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18-04-2026

यंग देश में बूम पर सिल्वर इकोनॉमी

  •  सिल्वर इकोनॉमी यानी सीनियर सिटिजन से जुड़े प्रोडक्ट और सर्विसेस का मार्केट। भारत की पहचान दुनिया की सबसे बड़ी युवा आबादी वाले देश के रूप में है। देश की दो-तिहाई से ज्यादा आबादी 30 वर्ष से कम उम्र की है। लेकिन सीनियर सिटिजन की आबादी भी तेजी से बढ़ रही है। रिपोर्ट्स के अनुसार वर्ष 2025 में देश में 16.5 करोड़ सीनियर सिटिजन थे जो 2050 तक 34.8 करोड़ हो जाएगी। भारत में तेजी से बढ़ती बुजुर्ग आबादी अब सीनियर हाउसिंग सेक्टर के लिए एक बड़ा अवसर बन रही है। 55 वर्ष से अधिक आयु के लोगों के लिए बनाए जाने वाले विशेष रेजिडेंशियल प्रोजेक्ट्स की मांग तेजी से बढ़ रही है, जिसके चलते डवलपर्स अब नए शहरों में विस्तार, जमीन अधिग्रहण और प्रीमियम सेवाएं जोडऩे पर जोर दे रहे हैं। पहले यह सेगमेंट सीमित सफलता और कम पहुंच वाला माना जाता था, लेकिन अब स्थिति तेजी से बदल रही है। ऑपरेटर्स मजबूत मांग का फायदा उठा रहे हैं और नए डवलपर्स भी इस क्षेत्र में प्रवेश कर रहे हैं। बेंगलुरु की मनासम सीनियर लिविंग जैसी कंपनियां चेन्नई, मैसूर, तिरुपति, मंगलुरु और पुणे जैसे शहरों में विस्तार कर रही हैं और जल्द ही गुरुग्राम, हैदराबाद और मुंबई में भी प्रोजेक्ट शुरू करने की योजना बना रही हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, मेट्रो शहरों के साथ-साथ छोटे शहरों में भी सीनियर लिविंग होम्स की मांग तेजी से बढ़ रही है, जबकि सप्लाई अभी भी बहुत कम है। यही कारण है कि अब अधिकतर डवलपर्स इस सेगमेंट में उतरने की योजना बना रहे हैं और कई ऑपरेटर्स के साथ साझेदारी कर रहे हैं। भारत की बुजुर्ग आबादी भी तेजी से बढ़ रही है। यूएन की रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2000 में 7.3 करोड़ बुजुर्गों की संख्या बढक़र 2025 में 16.5 करोड़ हो गई है। यह संख्या 2030 तक 19.5 करोड़ और 2050 तक 34.8 करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है। भारत की सिल्वर इकोनॉमी करीब 300 बिलियन डॉलर की है। जेएलएल की रिपोर्ट के अनुसार संगठित सीनियर हाउसिंग सेक्टर में अभी केवल लगभग 22 हजार यूनिट्स ही उपलब्ध हैं, जबकि मांग करीब 4 लाख घरों की है। वर्तमान में यह बाजार लगभग 2-3 बिलियन डॉलर का है, जो 2030 तक तीन गुना बढक़र 7.7 बिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है। प्राइमस सीनियर लिविंग ने पिछले दशक में 3,500 घर लॉन्च किए हैं और 4,000 नए घरों की पाइपलाइन तैयार की है। वहीं आशियाना हाउसिंग ने पुणे में 22 एकड़ जमीन पर 1,800 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट की घोषणा की है। सीनियर हाउसिंग में अब प्रीमियमाइजेशन का ट्रेंड भी तेजी से बढ़ रहा है। प्रोजेक्ट्स में बार, कैफे, क्लब और हेल्थकेयर जैसी सुविधाएं दी जा रही हैं। कीमतें लोकेशन और सुविधाओं के आधार पर 50 लाख से लेकर 4 करोड़ रुपये तक जा रही हैं। भारत की सबसे बड़ी रियल एस्टेट कंपनी डीएलएफ भी इस सेगमेंट में प्रवेश की तैयारी कर रही है। कंपनी का प्लान गुरुग्राम में 12 करोड़ रुपये से अधिक कीमत वाले सीनियर हाउसिंग प्रोजेक्ट लॉन्च करने का है। एनेलिस्ट्स के अनुसार सीनियर हाउसिंग केवल घर नहीं है बल्कि होटल, अस्पताल और आवास का मिश्रण है। यह सेक्टर आने वाले वर्षों में भारत के रियल एस्टेट बाजार का एक प्रमुख ग्रोथ इंजन बन सकता है।

