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Daily Business Newspaper | A Knowledge Powerhouse in Hindi

11-04-2026

क्राफ्ट स्पिरिट्स में दिखने लगी एनीमल स्पिरिट

  •  भारत की तेजी से बदलती ड्रिंकिंग कल्चर में क्राफ्ट स्पिरिट्स के लिए जगह बन रही है। लेकिन यह मार्केट बहुत ही ज्यादा रिस्की है क्योंकि इसमें प्राइसिंग से लेकर डिस्ट्रीब्यूशन तक का गणित बहुत उलझा हुआ है और केवल हाइप के दम पर नए प्लेटर्स टिक नहीं सकते। ओखर स्पिरिट्स के फाउंडर जॉन रॉययर के अनुसार इंडियन कंज्यूमर अब बार प्राइसिंग नहीं बल्कि कॉकटेल की क्वॉलिटी और ओवरऑल एक्सपीरियंस के आधार पर चुन रहे हैं। वह कहते हैं, पहले हम कॉकटेल मेन्यू को नजरअंदाज करते थे क्योंकि वह महंगे होते थे, लेकिन अब लोग पहले कॉकटेल मेन्यू देखते हैं और फिर तय करते हैं कि कहां जाना है। कोविड के दौरान इस सैगमेंट की चूल हिल गई थी। उसके बाद यह सैगमेंट मास मार्केट के बजाय इंपोर्टेड ब्रांड्स की ओर शिफ्ट हो रहा है। ओखर स्पिरिट्स खुद को अफोर्डेबल प्रीमियम कैटेगरी में पोजिशन कर रही है और एक ही स्पिरिट पर निर्भर रहने के बजाय कई कैटेगरी में पोर्टफोलियो बना रही है। ग्लोबल अल्कोहोलिक बेवरेज मार्केट वर्ष 2024 में 1.60 ट्रिलियन डॉलर यानी 133 लाख करोड़ रुपये का था जो जो 2033 तक $2 ट्रिलियन डॉलर यानी लगभग 166 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है। भारत दुनिया में अल्कोहोलिक बेवरेज पांचवां सबसे बड़ा बाजार है। भारत में यह इंडस्ट्री 2024 के $39.3 बिलियन डॉलर यानी 3.64 लाख करोड़ रुपये से बढक़र 2034 तक $68.75 बिलियन डॉलर यानी 6.4 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है। वहीं क्राफ्ट स्पिरिट्स सेगमेंट 2024 में लगभग 22 हजार करोड़ रुपये का था जो 2033 तक 22 परसेंट सीएजीआर से बढऩे की उम्मीद है। पिछले वित्त वर्ष में कंपनी का रेवेन्यू 2.35-2.5 करोड़ तक पहुंच गया। कंपनी पहले केवल गोवा में ऑपरेट कर रही थी लेकिन अब महाराष्ट्र और कर्नाटक में भी मौजूद है। कंपनी ने अगले तीन वर्ष के लिए अपना रेवेन्यू टार्गेट 100 करोड़ से बढ़ाकर 145 करोड़ कर दिया है। कंपनी अगले वित्त वर्ष में 7 राज्यों और 34 शहरों में विस्तार की योजना बना रही है। क्राफ्ट स्पिरिट्स के रेवेन्यू में नॉन-अल्कोहोलिक बेवरेजेज—जैसे प्रीमियम मिक्सर, कॉकटेल प्रीमिक्स और पैकेज्ड वाटर का करीब 20 परसेंट शेयर होता है। हालांकि लिकर पर जीएसटी नहीं लगता लेकिन ज्यादातर नॉन-अल्कोहोलिक बेवरेज जीएसटी के दायरे में आते हैं। साथ ही इंडिया में लिकर एडवरटाइजिंग  पर पाबंदी है ऐसे में नॉन-अल्कोहोलिक प्रोडक्ट्स ब्रांड बिल्डिंग में भी काम आते हैं। भारत का नॉन-अल्कोहोलिक बेवरेज मार्केट 2023 में $2.60 लाख करोड़ रुपये का था जो 2033 तक 6 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है।  रॉययर का मानना है कि अगले 18-24 महीनों में क्राफ्ट स्पिरिट्स इंडस्ट्री में कंसोलिडेशन होगा—कुछ ब्रांड टिकेंगे, कुछ बिक जाएंगे और कुछ बंद हो सकते हैं। ओखर के लिए फायदा यह है कि वह अल्कोहोलिक और नॉन-अल्कोहोलिक दोनों के लिए एक ही डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क का उपयोग कर रही है। भारत के अल्कोहोलिक बेवरेज के 70 परसेंट मार्केट पर व्हिस्की का कब्जा है।

