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Daily Business Newspaper | A Knowledge Powerhouse in Hindi

22-04-2026

ह्यूमेनॉइड रोबोट और हाफ मैराथन...

  •  बीजिंग में आयोजित हाफ मैराथन में ह्यूमेनॉइड रोबोट्स ने ह्यूमन एथलीट्स (इंसान) को पीछे छोडऩे का दावा किया गया है। इससे एआई और रोबोटिक्स में हो रहे तेज डवलपमेंट का संकेत बताया जा रहा है। 2026 के इस आयोजन में दर्जनों रोबोट्स ने 21 किलोमीटर की दौड़ में हिस्सा लिया और कई रोबोट पेशेवर एथलीट्स से भी तेज निकले। सबसे तेज चीनी रोबोट ने यह दौड़ लगभग 50 मिनट 26 सेकंड में पूरी की, जो इंसानों के हाफ मैराथन वल्र्ड रिकॉर्ड (करीब 57 मिनट) से भी बेहतर प्रदर्शन है। पिछले साल इस इवेंट में सबसे तेज रोबोट को यही दूरी तय करने में लगभग 2 घंटे 40 मिनट लगे थे।इस बार खास बात यह रही कि कई रोबोट बिना रिमोट कंट्रोल के, यानी पूरी तरह ऑटोनॉमस तरीके से दौड़े। लगभग आधे रोबोट्स ने खुद रास्ता तय किया, जिससे एआई नेविगेशन और बैलेंसिंग टेक्नोलॉजी में बड़ी प्रगति साफ दिखाई देती है। इन रोबोट्स में इंसानों जैसी लंबी टांगें, बेहतर संतुलन और स्मार्टफोन टेक्नोलॉजी से प्रेरित लिक्विड कूलिंग सिस्टम जैसी तकनीकें इस्तेमाल की गई ताकि वे लंबी दूरी तक तेज रफ्तार पर कायम रह पायें। हालांकि कुछ रोबोट्स के गिरने या रास्ता भटकने जैसी घटनाएं भी सामने आईं। इस हाफ मैराथन को रोबोटिक्स के लिए रियल-वल्र्ड टेस्ट बताया जा रहा है। 

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ह्यूमेनॉइड रोबोट और हाफ मैराथन...

 बीजिंग में आयोजित हाफ मैराथन में ह्यूमेनॉइड रोबोट्स ने ह्यूमन एथलीट्स (इंसान) को पीछे छोडऩे का दावा किया गया है। इससे एआई और रोबोटिक्स में हो रहे तेज डवलपमेंट का संकेत बताया जा रहा है। 2026 के इस आयोजन में दर्जनों रोबोट्स ने 21 किलोमीटर की दौड़ में हिस्सा लिया और कई रोबोट पेशेवर एथलीट्स से भी तेज निकले। सबसे तेज चीनी रोबोट ने यह दौड़ लगभग 50 मिनट 26 सेकंड में पूरी की, जो इंसानों के हाफ मैराथन वल्र्ड रिकॉर्ड (करीब 57 मिनट) से भी बेहतर प्रदर्शन है। पिछले साल इस इवेंट में सबसे तेज रोबोट को यही दूरी तय करने में लगभग 2 घंटे 40 मिनट लगे थे।इस बार खास बात यह रही कि कई रोबोट बिना रिमोट कंट्रोल के, यानी पूरी तरह ऑटोनॉमस तरीके से दौड़े। लगभग आधे रोबोट्स ने खुद रास्ता तय किया, जिससे एआई नेविगेशन और बैलेंसिंग टेक्नोलॉजी में बड़ी प्रगति साफ दिखाई देती है। इन रोबोट्स में इंसानों जैसी लंबी टांगें, बेहतर संतुलन और स्मार्टफोन टेक्नोलॉजी से प्रेरित लिक्विड कूलिंग सिस्टम जैसी तकनीकें इस्तेमाल की गई ताकि वे लंबी दूरी तक तेज रफ्तार पर कायम रह पायें। हालांकि कुछ रोबोट्स के गिरने या रास्ता भटकने जैसी घटनाएं भी सामने आईं। इस हाफ मैराथन को रोबोटिक्स के लिए रियल-वल्र्ड टेस्ट बताया जा रहा है। 


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