसहोल्ड इनकम बढ़ानी होगी और सोशल वेलफेयर के लिए बढ़ाकर बजट देने की जरूरत है। बीजिंग का प्लान दरअसल लेबर-इंटेंसिव (जिनसे रोजगार ज्यादा पैदा होते हैं) सर्विसेस को इकोनॉमी के कंजम्पशन मॉडल की ओर मोडने का है। आमतौर पर चीन इंवेस्टमेंट और एक्सपोर्ट को इकोनॉमी का ग्रोथ ड्राइवर मानता है लेकिन वह सर्विस सैक्टर में जॉब क्रिएट कर इन पर से निर्भरता घटाना चाहता है। एनेलिस्ट के अनुसार सरकार इंसेंटिव स्कीम, बाधाओं को कम करने और फास्ट ग्रोथ वाले सैक्टर में इंवेस्टमेंट करने की तैयारी कर रही है। चीन का मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर डिमांड से ज्यादा सप्लाई पर बैठा है लेकिन सर्विस इकोनॉमी आमतौर पर नजरअंदाज ही होती रही है। सरकार की मैन्युफैक्चरिंग फोकस्ड पॉलिसी के चलते इस सैक्टर का ठीक से विकास भी नहीं हो पाया है। एनेलिस्ट कहते हैं कि पॉलिसी मेकर सर्विस कंजम्पशन पर फोकस बढ़ा रहे हैं क्योंकि यहां ग्रोथ की बड़ी संभावनाएं हैं। लेकिन इस सेक्टर का विस्तार बहुत स्लो होता है और वह भी इकोनॉमी की रिकवरी पर निर्भर करेगा। चीन सरकार डोमेस्टिक कंजम्पशन को अभी के 40 परसेंट से बढ़ाकर 2030 तक 45 परसेंट करने का टार्गेट लेकर चल रही है। साथ ही शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा पर खर्च बढ़ाकर ...इंवेस्ट इन पीपुल...का भी वादा किया है।  जैसे-जैसे बड़े कंज्यूमर गुड्स की डिमांड में करेक्शन आ रहा है चीनी परिवार आमदनी का बड़ा हिस्सा सेवाओं पर खर्च कर रहे हैं जिनमें बुजुर्गों की देखभाल से लेकर ट्रेवल और एंटरटेनमेंट तक शामिल हैं। एनेलिस्ट्स के अनुसार चीन के अधिकांश परिवारों के पास अब अमूमन सभी कंज्यूमर गुड्स हैं ऐसे में यह मार्केट मैच्यॉर हो चुका है। चीन में प्रति व्यक्ति आय लगभग 14 हजार डॉलर है।  एचएसबीसी के इकोनॉमिस्ट फ्रेड न्यूमैन के अनुसार इकोनॉमी का रीबैलेंस इस बात पर ज्यादा निर्भर करता है कि कंजम्पशन और इंवेस्टमेंट कैसा है ना कि इस पर कि कंजम्पसन गुड्स का हो रहा है या सर्विसेस का। लेकिन जैसे-जैसे आय बढ़ती है और आबादी बूढ़ी होती है, प्रोडक्ट्स के मुकाबले सर्विसेस की डिमांड तेजी से बढ़ेगी। सरकारी डेटा कहता है कि 2025 में सर्विसेस की सेल्स में 5.5 परसेंट की ग्रोथ हुई जबकि प्रोडक्ट्स की सेल्स सिर्फ 3.7% बढ़ी। 2025 में प्रति व्यक्ति सेवाओं की खपत कुल खर्च का 46.1 परसेंट रही, जो 2014 में 40.3% ही थी। जीडीपी में डोमेस्टिक कंजम्पशन के लिहाज से चीन ग्लोबल औसत से अमूमन 20' पीछे है। जबकि इंवेस्टमेंट का शेयर ग्लोबल औसत से लगभग 20' अधिक है। कुल ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग में चीन का शेयर 30% है। एनेलिस्ट्स के अनुसार सरकार कंजम्पशन सब्सिडी स्कीम्स में प्रोडक्ट्स के साथ ही बुजुर्गों की देखभाल, भोजन, मनोरंजन और ट्रेवल आदि को शामिल करने पर विचार कर रही है। वरिष्ठ नागरिकों के लिए सब्सिडी, नर्सिंग होम सर्विस प्रोवाइडर के लिए ब्याज राहत और घर पर बुजुर्गों की देखभाल के लिए वाउचर दिये जा सकते हैं।  साथ ही लंबी सवेतन छुट्टियां भी दी जा सकती हैं। क्रूज और यॉटिंग जैसे हाई-एंड मनोरंजन पर लगी पाबंदियों में ढील पर भी विचार किया जा रहा है। चीन में प्रति 1 हजार वरिष्ठ नागरिकों पर सिर्फ 30 एल्डर केयर (बुजुर्ग देखभाल) हैं। इसी वजह से बीजिंग की एक हाई-एंड 500-बेड सुविधा दाजिया में जगह रिजर्व करने के लिए कुछ लोगों ने इंश्योरेंस प्लान में 20 लाख युआन का निवेश किया है।


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