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यंग देश में बूम पर सिल्वर इकोनॉमी

 सिल्वर इकोनॉमी यानी सीनियर सिटिजन से जुड़े प्रोडक्ट और सर्विसेस का मार्केट। भारत की पहचान दुनिया की सबसे बड़ी युवा आबादी वाले देश के रूप में है। देश की दो-तिहाई से ज्यादा आबादी 30 वर्ष से कम उम्र की है। लेकिन सीनियर सिटिजन की आबादी भी तेजी से बढ़ रही है। रिपोर्ट्स के अनुसार वर्ष 2025 में देश में 16.5 करोड़ सीनियर सिटिजन थे जो 2050 तक 34.8 करोड़ हो जाएगी। भारत में तेजी से बढ़ती बुजुर्ग आबादी अब सीनियर हाउसिंग सेक्टर के लिए एक बड़ा अवसर बन रही है। 55 वर्ष से अधिक आयु के लोगों के लिए बनाए जाने वाले विशेष रेजिडेंशियल प्रोजेक्ट्स की मांग तेजी से बढ़ रही है, जिसके चलते डवलपर्स अब नए शहरों में विस्तार, जमीन अधिग्रहण और प्रीमियम सेवाएं जोडऩे पर जोर दे रहे हैं। पहले यह सेगमेंट सीमित सफलता और कम पहुंच वाला माना जाता था, लेकिन अब स्थिति तेजी से बदल रही है। ऑपरेटर्स मजबूत मांग का फायदा उठा रहे हैं और नए डवलपर्स भी इस क्षेत्र में प्रवेश कर रहे हैं। बेंगलुरु की मनासम सीनियर लिविंग जैसी कंपनियां चेन्नई, मैसूर, तिरुपति, मंगलुरु और पुणे जैसे शहरों में विस्तार कर रही हैं और जल्द ही गुरुग्राम, हैदराबाद और मुंबई में भी प्रोजेक्ट शुरू करने की योजना बना रही हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, मेट्रो शहरों के साथ-साथ छोटे शहरों में भी सीनियर लिविंग होम्स की मांग तेजी से बढ़ रही है, जबकि सप्लाई अभी भी बहुत कम है। यही कारण है कि अब अधिकतर डवलपर्स इस सेगमेंट में उतरने की योजना बना रहे हैं और कई ऑपरेटर्स के साथ साझेदारी कर रहे हैं। भारत की बुजुर्ग आबादी भी तेजी से बढ़ रही है। यूएन की रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2000 में 7.3 करोड़ बुजुर्गों की संख्या बढक़र 2025 में 16.5 करोड़ हो गई है। यह संख्या 2030 तक 19.5 करोड़ और 2050 तक 34.8 करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है। भारत की सिल्वर इकोनॉमी करीब 300 बिलियन डॉलर की है। जेएलएल की रिपोर्ट के अनुसार संगठित सीनियर हाउसिंग सेक्टर में अभी केवल लगभग 22 हजार यूनिट्स ही उपलब्ध हैं, जबकि मांग करीब 4 लाख घरों की है। वर्तमान में यह बाजार लगभग 2-3 बिलियन डॉलर का है, जो 2030 तक तीन गुना बढक़र 7.7 बिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है। प्राइमस सीनियर लिविंग ने पिछले दशक में 3,500 घर लॉन्च किए हैं और 4,000 नए घरों की पाइपलाइन तैयार की है। वहीं आशियाना हाउसिंग ने पुणे में 22 एकड़ जमीन पर 1,800 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट की घोषणा की है। सीनियर हाउसिंग में अब प्रीमियमाइजेशन का ट्रेंड भी तेजी से बढ़ रहा है। प्रोजेक्ट्स में बार, कैफे, क्लब और हेल्थकेयर जैसी सुविधाएं दी जा रही हैं। कीमतें लोकेशन और सुविधाओं के आधार पर 50 लाख से लेकर 4 करोड़ रुपये तक जा रही हैं। भारत की सबसे बड़ी रियल एस्टेट कंपनी डीएलएफ भी इस सेगमेंट में प्रवेश की तैयारी कर रही है। कंपनी का प्लान गुरुग्राम में 12 करोड़ रुपये से अधिक कीमत वाले सीनियर हाउसिंग प्रोजेक्ट लॉन्च करने का है। एनेलिस्ट्स के अनुसार सीनियर हाउसिंग केवल घर नहीं है बल्कि होटल, अस्पताल और आवास का मिश्रण है। यह सेक्टर आने वाले वर्षों में भारत के रियल एस्टेट बाजार का एक प्रमुख ग्रोथ इंजन बन सकता है।


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