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Daily Business Newspaper | A Knowledge Powerhouse in Hindi

23-04-2026

मेटा ऐसे कैसे ट्रेन करेगी एआई डेटा

  •  फेसबुक, इंस्टाग्राम और वॉट्सएप वाली कंपनी मेटा एआई ट्रेनिंग डेटा के लिए क्या-क्या जुगत लगा रहा है। खबर है कि कंपनी अमेरिका में कर्मचारियों के कंप्यूटर पर नया ट्रैकिंग सॉफ्टवेयर इंस्टॉल कर रही है। यह सॉफ्टवेयर माउस मूवमेंट, क्लिक और कीस्ट्रोक्स को कैप्चर करेगा। कंपनी इस डेटा का इस्तेमाल उसके एआई मॉडल्स को ट्रेन करने के लिए किया जाएगा। मेटा दरअसल ऐसे एआई एजेंट्स डवलप कर रही है जो जरूरी टास्क ऑटोनोमस (बिना इंसानी दखल) के कर सकें। इस टूल को मॉडल कैपेबिलिटी इनिशिएटिव (एमसीआई) कहा जाता है, यह जॉब से संबधित एप और वेबसाइट्स पर चलेगा और कभी-कभी स्क्रीन पर दिख रहे कंटेंट के स्नैपशॉट भी लेगा। इस पहल के जरिए कंपनी की कोशिश एआई मॉडल्स को उन क्षेत्रों में बेहतर बनाना है, जहां वे अभी भी इंसानों की तरह कंप्यूटर के साथ इंटरैक्ट करने के मामले में पिछड जाते है। एआई मॉडल्स ड्रॉपडाउन मेन्यू से विकल्प चुनने या कीबोर्ड शॉर्टकट्स का इस्तेमाल करन के मामले में फिसड्डी साबित हो रहे हैं। इस तरह के चैलेंज को साधने के लिए कंपनी अपने कर्मचारियों के इनपुट को कैप्चर करना चाहती है। मेटा अपने वर्कफ्लो में एआई को इंटीग्रेट कर रही है और वर्कफोर्स को टेक्नोलॉजी के अनुरूप ढाल रही है। कंपनी का मानना है कि इससे ऑपरेशंस अधिक कुशल (एफिशिएंट) बनेंगे। मेटा के चीफ टेक्नोलॉजी ऑफिसर एंड्रू बॉसवर्थ के अनुसार कंपनी एआई फॉर वर्क पहल के तहत आंतरिक डेटा कलेक्शन को और बढ़ाएगी। कंपनी ऐसे एआई एजेंट तैयार कर रही है जो काम करने का जिम्मा ज्यादातर एआई एजेंट्स का होगा वहीं टीम मेंबर उन्हें कमांड देंगे, उनके काम को रिव्यू करेेंगे। एजेंट खुद ही यह बता देंगे कि उन्हें किस जगह या किस टास्क में टीम मेंबर की मदद चाहिए। मेटा की प्रवक्ता एंडी स्टोन का कहना है कि एमसीआई के जरिए कैप्चर किए गए डेटा का उपयोग एआई मॉडल की ट्रेनिंग के लिए किया जाएगा  ना कि कर्मचारियों की परफॉर्मेन्स अप्रेजल के लिए।  