यूनियनरेयो की एक रिपोर्ट के अनुसार इटली का वल्र्ड फेमस रेडी टू वीयर ब्रांड बेनेटन दुनिया भर में अपने 400 स्टोर बंद कर रहा है। बेनेटन की स्थापना 1965 में इटली के ट्रेविसो शहर में हुई थी। कंपनी आर्थिक संकट में है और 2012 के बाद से बेनेटन की सेल्स बुरी तरह गिरी है जबकि उत्पादन लागत बढ़ रही है। भारत में भी बेनेटन अपने पीक दौर को बहुत पीछे छोड़ चुकी है। कंपनी भारत में 924 स्टोर चलाती है लेकिन इसका रेवेन्यू 500-600 करोड़ के आस-पास ही है। इटली की यह कंपनी क्लोदिंग और एक्सैसरी में डील करती है। हालांकि अभी यह पता नहीं कि कंपनी जिन 400 स्टोर्स को बंद कर रही है वे किस देश में होंगे। रिपोर्ट्स के अनुसार माना जा रहा है कि कंपनी अपनी डिस्ट्रीब्यूशन स्ट्रेटेजी को फाइनट्यून करना चाहती है और ब्रांड को रीलॉन्च करने के लिए डिजिटल प्लान पर काम करना चाहती है। इसके अलावा कंपनी इंफ्लूएंसर को भी अपने ब्रांड से जोड़ेगी। अपने पीक दौर में बेनेटन की ग्लोबल सेल्स 2 बिलियन डॉलर थी लेकिन 2023 में यह गिरकर सिर्फ 1 बिलियन यूरो ही रह गई। एनएसएस मैगजीन की रिपोर्ट कहती है कि 2023 में कंपनी को 230 मिलियन यूरो का नुकसान उठाना पड़ा था। पिछले 12 महीनों में फैशन रिटेलर ने इटली में अपने 100 से अधिक स्टोर बंद कर दिए हैं। कंपनी दुनियाभर में लगभग 3,500 स्टोर चलाती है। लेकिन यह कुछ समय से सीरियस क्राइसिस में है। इसीलिए कंपनी अपने स्टोर्स की संख्या घटाना चाहती है। बेनेटन ग्रुप के सीईओ क्लाउडियो स्फोर्जा ने कहा है कि कंपनी 2025 में घाटे को घटाकर 50 मिलियन यूरो तक लाना चाहती है और 2026 के लिए प्लान ब्रेक-इवन का है। ब्रेक-इवन यानी ना फायदा-ना नुकसान। बेनेटन की पहचान इटली से पावरफुल ब्रांड्स में से एक के रूप में है। कंपनी कलरफुल और अफोर्डेबल रेंज के कपड़े बनाती और बेचती हैं। 1990 और 2000 के दशक के दौरान कंपनी एडवरटाइजिंग केंपेन के जरिए दुनियाभर में अपनी ब्रांड इक्विटी और सेल्स रेवेन्यू बढ़ाने में कामयाब रही थी। इस दौरान बेनेटन ने फोटोग्राफर ओलिवेरो टोस्कानी के साथ भी पार्टनरशिप कर पूरा केंपेन चलाया था। जिसमें उन्होंने एड्स के खिलाफ जंग से लेकर नस्लवाद विरोधी आंदोलन जैसे सामाजिक विषयों को अपने केंपेन में शामिल किया था। और पीक दौर तब आया जब कंपनी ने यूनाइटेड कलर्स ऑफ बेनेटन स्लोगन लॉन्च किया। 2023 में बेनेटन ग्रुप का सेल्स रेवेन्यू 9.5 बिलियन यूरो रहा था।