ब्रायन जॉनसन को भूल तो नहीं गए। •ोरोधा वाले निखिल कामथ के साथ उन्होंने लॉन्जेविटी यानी कहें तो चिरायु या फिर दीर्घायु पर एक पॉडकास्ट किया और बीच में ही छोड़ दिया। जॉनसन के अनुसार बैंगलुरु की हवा से उनकी स्किन जल रही है। राजस्थान में 90 के दशक में एक मिनिस्टर थे भंवरलाल शर्मा। यूएन की एक टीम ने जयपुर के कुदरती पानी को पीने लायक नहीं बताया था। शर्मा उस समय वॉटर वक्र्स के मिनिस्टर थे तो जबाव दिया...अजी काईं बात करो छो, म्है तो पी-पीर बड़ा होग्या। ये जो साहब है जॉनसन ये दरअसल ऐसी दवा और सप्लीमेंट्स बेचते हैं जिनका कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है। देशी भाषा में ऐसी दवा बेचने वालों को झोला छाप कहते हैं लेकिन जॉनसन के पीछे बिलियन डॉलर की इंडस्ट्री खड़ी है। जो मैजिक रेमेडी (जादुई दवा) क्रिएट करती है और दुनियाभर से कस्टमर पकडऩे का काम जॉनसन करते हैं। लेकिन चिरायु या दीर्घायु होने की सनक केवल जॉनसन को ही नहीं है। दुनियाभर में टेक बिलिनेयर, बायोटेक स्टार्टअप, साइंटिस्ट और सरकारें अब लॉन्गेविटी रिसर्च यानी स्वस्थ और लंबी उम्र से जुड़ी रिसर्च में मोटा माल झौंक रहे हैं। मकसद केवल इंसानों की उम्र बढ़ाना नहीं, बल्कि लोगों को अधिक समय तक स्वस्थ बनाए रखना और शरीर में होने वाली एजिंग यानी उम्र बढऩे की जैविक प्रक्रिया को धीमा करना है। पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में 6 हजार मीटर ऊंचे पहाडों पर एक घाटी है। नाम सुना होगा हुं•ाा वैली। यहां के लोगों की उम्र 140 साल तक होती है। यहां तक कि साइंटिफिक स्टडी में भी औसत उम्र 100 साल पाई गई है। जापान में करीब 1 लाख लोग शतायु हो चुके हैं। शतायु यानी 100 साल। हालांकि आज तक ऐसी कोई थेरेपी उपलब्ध नहीं है जो एजिंग की प्रक्रिया को पूरी तरह रोक सके या इंसानों की उम्र को नाटकीय रूप से बढ़ा सके।
लेकिन साइंटिस्ट्स का मानना है कि भविष्य में मेडिकल साइंस में होने वाले डवलपमेंट लोगों को लंबे समय तक स्वस्थ रखने में मदद कर सकती है। अमेरिका की एल्टोस लैब इस सैक्टर की सबसे चर्चित कंपनियों में से एक है। कंपनी सेल्युलर रिजुवेनेशन यानी कोशिकाओं को फिर से युवा बनाने और हेल्दी एजिंग यानी बेहतर तरीके से उम्र बढऩे पर रिसर्च कर रही है। इस कंपनी पर अमेजन वाले जैप बेजोस और टेक इंवेस्टर यूरी मिल्नर दांव लगा रहे हैं। इसी तरह कैलिको को गूगल की पेरेंट कंपनी एल्फाबेट ने शुरू किया था। यह साइंटिस्ट्स और रिसर्च संस्थानों के साथ मिलकर लंबी अवधि के हेल्थकेयर और बायोलॉजी प्रोजेक्ट्स पर काम कर रही है। अमेरिका की रिट्रो बायोसाइंसेस स्वस्थ मानव जीवनकाल बढ़ाने से जुड़ी रिसर्च पर काम कर रही है। इस कंपनी में चैट जीपीटी वाली ओपनएआई के चीफ सैम ऑल्टमैन ने इंवेस्टमेंट किया है। सैम वैसे भी लॉन्गेविटी साइंस और बायोटेक्नोलॉजी में रुचि रखते हैं। इसके अलावा कई छोटी बायोटेक कंपनियां भी इस दौड़ में शामिल हैं। यूनिटी बायोटेक्नोलॉजी एजिंग वाली कोशिकाओं के लिए एक थेरेपी पर काम कर रही है। बायोएज लैब्स एआई और बायोमार्कर की मदद से उम्र बढऩे की जैविक प्रक्रियाओं पर रिसर्च कर रही है। इनसिलिको मेडिसिन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के जरिए ड्रग डिस्कवरी कर रही है। वहीं लाइफ बायोसाइंसेंस कोशिकाओं में होने वाली एजिंग की प्रक्रियाओं पर रिसर्च कर रही है। ब्रायन जॉनसन अपने ब्लूप्रिंट एंटी-एजिंग प्रोजेक्ट को दुनियाभर में प्रमोट कर रहे हैं। इसमें डाइट, नींद, व्यायाम और मेडिकल टेस्टिंग को बेहद सख्ती से मॉनिटर किया जाता है ताकि लंबे समय तक स्वास्थ्य बेहतर रखा जा सके और बायोलॉजिकल एजिंग की प्रक्रिया को धीमा किया जा सके। दिग्गज इंवेस्टमर पीटर थाइल लंबे समय से लॉन्गेविटी और एंटी-एजिंग रिसर्च को फंडिंग दे रहे हैं। रिपोर्ट्स कहती हैं कि अमेरिका बायोटेक स्टार्टअप और लॉन्गेविटी रिसर्च का ग्लोबल हब है। जापान अपनी तेजी से बूढ़ी होती आबादी के कारण एजिंग पर रिसर्च कर रहा है। वहीं चीन बायोटेक्नोलॉजी, एआई आधारित चिकित्सा और हेल्थकेयर इनोवेशन में निवेश तेजी से बढ़ा रहा है। सऊदी अरब, स्विट्जरलैंड और यूके में भी बायोटेक और हेल्थ रिसर्च में इंवेस्टमेंट बढ़ रहे हैं। सऊदी अरब ने तो इसके लिए बायोटेक फंड ही बना दिया है। स्विट्जरलैंड वैसे ही फार्मास्यूटिकल और मेडिकल रिसर्च का बड़ा ग्लोबल हब है।