टेक सैक्टर में मानव कर्मचारियों द्वारा किए जाने वाले कार्यों को ऑटोमेट करने की ऐसी कोशिश कई बड़ी अमेरिकी कंपनियां कर रही हैं। एआई टूल्स खुद ही एप बनाने से लेकर बड़े डेटा को व्यवस्थित करने जैसे जटिल काम कर सकते हैं। इसका असर जॉब्स पर पड़ रहा है। मेटा ने 20 मई से अपने 10 परसेंट कर्मचारियों की छंटनी करने की बात कही है। अमेजन ने हाल के महीनों में लगभग 30 हजार कॉर्पोरेट कर्मचारियों की छंटनी की है, जबकि फरवरी में फिनटेक कंपनी क्चद्यशष्द्म ने लगभग आधे कर्मचारियों को निकाल दिया। मेटा अपने कर्मचारियों को कोडिंग और अन्य कार्यों के लिए एआई एजेंट्स का ज्यादा इस्तेमाल करने के लिए कह रहा है। कंपनी ने कई जॉब रोल्स के बीच के अंतर को खत्म कर एआई बिल्डर नामक एक नया सामान्य पद भी बनाया है। पिछले महीने, कंपनी ने अप्लाइड एआई (एएआई) इंजीनियरिंग टीम बनाई, जो मेटा के एआई मॉडल्स की कोडिंग क्षमता को बेहतर करेगी और ऐसे एआई एजेंट्स डवलप करेगी जो भविष्य में प्रोडक्ट्स और इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने, टेस्ट करने और लॉन्च करने का अधिकांश काम खुद कर सकेंगे। येल यूनिवर्सिटी की लॉ प्रोफेसर इफीओमा अजुनावा के अनुसार, कंप्यूटर लॉगिंग और स्क्रीनशॉट तकनीक का इस्तेमाल पहले कंपनियां कर्मचारियों की गलत गतिविधियों को पकडऩे के लिए करती थीं। कीस्ट्रोक लॉगिंग कर्मचारियों की निगरानी नए लेवल पर पहुंच जाएगी। हालांकि टोरंटो की यॉर्क यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर वेलेरियो डी स्टीफानो के अनुसार, यूरोप में ऐसी मॉनिटरिंग पर सख्त प्रतिबंध हैं। इटली जैसे देशों में कर्मचारियों की इलेक्ट्रॉनिक निगरानी अवैध है, जबकि जर्मनी में केवल गंभीर आपराधिक संदेह के मामलों में ही कीस्ट्रोक लॉगिंग की अनुमति है। इसे यूरोप के जनरल डेटा प्रोटेक्शन रेगुलेशन (जीडीपीआर) का उल्लंघन माना जा सकता है।

