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Daily Business Newspaper | A Knowledge Powerhouse in Hindi

24-04-2026

ग्लोबल बीयर ग्रोथ क्यों हो रही है स्लो?

  •  ग्लोबल मार्केट में बीयर के बबल ठंडे पड़ रहे हैं। स्लो ग्रोथ से फ्लैट ग्रोथ तक की खबरें आ रही हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, 2025 में दुनिया भर में बीयर की खपत (लीटर वॉल्यूम) लगभग 2 परसेंट घट गई। बीयर का फि•ा (झाग या फेन) ठंडा पड़ जाने के पीछे कंज्यूमर बिहेवियर में बदलाव को बड़ा कारण बताया जा रहा है। कंज्यूमर हेल्थ-कॉन्शियस हो रहे हैं और लो-अल्कोहल या नॉन-अल्कोहल ड्रिंक्स की ओर शिफ्ट कर रहे हैं। इसीलिए नॉन-अल्कोहल बीयर सेगमेंट में फास्ट ग्रोथ हो रही है और इसका घाटा रेगुलर बीयर मार्केट को हो रहा है। नतीजा नीदरलैंड्स (डच) की ग्लोबल बीयर दिग्गज हाइनिकेन को बड़ी रीस्ट्रक्चरिंग करनी पड़ रही है। एनेलिस्ट कहते हैं कि सोशल लाइफस्टाइल में बदलाव भी इस ट्रेंड को हवा दे रहा है। लोग पार्टी कम कर रहे हैं खासकर कोविड के बाद यह ट्रेंड और मजबूत हुआ है। बीयर वैसे भी सोशल या ली•ार ड्रिंक मानी जाती है।  लेकिन भारत को बीयर कंजम्पशन के लिहाज से राइजिंग मार्केट कहा जा रहा है। भारत में बीयर की डिमांड में हो रही ग्रोथ ग्लोबल घाटे की भरपाई कर रही है। प्रीमियम और क्राफ्ट बीयर सेगमेंट में भी कुछ ग्रोथ देखने को मिल रही है। कुल मिलाकर, बीयर इंडस्ट्री अब हाई ग्रोथ फेज से निकलकर लो ग्रोथ + ट्रांसफॉर्मेशन फेज में आ चुकी है।  हाइनिकेन ने कहा है कि वह प्रोडक्टिविटी बढ़ाने के लिए अगले दो वर्ष में 5 हजार से 6 हजार नौकरियां खत्म कर देगी। हाइनिकेन दुनियाभर में लगभग 87 हजार लोगों को रोजगार देती है। हाइनिकेन के अनुसार 2025 में कुल बीयर वॉल्यूम 2.4 परसेंट घट गया। यूरोप में 4.1 परसेंट और अमेरिका रीजन में 3.5 परसेंट की गिरावट दर्ज की गई। वर्ष 2025 में कंपनी की ग्लोबल सेल्स 36 बिलियन यूरो से घटकर 34.4 बिलियन यूरो रह गई।  हाइनिकेन अम्स्टेल और टेकाटे जैसे ब्रांड बनाती है और एबी इनबेव के बाद दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी ब्रूअरी (बीयर मेकर) कंपनी है। कंपनी के सीएफओ हेरोल्ड वान डेन ब्रोक के अनुसार यूरोप जैसा बड़ा मार्केट चैलेंजिंग बना हुआ है। हालांकि साथ में लगी टेबल में ग्लोबल बीयर मार्केट में करीब 5.3 परसेंट की ग्रोथ नजर आ रही है। लेकिन एनेलिस्ट्स का कहना है कि यह रेवेन्यू ग्रोथ है वॉल्यूम ग्रोथ नहीं। दूसरी ओर भारत में पिछले वर्ष बीयर मार्केट में 6 परसेंट ही ग्रोथ हुई लेकिन मार्केट 7.2 बिलियन डॉलर यानी करीब 60 हजार करोड़ रुपये का था जो 2034 तक करीब दोगुना होकर 1.34 लाख करोड़ रुपये का हो जाएगा। एनेलिस्ट्स के अनुसार बीयर मार्केट में फ्यूचर ग्रोथ नॉन-अल्कोहॉलिक और नये फ्लेवर इनोवेशन के दम पर होगी।

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ग्लोबल बीयर ग्रोथ क्यों हो रही है स्लो?

