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Daily Business Newspaper | A Knowledge Powerhouse in Hindi

17-04-2026

लक्जरी ड्राइव के लिए इंफ्रा का चैलेंज

  •  ग्लोबल लक्जरी ग्रुप्स इंडिया को नेक्स्ट ग्रोथ ड्राइवर कह रहे हैं। दुनिया के ज्यादातर लक्जरी ब्रांड्स भारत में आ चुके हैं और बड़ी संख्या में ऐसे भी हैं जो लक्जरी रिटेल स्पेस मिलते ही इंडिया में धमक पड़ेंगे। भारत का लक्जरी मार्केट तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन इसकी नींव अभी उतनी मजबूत नहीं है जितनी शुरुआती सालों में चीन में थी। चीन में लक्जरी बूम को इनकम ग्रोथ और बहुत तेजी से हुए अर्बनाइजेशन ने हवा दी थी। चालू सदी के पहले दस साल में चीन ने अर्बन इंफ्रास्ट्रक्चर पर जो इंवेस्टमेंट किया था उससे भी लक्जरी सेल्स को फायदा हुआ। भारत में इलीट बायर कम है और जो हैं वे भी ग्लोब ट्रोटर (दुनियाभर में सैर करने वाले) हैं। साथ ही यह इलीट बायर देश के दर्जनों शहरों में बिखरे हुए हैं। पिछले साल कई लक्जरी ब्रांड्स ने भारत में अपनी मौजूदगी बढ़ाई। जेएलआर ने हैदराबाद में विस्तार किया, टेस्ला ने मुंबई और दिल्ली में एंट्री ली, जबकि एपल ने अपने स्टोर्स की संख्या बढ़ाकर छह कर दी। प्रादा ने दिल्ली में ब्यूटी सेगमेंट के जरिए शुरुआत की, जो आगे फैशन में विस्तार का पहला कदम माना जा रहा है। भारत का लक्जरी मार्केट फास्ट्रेक ग्रोथ वाला है लेकिन यहां ग्रोथ छोटे और बिखरे हुए इलीट बायर पर निर्भर है। हुरुन इंडिया के अनुसार, 2021 में 4.58 लाख डॉलर-मिलियनेयर परिवारों की संख्या 2025 में बढक़र 8.71 लाख हो गई है। कर्नी की 2023 रिपोर्ट के अनुसार, भारत के लक्जरी बायर तीन ग्रुप्स में बंटे हैं। लीगेसी इलीट (पारंपरिक अमीर) 40 परसेंट हैं, एमर्जिंग इलीट (उभरते अमीर) 37 परसेंट और एस्पिरेशनल इलीट (महत्वाकांक्षी उपभोक्ता) 23 परसेंट। लीगेसी इलीट में वे लोग हैं जो पुरानी बिजनस फैमिली हैं और लक्जरी उनकी लाइफस्टाइल का पार्ट है। दूसरे वर्ग में नए आंत्रप्रेन्यॉर और प्रोफेशनल्स आते हैं, जो इसे अचीवमेंट के रूप में देखते हैं। तीसरा वर्ग स्टेटस दिखाने के लिए लक्जरी अपनाता है। आज का बड़ा बदलाव एक्सपोजर है। पहले इंटरनेशनल ट्रेवल सीमित थी और सोशल मीडिया का प्रभाव कम था, लेकिन अब भारतीय बायर दुबई, सिंगापुर, पेरिस और बैंकॉक जैसे शहरों में ग्लोबल रिटेल एक्सपीरियंस ले रहे हैं जिससे उनकी अपेक्षाएं बढ़ रही हैं। डिजिटल प्लेटफॉम्र्स इस विस्तार का पहला कदम हैं। लक्जरी प्रोडक्ट्स की 60 परसेंट से ज्यादा रिसर्चिंग टाटा क्लिक, मिंत्रा और आजियो जैसे प्लेटफॉम्र्स पर होती है। इससे टियर-2 और टियर-3 शहरों में मांग बढ़ी है। हालांकि, देश में लक्जरी सेल्स के रास्ते में सबसे बड़ा चैलेंज रिटेल इंफ्रास्ट्रक्चर है। भारत में प्रति व्यक्ति केवल 0.07 वर्ग फुट ग्रेड-ए रिटेल स्पेस है, जो थाईलैंड से 30 गुना कम है। इसी कारण कई ब्रांड्स भारत में एंटर नहीं कर पा रहे या ब्रांड एक्सपीरियंस को डाउनग्रेड कर स्टोर खोल रहे हैं। इसी के चलते उन्हें रिलायंस ब्रांड्स, आदित्य बिड़ला फैशन एंड रिटेल आदि इंडियन प्लेयर्स को एंट्री गेटवे के रूप में इस्तेमाल करना पड़ रहा है।  एनेलिस्ट्स के अनुसार भारत का लक्जरी मार्केट के-शेप्ड है—जहां अमीर वर्ग तेजी से आगे बढ़ रहा है, लेकिन कंज्यूमर बेस और इंफ्रास्ट्रक्चर अभी पीछे है। लगभग 12 बिलियन डॉलर का यह बाजार चीन के मुकाबले 3 परसेंट से भी कम है।