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मेटा ऐसे कैसे ट्रेन करेगी एआई डेटा

 फेसबुक, इंस्टाग्राम और वॉट्सएप वाली कंपनी मेटा एआई ट्रेनिंग डेटा के लिए क्या-क्या जुगत लगा रहा है। खबर है कि कंपनी अमेरिका में कर्मचारियों के कंप्यूटर पर नया ट्रैकिंग सॉफ्टवेयर इंस्टॉल कर रही है। यह सॉफ्टवेयर माउस मूवमेंट, क्लिक और कीस्ट्रोक्स को कैप्चर करेगा। कंपनी इस डेटा का इस्तेमाल उसके एआई मॉडल्स को ट्रेन करने के लिए किया जाएगा। मेटा दरअसल ऐसे एआई एजेंट्स डवलप कर रही है जो जरूरी टास्क ऑटोनोमस (बिना इंसानी दखल) के कर सकें। इस टूल को मॉडल कैपेबिलिटी इनिशिएटिव (एमसीआई) कहा जाता है, यह जॉब से संबधित एप और वेबसाइट्स पर चलेगा और कभी-कभी स्क्रीन पर दिख रहे कंटेंट के स्नैपशॉट भी लेगा। इस पहल के जरिए कंपनी की कोशिश एआई मॉडल्स को उन क्षेत्रों में बेहतर बनाना है, जहां वे अभी भी इंसानों की तरह कंप्यूटर के साथ इंटरैक्ट करने के मामले में पिछड जाते है। एआई मॉडल्स ड्रॉपडाउन मेन्यू से विकल्प चुनने या कीबोर्ड शॉर्टकट्स का इस्तेमाल करन के मामले में फिसड्डी साबित हो रहे हैं। इस तरह के चैलेंज को साधने के लिए कंपनी अपने कर्मचारियों के इनपुट को कैप्चर करना चाहती है। मेटा अपने वर्कफ्लो में एआई को इंटीग्रेट कर रही है और वर्कफोर्स को टेक्नोलॉजी के अनुरूप ढाल रही है। कंपनी का मानना है कि इससे ऑपरेशंस अधिक कुशल (एफिशिएंट) बनेंगे। मेटा के चीफ टेक्नोलॉजी ऑफिसर एंड्रू बॉसवर्थ के अनुसार कंपनी एआई फॉर वर्क पहल के तहत आंतरिक डेटा कलेक्शन को और बढ़ाएगी। कंपनी ऐसे एआई एजेंट तैयार कर रही है जो काम करने का जिम्मा ज्यादातर एआई एजेंट्स का होगा वहीं टीम मेंबर उन्हें कमांड देंगे, उनके काम को रिव्यू करेेंगे। एजेंट खुद ही यह बता देंगे कि उन्हें किस जगह या किस टास्क में टीम मेंबर की मदद चाहिए। मेटा की प्रवक्ता एंडी स्टोन का कहना है कि एमसीआई के जरिए कैप्चर किए गए डेटा का उपयोग एआई मॉडल की ट्रेनिंग के लिए किया जाएगा  ना कि कर्मचारियों की परफॉर्मेन्स अप्रेजल के लिए।  टेक सैक्टर में मानव कर्मचारियों द्वारा किए जाने वाले कार्यों को ऑटोमेट करने की ऐसी कोशिश कई बड़ी अमेरिकी कंपनियां कर रही हैं। एआई टूल्स खुद ही एप बनाने से लेकर बड़े डेटा को व्यवस्थित करने जैसे जटिल काम कर सकते हैं। इसका असर जॉब्स पर पड़ रहा है। मेटा ने 20 मई से अपने 10 परसेंट कर्मचारियों की छंटनी करने की बात कही है। अमेजन ने हाल के महीनों में लगभग 30 हजार कॉर्पोरेट कर्मचारियों की छंटनी की है, जबकि फरवरी में फिनटेक कंपनी क्चद्यशष्द्म ने लगभग आधे कर्मचारियों को निकाल दिया। मेटा अपने कर्मचारियों को कोडिंग और अन्य कार्यों के लिए एआई एजेंट्स का ज्यादा इस्तेमाल करने के लिए कह रहा है। कंपनी ने कई जॉब रोल्स के बीच के अंतर को खत्म कर एआई बिल्डर नामक एक नया सामान्य पद भी बनाया है। पिछले महीने, कंपनी ने अप्लाइड एआई (एएआई) इंजीनियरिंग टीम बनाई, जो मेटा के एआई मॉडल्स की कोडिंग क्षमता को बेहतर करेगी और ऐसे एआई एजेंट्स डवलप करेगी जो भविष्य में प्रोडक्ट्स और इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने, टेस्ट करने और लॉन्च करने का अधिकांश काम खुद कर सकेंगे। येल यूनिवर्सिटी की लॉ प्रोफेसर इफीओमा अजुनावा के अनुसार, कंप्यूटर लॉगिंग और स्क्रीनशॉट तकनीक का इस्तेमाल पहले कंपनियां कर्मचारियों की गलत गतिविधियों को पकडऩे के लिए करती थीं। कीस्ट्रोक लॉगिंग कर्मचारियों की निगरानी नए लेवल पर पहुंच जाएगी। हालांकि टोरंटो की यॉर्क यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर वेलेरियो डी स्टीफानो के अनुसार, यूरोप में ऐसी मॉनिटरिंग पर सख्त प्रतिबंध हैं। इटली जैसे देशों में कर्मचारियों की इलेक्ट्रॉनिक निगरानी अवैध है, जबकि जर्मनी में केवल गंभीर आपराधिक संदेह के मामलों में ही कीस्ट्रोक लॉगिंग की अनुमति है। इसे यूरोप के जनरल डेटा प्रोटेक्शन रेगुलेशन (जीडीपीआर) का उल्लंघन माना जा सकता है।


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