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क्राफ्ट स्पिरिट्स में दिखने लगी एनीमल स्पिरिट

 भारत की तेजी से बदलती ड्रिंकिंग कल्चर में क्राफ्ट स्पिरिट्स के लिए जगह बन रही है। लेकिन यह मार्केट बहुत ही ज्यादा रिस्की है क्योंकि इसमें प्राइसिंग से लेकर डिस्ट्रीब्यूशन तक का गणित बहुत उलझा हुआ है और केवल हाइप के दम पर नए प्लेटर्स टिक नहीं सकते। ओखर स्पिरिट्स के फाउंडर जॉन रॉययर के अनुसार इंडियन कंज्यूमर अब बार प्राइसिंग नहीं बल्कि कॉकटेल की क्वॉलिटी और ओवरऑल एक्सपीरियंस के आधार पर चुन रहे हैं। वह कहते हैं, पहले हम कॉकटेल मेन्यू को नजरअंदाज करते थे क्योंकि वह महंगे होते थे, लेकिन अब लोग पहले कॉकटेल मेन्यू देखते हैं और फिर तय करते हैं कि कहां जाना है। कोविड के दौरान इस सैगमेंट की चूल हिल गई थी। उसके बाद यह सैगमेंट मास मार्केट के बजाय इंपोर्टेड ब्रांड्स की ओर शिफ्ट हो रहा है। ओखर स्पिरिट्स खुद को अफोर्डेबल प्रीमियम कैटेगरी में पोजिशन कर रही है और एक ही स्पिरिट पर निर्भर रहने के बजाय कई कैटेगरी में पोर्टफोलियो बना रही है। ग्लोबल अल्कोहोलिक बेवरेज मार्केट वर्ष 2024 में 1.60 ट्रिलियन डॉलर यानी 133 लाख करोड़ रुपये का था जो जो 2033 तक $2 ट्रिलियन डॉलर यानी लगभग 166 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है। भारत दुनिया में अल्कोहोलिक बेवरेज पांचवां सबसे बड़ा बाजार है। भारत में यह इंडस्ट्री 2024 के $39.3 बिलियन डॉलर यानी 3.64 लाख करोड़ रुपये से बढक़र 2034 तक $68.75 बिलियन डॉलर यानी 6.4 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है। वहीं क्राफ्ट स्पिरिट्स सेगमेंट 2024 में लगभग 22 हजार करोड़ रुपये का था जो 2033 तक 22 परसेंट सीएजीआर से बढऩे की उम्मीद है। पिछले वित्त वर्ष में कंपनी का रेवेन्यू 2.35-2.5 करोड़ तक पहुंच गया। कंपनी पहले केवल गोवा में ऑपरेट कर रही थी लेकिन अब महाराष्ट्र और कर्नाटक में भी मौजूद है। कंपनी ने अगले तीन वर्ष के लिए अपना रेवेन्यू टार्गेट 100 करोड़ से बढ़ाकर 145 करोड़ कर दिया है। कंपनी अगले वित्त वर्ष में 7 राज्यों और 34 शहरों में विस्तार की योजना बना रही है। क्राफ्ट स्पिरिट्स के रेवेन्यू में नॉन-अल्कोहोलिक बेवरेजेज—जैसे प्रीमियम मिक्सर, कॉकटेल प्रीमिक्स और पैकेज्ड वाटर का करीब 20 परसेंट शेयर होता है। हालांकि लिकर पर जीएसटी नहीं लगता लेकिन ज्यादातर नॉन-अल्कोहोलिक बेवरेज जीएसटी के दायरे में आते हैं। साथ ही इंडिया में लिकर एडवरटाइजिंग  पर पाबंदी है ऐसे में नॉन-अल्कोहोलिक प्रोडक्ट्स ब्रांड बिल्डिंग में भी काम आते हैं। भारत का नॉन-अल्कोहोलिक बेवरेज मार्केट 2023 में $2.60 लाख करोड़ रुपये का था जो 2033 तक 6 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है।  रॉययर का मानना है कि अगले 18-24 महीनों में क्राफ्ट स्पिरिट्स इंडस्ट्री में कंसोलिडेशन होगा—कुछ ब्रांड टिकेंगे, कुछ बिक जाएंगे और कुछ बंद हो सकते हैं। ओखर के लिए फायदा यह है कि वह अल्कोहोलिक और नॉन-अल्कोहोलिक दोनों के लिए एक ही डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क का उपयोग कर रही है। भारत के अल्कोहोलिक बेवरेज के 70 परसेंट मार्केट पर व्हिस्की का कब्जा है।


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