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लक्जरी ड्राइव के लिए इंफ्रा का चैलेंज

 ग्लोबल लक्जरी ग्रुप्स इंडिया को नेक्स्ट ग्रोथ ड्राइवर कह रहे हैं। दुनिया के ज्यादातर लक्जरी ब्रांड्स भारत में आ चुके हैं और बड़ी संख्या में ऐसे भी हैं जो लक्जरी रिटेल स्पेस मिलते ही इंडिया में धमक पड़ेंगे। भारत का लक्जरी मार्केट तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन इसकी नींव अभी उतनी मजबूत नहीं है जितनी शुरुआती सालों में चीन में थी। चीन में लक्जरी बूम को इनकम ग्रोथ और बहुत तेजी से हुए अर्बनाइजेशन ने हवा दी थी। चालू सदी के पहले दस साल में चीन ने अर्बन इंफ्रास्ट्रक्चर पर जो इंवेस्टमेंट किया था उससे भी लक्जरी सेल्स को फायदा हुआ। भारत में इलीट बायर कम है और जो हैं वे भी ग्लोब ट्रोटर (दुनियाभर में सैर करने वाले) हैं। साथ ही यह इलीट बायर देश के दर्जनों शहरों में बिखरे हुए हैं। पिछले साल कई लक्जरी ब्रांड्स ने भारत में अपनी मौजूदगी बढ़ाई। जेएलआर ने हैदराबाद में विस्तार किया, टेस्ला ने मुंबई और दिल्ली में एंट्री ली, जबकि एपल ने अपने स्टोर्स की संख्या बढ़ाकर छह कर दी। प्रादा ने दिल्ली में ब्यूटी सेगमेंट के जरिए शुरुआत की, जो आगे फैशन में विस्तार का पहला कदम माना जा रहा है। भारत का लक्जरी मार्केट फास्ट्रेक ग्रोथ वाला है लेकिन यहां ग्रोथ छोटे और बिखरे हुए इलीट बायर पर निर्भर है। हुरुन इंडिया के अनुसार, 2021 में 4.58 लाख डॉलर-मिलियनेयर परिवारों की संख्या 2025 में बढक़र 8.71 लाख हो गई है। कर्नी की 2023 रिपोर्ट के अनुसार, भारत के लक्जरी बायर तीन ग्रुप्स में बंटे हैं। लीगेसी इलीट (पारंपरिक अमीर) 40 परसेंट हैं, एमर्जिंग इलीट (उभरते अमीर) 37 परसेंट और एस्पिरेशनल इलीट (महत्वाकांक्षी उपभोक्ता) 23 परसेंट। लीगेसी इलीट में वे लोग हैं जो पुरानी बिजनस फैमिली हैं और लक्जरी उनकी लाइफस्टाइल का पार्ट है। दूसरे वर्ग में नए आंत्रप्रेन्यॉर और प्रोफेशनल्स आते हैं, जो इसे अचीवमेंट के रूप में देखते हैं। तीसरा वर्ग स्टेटस दिखाने के लिए लक्जरी अपनाता है। आज का बड़ा बदलाव एक्सपोजर है। पहले इंटरनेशनल ट्रेवल सीमित थी और सोशल मीडिया का प्रभाव कम था, लेकिन अब भारतीय बायर दुबई, सिंगापुर, पेरिस और बैंकॉक जैसे शहरों में ग्लोबल रिटेल एक्सपीरियंस ले रहे हैं जिससे उनकी अपेक्षाएं बढ़ रही हैं। डिजिटल प्लेटफॉम्र्स इस विस्तार का पहला कदम हैं। लक्जरी प्रोडक्ट्स की 60 परसेंट से ज्यादा रिसर्चिंग टाटा क्लिक, मिंत्रा और आजियो जैसे प्लेटफॉम्र्स पर होती है। इससे टियर-2 और टियर-3 शहरों में मांग बढ़ी है। हालांकि, देश में लक्जरी सेल्स के रास्ते में सबसे बड़ा चैलेंज रिटेल इंफ्रास्ट्रक्चर है। भारत में प्रति व्यक्ति केवल 0.07 वर्ग फुट ग्रेड-ए रिटेल स्पेस है, जो थाईलैंड से 30 गुना कम है। इसी कारण कई ब्रांड्स भारत में एंटर नहीं कर पा रहे या ब्रांड एक्सपीरियंस को डाउनग्रेड कर स्टोर खोल रहे हैं। इसी के चलते उन्हें रिलायंस ब्रांड्स, आदित्य बिड़ला फैशन एंड रिटेल आदि इंडियन प्लेयर्स को एंट्री गेटवे के रूप में इस्तेमाल करना पड़ रहा है।  एनेलिस्ट्स के अनुसार भारत का लक्जरी मार्केट के-शेप्ड है—जहां अमीर वर्ग तेजी से आगे बढ़ रहा है, लेकिन कंज्यूमर बेस और इंफ्रास्ट्रक्चर अभी पीछे है। लगभग 12 बिलियन डॉलर का यह बाजार चीन के मुकाबले 3 परसेंट से भी कम है।


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