शामें धीरे-धीरे गर्म होने लगी हैं तो बार का कलेवर भी बदलने लगा है। बीयर, व्हिस्की, वाइन और रम तो अपनी जगह हैं लेकिन वोडका और जिन में जामुन, कच्चा आम और मिर्ची-आम जैसे देसी फ्लेवर महफिल लूटने लगे हैं। यह बदलाव दिखाता है कि भारत का स्वाद अब रन ऑफ द मिल ( साधारण) व्हाइट स्पिरिट्स से आगे बढ़ रहा है और देसी फ्लेवर रंग जमा रहे हैं। वोडका और जिन में रंग-बिरंगे देसी फ्लेवर्स का यह ट्रेंड जितनी तेजी से बढ़ रहा है उससे डियाजियो, एलाइड ब्लेंडर्स एंड डिस्टिलर्स, रेडिको खेतान और एनवी ग्रुप जैसे दिग्गज लिकर मेकर्स को स्ट्रेटेजी बदलने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। मार्केट एनेलिस्ट कहते हैं कि भारत वॉल्यूम नहीं बल्कि वेल्यू के लिहाज से अब दुनिया का चौथा सबसे बड़ा फ्लेवर्ड स्पिरिट्स मार्केट बन चुका है। लिकर मार्केट में ऐसे यंग कंज्यूमर्स की एक पूरी नई जेनरेशन शामिल हो रही है जो हमेशा कुछ नया एक्सपीरियंस चाहते हैं। साथ ही घर पर ड्रिंक लगाने का ट्रेंड बढ़ रहा है और घर पर कलर और खुशबू के कारण परंपरागत शराब पीने में थोड़ी झिझक होती है। और...देश में बढ़ता कॉकटेल कल्चर भी फ्लेवर्ड स्पिरिट्स के इस मार्केट को जबरदस्त टेलविंड (सपोर्ट वाली हवा) दे रहा है। हालांकि दुनियाभर में भी फ्लेवर्ड स्पिरिट्स का चलन बढ़ रहा है, लेकिन भारत ने इसमें अपना अलग रास्ता चुना है। यहां क्रेनबेरी जैसे फिरंग फ्लेवर के बजाय देसी किचन, स्ट्रीट फूड और मौसमी फलों को आधार बनाया जा रहा है। रेडिको खेतान के मार्केटिंग हेड कुणाल मदान के अनुसार, कंपनी के मैजिक मोमेंट्स वोडका में कुल वॉल्यूम ग्रोथ की 60 परसेंट फ्लेवर्ड सेगमेंट से आ रही है। सितंबर 2025 में लॉन्च किया गया जामुन स्पाइसीमिंट फ्लेवर ने झंडे गाड़ रखे हैं और 700 रुपये की प्राइसिंग के कारण यह यंगिस्तान की फेवरेट बनकर उभर रही है। यूनाइटेड स्पिरिट्स के लिए भी मिंटी जामुन बड़ा ग्रोथ ड्राइवर साबित हो रहा है जिससे स्मिरनॉफ वोडका भारत में टॉप5 में शामिल हो गया। इसी तरह मैक्डॉवल्स एक्स सिरिज में ऑरेंज, ग्रीन एपल, क्रेनबेरी जैसे जैसे फ्लेवर जोड़े गए हैं। लंदन स्थित कंसल्टेंसी आईडब्ल्यूएसआर के अनुसार, भारत में हर साल 1.5 से 2 करोड़ नए लोग शराब पीने की लीगल एज में प्रवेश कर रहे हैं, जिससे बाजार लगातार बढ़ रहा है। एनवी ग्रुप के वरुण जैन के अनुसार, पहले कंपनियां केवल ऑरेंज, लेमन या रास्पबेरी जैसे फ्लेवर पर ध्यान देती थीं, लेकिन अब केसर, सौंफ और ग्रीन चिली मैंगो जैसे भारतीय फ्लेवर तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं। डेटा बताता है कि भारतीय फ्लेवर्ड स्पिरिट्स 2019 से 2024 के बीच वॉल्यूम में 24 परसेंट सीएजीआर और वैल्यू में 30 परसेंट सीएजीआर से बढ़े, जबकि विदेशी फ्लेवर इससे काफी पीछे रहे। आज फ्लेवर्ड वोडका पूरे वोडका बाजार का लगभग 40-43 परसेंट हिस्सा बन चुका है। बदलती पसंद के चलते अब लोग कोला जैसे भारी मिक्सर की जगह सोडा या सीधे फ्लेवर्ड स्पिरिट्स का सेवन कर रहे हैं। यह ट्रेंड कॉकटेल कल्चर को घर तक ले आया है। हालांकि, हर नया फ्लेवर सफल नहीं होता और कई ब्रांड अब सीमित लेकिन मजबूत प्रोडक्ट्स पर ध्यान दे रहे हैं। फिर भी दिशा स्पष्ट है—फ्लेवर अब केवल एक विकल्प नहीं, बल्कि इस इंडस्ट्री का मुख्य ग्रोथ इंजन बन चुका है।