भारत को दु्निया का सबसे बड़ा फिल्म मेकिंग देश कहा जाता है। यह हर साल सभी भाषाएं मिलाकर 1 हजार से ज्यादा फिल्म बनती हैं। लेकिन भारतीय फिल्म इंडस्ट्री के 113 साल के इतिहास में पहली बार एक बड़े क्रांतिकारी बदलाव की आहट सुनाई देने लगी है। नए जमाने के मूवी सेट में कैमरा, क्लैपरबोर्ड और एक्शन-कट की चिल्ल-पौं की जगह अब कोडिंग फ्लोर की शांति ने ले ली है। द कलेक्टिव आर्टिस्ट्स नेटवर्क, जो बॉलीवुड के ए-लिस्ट सितारों के लिए एक प्रमुख टैलेंट एजेंसी है, लंबे समय से असली सुपरस्टार्स के करियर को संभालती रही है। अब यह डिजिटल सितारों को भी तैयार कर रही है। बेंगलुरु स्थित अपने स्टूडियो में एआई टूल्स से हिंदू पौराणिक कथाओं पर आधारित कंटेंट बना रहे हैं। महाभारत और रामायण के साथ ही अन्य हिंदू धर्म की लोकप्रिय कथाओं को भी डिजिटल रूप से फिल्माया जा रहा है। दर्शकों का बदलता नजरिया और स्ट्रीमिंग के विस्तार के कारण प्रोडक्शन बजट पर दबाव पड़ रहा है। कंसल्टिंग फर्म ओरमैक्स मीडिया के अनुसार, 2025 में सिनेमा देखने वालों की संख्या वर्ष 2019 के 103 करोड़ से घटकर 2025 में 83.2 करोड़ रह गई। हालांकि पिछले साल बॉक्स ऑफिस कलेक्शन 1.4 बिलियन डॉलर (करीब 13 हजार करोड़ रुपये) के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया लेकिन ओटीटी बूम के कारण कोविड के बाद से हालात बहुत बदल गए हैं और कुछ ही फिल्म और कुछ ही सितारे हिट कैटेगरी में शामिल हो पा रहे हैं। इसे देखते हुए भारत के स्टूडियो अब फुल एआई-जनरेटेड फिल्में बना रहे हैं, एआई डबिंग कर कई भाषाओं में रिलीज कर रहे हैं और पुरानी फिल्मों के क्लाइमेक्स को बदलकर एक्सट्रा कमाई कर रहे हैं। इस तरह भारत में फिल्म मेकिंग की पूरी इकोनॉमिक्स बदल रही है, प्रोडक्शन में लगने वाला टाइम घट रहा है। एआई स्टूडियो गैलेरिज के राहुल रेगुलापति के अनुसार एआई से कॉस्ट में 20 परसेंट और प्रोडक्शन टाइम में 25 परसेंट की बचत हो रही है। दूसरी ओर यूनियन के कॉन्ट्रेक्ट से बंधे होने के कारण हॉलीवुडं स्टूडियो एआई का इस्तेमाल नहीं कर पा रहे। भारत में कई बड़े प्रोडक्शन हाउस अपनी पूरी लाइब्रेरी को एआई वर्जन में फिर से रिलीज करने के प्लान पर काम कर रहे हैं। यह खेल इतना बड़ा हो चुका है कि गूगल, माइक्रोसॉफ्ट और एनविडिया जैसे टेक दिग्गज भारत के फिल्म स्टूडियो के साथ हाथ मिला रहे हैं। अमेरिकी और ब्रिटिश स्टूडियो भी एआई फिल्म प्रोडक्शन का ट्रायल कर चुके हैं। वर्ष 2024 में पहली पूरी लंबाई (फुल-लैंग्थ) एआई एनिमेटेड फिल्में बनाई गईं और पिछले साल द वि•ाार्ड ऑफ ओ•ाी का एआई वर्जन रिलीज किया गया। हालांकि यूनिवर्सिटी ऑफ रीडिंग के रिसर्चर डोमिनिक ली•ा के अनुसार यदि भारत के फिल्म स्टूडियो को एआई पहल में कामयाबी मिलती है तो भारत एआई फिल्म प्रोडक्शन का ग्लोबल हब बन सकता है। अन्स्र्ट एंड यंग की रिपोर्ट कहती है कि एआई से भारत की मीडिया और एंटरटेनमेंट कंपनियों का रेवेन्यू 10 परसेंट तक बढ़ सकता है और कॉस्ट 15 परसेंट तक घट सकती है। देश के जानी-मानी फिल्म प्रोडक्शन कंपनी इरो•ा मीडिया वल्र्ड ने 2013 की हिट फिल्म रांझणा के क्लाइमेक्स को एआई से हैपी एंडिंग देकर फिर से रिलीज किया था। अब इरो•ा अपनी 3 हजार फिल्मों को एआई से नई करने के प्लान पर काम कर रही है। भारत की 22 आधिकारिक भाषाएं और सैकड़ों बोलियां हैं। ऐसे में एक बड़ा मार्केट तैयार करने के लिए फिल्मों को डब कर रिलीज किया जाता है लेकिन इसमें लिप-सिंक का बड़ा चैलेंज होता है। बैंगलुरु की न्यूरलगैरेज नाम की एआई कंपनी की तकनीक अभिनेता की पहचान और अभिनय शैली को बनाए रखते हुए चेहरे को बदलती है ताकि डबिंग नैचरल लगे।