एआई कंटेंट प्रोडक्शन इंडस्ट्री में बड़ा बदलाव ला रहा है, जहां लागत में 60-70 परसेंट तक कमी और प्रोडक्शन टाइमलाइन में तेजी आ रही है। कलेक्टिव आर्टिस्ट्स नेटवर्क के फाउंडर विजय सुब्रमणियम के अनुसार, एआई केवल एफिशिएंसी नहीं बढ़ा रहा बल्कि हाई स्केल पर कंटेंट मेकिंग के तरीके को पूरी तरह बदल रहा है। खासकर धार्मिक और फैंटेसी जॉनर (वर्ग) के कॉन्टेंट के लिए तो एआई बहुत की मददगार साबित हो रही है और इस पूरे वर्टिकल में क्रांतिकारी बदलाव ला रही है। उन्होंने कहा कि पहले जिस कंटेंट की डिजाइन, प्री-विजुअलाइजेशन और वीएफएक्स में कई सप्ताह लगते थे वहीं अब वही काम कुछ दिनों में छोटे और अधिक इंटीग्रेटेड टीम के साथ पूरा किया जा सकता है। कंपनी एआई का उपयोग महाभारत, हनुमान, कृष्ण और कर्ण जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स के निर्माण में कर रही है, जिससे फिजिकल प्रोडक्शन और भारी पोस्ट-प्रोडक्शन पर निर्भरता काफी कम हो गई है। पारंपरिक फिल्म मेकिंग में जहां सेट, वीएफएक्स और इंफ्रास्ट्रक्चर पर भारी शुरुआती निवेश करना पड़ता है, वहीं एआई-आधारित मॉडल में कैपिटल को टेक्नोलॉजी, सिस्टम्स और क्रिएटिव डवलपमेंट की ओर शिफ्ट किया जा रहा है। विजय सुब्रमणियम के अनुसार यहां मामला सस्ती फिल्में बनाने का नहीं बल्कि उतने या उससे भी बड़े कंटेंट को ज्यादा ऑप्टिमाइज़्ड कॉस्ट के साथ तैयार करने का है। कलेक्टिव आर्टिस्ट्स नेटवर्क को निखिल कामथ और नेपियन कैपियन जैसे इंवेस्टर सपोर्ट कर रहे हैं। यह स्टूडियो अपने एआई-ड्रिवन कंटेंट प्रोडक्शन को तेजी से बढ़ा रहा है और दावा है कि एआई-आधारित कंटेंट तैयार करने की रफ्तार को बहुत तेज कर चुकी है। ऑटोमेशन को लेकर चिंताओं के बावजूद, विजय सुब्रमणियम के अनुसार ने कहा कि एआई मानव भूमिकाओं को खत्म नहीं करेगा। उनके अनुसार, यह एक गलत धारणा है। एआई क्रिएटर्स को सशक्त बनाता है, न कि उन्हें रिप्लेस करता है। डायरेक्टर, राइटर और डिजाइनर इस पूरी प्रोसेस में भी पहले की तरह केंद्र में रहते हैं। कंपनी ने डीप-टेक टूल्स खरीदने के लिए जो इंवेस्ट किया था उससे अब एक फुल एआई स्टूडियो गैलेरीज में बदल दिया है, और ब्रांड डील्स में भी तेजी देखी जा रही है। अब कंपनियां वन-ऑफ कैंपेन से आगे बढक़र फुल-स्टैक पार्टनरशिप की ओर जा रही हैं, जिससे डील साइज भी बढ़ रहा है। वित्तीय रूप से, कंपनी खुद को प्रॉफिटेबल और अच्छी तरह कैपिटलाइज्ड बताती है, और फिलहाल नए फंडरेजिंग की कोई योजना नहीं है। कलेक्टिव आर्टिस्ट्स नेटवर्क वेस्ट एशिया में मौजूद है जिसे बढ़ाने के प्लान पर काम कर रही है साथ ही आसियान देशों में इसका विस्तार किया जाएगा।