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14-04-2026

ट्रंप की तिरछी नजर बर्थ टूरिज्म पर

  •  वो कहावत नहीं है...लव मी, हेट मी बट यू कान्ट इग्नोर मी...(पसंद करो या नापसंद करो लेकिन नजरअंदाज नहीं कर सकते)। लगता है यह डोनाल्ड ट्रंप  के लिए ही लिखी गई है। ट्रंप अमेरिकी संविधान के 14 संशोधन द्वारा दी गई जन्मआधारित नागरिकता (बर्थराइट सिटिजनशिप) की गारंटी को चैलेंज कर रहे हैं। वे दरअसल उन बच्चों को अपने आप नागरिकता मिलने की गारंटी को खत्म करना चाहते हैं जिनका जन्म अमेरिका में हुआ है लेकिन उनके माता-पिता अवैध (अनडॉक्यूमेंटेड) प्रवासी हैं। ट्रंप के एक्जेक्टिव ऑर्डर के अनुसार जन्मआधारित नागरिकता केवल उन बच्चों को ही मिलेगी जिनके कम से कम एक माता या पिता अमेरिकी नागरिक या वैध स्थायी निवासी (लॉफुल परमानेंट रेजिडेंट) हों। ट्रंप को अंदाजा है कि अमेरिका में बर्थ टूरिज्म का बड़ा गोरखधंधा चल रहा है। देशभर में ऐसे आईवीएफ क्लिनिक्स की बाढ़ आई हुई है जो विदेशी पुरुषों को अमेरिका में सरोगेट मदर के जरिए बच्चे पैदा करने की सुविधा दे रहे हैं। चीन में सैंकड़ों-हजारों इलीट्स अमेरिका की नागरिकता के लिए सरोगेसी के जरिए दर्जनों तक बच्चे पैदा कर रहे हैं। लेकिन अमेरिका का आईसीई यानी इमिग्रेशन एंड कस्टम्स एनफोर्समेंट विभाग अब ऐसे मामलों की गहराई से जांच का अभियान चला रहा है। उद्देश्य उन नेटवक्र्स को उजागर करने का है, जो गर्भवती विदेशी महिलाओं को अमेरिका लाकर बच्चों को जन्म दिलवाते हैं ताकि उन्हें अमेरिकी नागरिकता मिल सके। व्हाइट हाउस की प्रवक्ता एना केली के अनुसार बेलगाम बर्थ टूरिज्म टैक्सपेयर्स पर भारी बोझ डालता है और नेशनल सिक्यॉरिटी के लिए खतरा पैदा कर रहा है। अधिकांश देश जन्म के आधार पर स्वत: नागरिकता नहीं देते। अमेरिका के डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्यॉरिटी का भी मानना है कि देश में ऐसे नेटवर्क काम कर रहे हैं जो बर्थ टूरिज्म के लिए अमेरिका पहुंचने में मदद करते हैं। कानूनी रूप से, अमेरिका में बर्थ टूरिज्म पर सीधा प्रतिबंध नहीं है, लेकिन 2020 में लागू एक नियम के तहत टूरिस्ट या बिजनस वीजा का उपयोग केवल बच्चे की नागरिकता प्राप्त करने के उद्देश्य से करना प्रतिबंधित है। सेंटर ऑफ इमिग्रेशन स्टडीज के वर्ष 2020 के एक एनेलिसिस के अनुसार 2016-2017 के बीच एक साल में लगभग 20,000 से 25,000 महिलाएं इस उद्देश्य से अमेरिका आई थीं। 2025 में अमेरिका में कुल 36 लाख जन्म दर्ज किए गए, जिनमें बर्थ टूरिज्म का हिस्सा बहुत छोटा माना जाता है। फिर भी रिपब्लिकन नेता इसे नागरिकता कानूनों में बदलाव के लिए बड़ा मुद्दा बना रहे हैं। हालांकि कई फेडरल कोर्ट्स ने ट्रंप कें एक्जेक्टिव ऑर्डर को स्टे कर दिया है और कई संघीय न्यायाधीशों ने इस आदेश पर रोक लगा दी और मामला अब यूएस सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है। ट्रंप प्रशासन के सॉलिसिटर जनरल ने कोर्ट में कहा कि बर्थराइट सिटिजनशिप ने देश में बर्थ टूरिज्म का बड़ा गोरखधंधा खड़ा कर दिया है। वर्ष 2019 में केलिफोर्निया में बर्थ हाउस चलाने वाले एक नेटवर्क को ध्वस्त किया गया था जो चीन की अमीर महिलाओं को ऐसी सर्विस दे रहा था। इस मामले में एक चीनी नागरिक को 10 महीने की सजा हुई।