 ग्लोबल मार्केट में बीयर के बबल ठंडे पड़ रहे हैं। स्लो ग्रोथ से फ्लैट ग्रोथ तक की खबरें आ रही हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, 2025 में दुनिया भर में बीयर की खपत (लीटर वॉल्यूम) लगभग 2 परसेंट घट गई। बीयर का फि•ा (झाग या फेन) ठंडा पड़ जाने के पीछे कंज्यूमर बिहेवियर में बदलाव को बड़ा कारण बताया जा रहा है। कंज्यूमर हेल्थ-कॉन्शियस हो रहे हैं और लो-अल्कोहल या नॉन-अल्कोहल ड्रिंक्स की ओर शिफ्ट कर रहे हैं। इसीलिए नॉन-अल्कोहल बीयर सेगमेंट में फास्ट ग्रोथ हो रही है और इसका घाटा रेगुलर बीयर मार्केट को हो रहा है। नतीजा नीदरलैंड्स (डच) की ग्लोबल बीयर दिग्गज हाइनिकेन को बड़ी रीस्ट्रक्चरिंग करनी पड़ रही है। एनेलिस्ट कहते हैं कि सोशल लाइफस्टाइल में बदलाव भी इस ट्रेंड को हवा दे रहा है। लोग पार्टी कम कर रहे हैं खासकर कोविड के बाद यह ट्रेंड और मजबूत हुआ है। बीयर वैसे भी सोशल या ली•ार ड्रिंक मानी जाती है।  लेकिन भारत को बीयर कंजम्पशन के लिहाज से राइजिंग मार्केट कहा जा रहा है। भारत में बीयर की डिमांड में हो रही ग्रोथ ग्लोबल घाटे की भरपाई कर रही है। प्रीमियम और क्राफ्ट बीयर सेगमेंट में भी कुछ ग्रोथ देखने को मिल रही है। कुल मिलाकर, बीयर इंडस्ट्री अब हाई ग्रोथ फेज से निकलकर लो ग्रोथ + ट्रांसफॉर्मेशन फेज में आ चुकी है।  हाइनिकेन ने कहा है कि वह प्रोडक्टिविटी बढ़ाने के लिए अगले दो वर्ष में 5 हजार से 6 हजार नौकरियां खत्म कर देगी। हाइनिकेन दुनियाभर में लगभग 87 हजार लोगों को रोजगार देती है। हाइनिकेन के अनुसार 2025 में कुल बीयर वॉल्यूम 2.4 परसेंट घट गया। यूरोप में 4.1 परसेंट और अमेरिका रीजन में 3.5 परसेंट की गिरावट दर्ज की गई। वर्ष 2025 में कंपनी की ग्लोबल सेल्स 36 बिलियन यूरो से घटकर 34.4 बिलियन यूरो रह गई।  हाइनिकेन अम्स्टेल और टेकाटे जैसे ब्रांड बनाती है और एबी इनबेव के बाद दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी ब्रूअरी (बीयर मेकर) कंपनी है। कंपनी के सीएफओ हेरोल्ड वान डेन ब्रोक के अनुसार यूरोप जैसा बड़ा मार्केट चैलेंजिंग बना हुआ है। हालांकि साथ में लगी टेबल में ग्लोबल बीयर मार्केट में करीब 5.3 परसेंट की ग्रोथ नजर आ रही है। लेकिन एनेलिस्ट्स का कहना है कि यह रेवेन्यू ग्रोथ है वॉल्यूम ग्रोथ नहीं। दूसरी ओर भारत में पिछले वर्ष बीयर मार्केट में 6 परसेंट ही ग्रोथ हुई लेकिन मार्केट 7.2 बिलियन डॉलर यानी करीब 60 हजार करोड़ रुपये का था जो 2034 तक करीब दोगुना होकर 1.34 लाख करोड़ रुपये का हो जाएगा। एनेलिस्ट्स के अनुसार बीयर मार्केट में फ्यूचर ग्रोथ नॉन-अल्कोहॉलिक और नये फ्लेवर इनोवेशन के दम पर होगी।


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