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ट्रंप की तिरछी नजर बर्थ टूरिज्म पर

 वो कहावत नहीं है...लव मी, हेट मी बट यू कान्ट इग्नोर मी...(पसंद करो या नापसंद करो लेकिन नजरअंदाज नहीं कर सकते)। लगता है यह डोनाल्ड ट्रंप  के लिए ही लिखी गई है। ट्रंप अमेरिकी संविधान के 14 संशोधन द्वारा दी गई जन्मआधारित नागरिकता (बर्थराइट सिटिजनशिप) की गारंटी को चैलेंज कर रहे हैं। वे दरअसल उन बच्चों को अपने आप नागरिकता मिलने की गारंटी को खत्म करना चाहते हैं जिनका जन्म अमेरिका में हुआ है लेकिन उनके माता-पिता अवैध (अनडॉक्यूमेंटेड) प्रवासी हैं। ट्रंप के एक्जेक्टिव ऑर्डर के अनुसार जन्मआधारित नागरिकता केवल उन बच्चों को ही मिलेगी जिनके कम से कम एक माता या पिता अमेरिकी नागरिक या वैध स्थायी निवासी (लॉफुल परमानेंट रेजिडेंट) हों। ट्रंप को अंदाजा है कि अमेरिका में बर्थ टूरिज्म का बड़ा गोरखधंधा चल रहा है। देशभर में ऐसे आईवीएफ क्लिनिक्स की बाढ़ आई हुई है जो विदेशी पुरुषों को अमेरिका में सरोगेट मदर के जरिए बच्चे पैदा करने की सुविधा दे रहे हैं। चीन में सैंकड़ों-हजारों इलीट्स अमेरिका की नागरिकता के लिए सरोगेसी के जरिए दर्जनों तक बच्चे पैदा कर रहे हैं। लेकिन अमेरिका का आईसीई यानी इमिग्रेशन एंड कस्टम्स एनफोर्समेंट विभाग अब ऐसे मामलों की गहराई से जांच का अभियान चला रहा है। उद्देश्य उन नेटवक्र्स को उजागर करने का है, जो गर्भवती विदेशी महिलाओं को अमेरिका लाकर बच्चों को जन्म दिलवाते हैं ताकि उन्हें अमेरिकी नागरिकता मिल सके। व्हाइट हाउस की प्रवक्ता एना केली के अनुसार बेलगाम बर्थ टूरिज्म टैक्सपेयर्स पर भारी बोझ डालता है और नेशनल सिक्यॉरिटी के लिए खतरा पैदा कर रहा है। अधिकांश देश जन्म के आधार पर स्वत: नागरिकता नहीं देते। अमेरिका के डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्यॉरिटी का भी मानना है कि देश में ऐसे नेटवर्क काम कर रहे हैं जो बर्थ टूरिज्म के लिए अमेरिका पहुंचने में मदद करते हैं। कानूनी रूप से, अमेरिका में बर्थ टूरिज्म पर सीधा प्रतिबंध नहीं है, लेकिन 2020 में लागू एक नियम के तहत टूरिस्ट या बिजनस वीजा का उपयोग केवल बच्चे की नागरिकता प्राप्त करने के उद्देश्य से करना प्रतिबंधित है। सेंटर ऑफ इमिग्रेशन स्टडीज के वर्ष 2020 के एक एनेलिसिस के अनुसार 2016-2017 के बीच एक साल में लगभग 20,000 से 25,000 महिलाएं इस उद्देश्य से अमेरिका आई थीं। 2025 में अमेरिका में कुल 36 लाख जन्म दर्ज किए गए, जिनमें बर्थ टूरिज्म का हिस्सा बहुत छोटा माना जाता है। फिर भी रिपब्लिकन नेता इसे नागरिकता कानूनों में बदलाव के लिए बड़ा मुद्दा बना रहे हैं। हालांकि कई फेडरल कोर्ट्स ने ट्रंप कें एक्जेक्टिव ऑर्डर को स्टे कर दिया है और कई संघीय न्यायाधीशों ने इस आदेश पर रोक लगा दी और मामला अब यूएस सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है। ट्रंप प्रशासन के सॉलिसिटर जनरल ने कोर्ट में कहा कि बर्थराइट सिटिजनशिप ने देश में बर्थ टूरिज्म का बड़ा गोरखधंधा खड़ा कर दिया है। वर्ष 2019 में केलिफोर्निया में बर्थ हाउस चलाने वाले एक नेटवर्क को ध्वस्त किया गया था जो चीन की अमीर महिलाओं को ऐसी सर्विस दे रहा था। इस मामले में एक चीनी नागरिक को 10 महीने की सजा हुई।


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