भारत के 5 करोड़ व्यापारियों ने 2 अक्टूबर को ‘नो यूपीआई डे’ रखकर यूपीआई पर लगाये गये एमडीआर का विरोध जताया था और यह कॉल बीयूवीएम द्वारा दिया गया था। इसी को मद्देनजर रखते हुए 15 अक्टूबर से मर्चेंट डिस्काउण्ट रेट (एमडीआर) यूपीआई पर प्रभावी होने जा रही थी को केन्द्र सरकार ने देश के व्यापारियों में फैले जबरदस्त विरोध को देखते हुए इसे स्थगित किया है। भारतीय उद्योग व्यापार मण्डल इसका स्वागत करता है। संस्था ने पुन: यूपीआई लेनदेन पर प्रस्तावित मर्चेन्ट डिस्काउण्ट रेट (एमडीआर) को स्थगित करने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण को धन्यवाद दिया है, जिन्होंने 5 करोड़ व्यापारियों की बात सुनकर यूपीआई पर प्रस्तावित एमडीआर को स्थगित किया है। बीयूवीएम राष्ट्रीय अध्यक्ष बाबूलाल गुप्ता ने कहा कि त्योहारी और विवाह सीजन व्यापारियों के लिए कारोबार की दृष्टि से महत्वपूर्ण होता है। ऐसे समय में डिजिटल भुगतान पर अतिरिक्त शुल्क लगने से कम मार्जिन पर काम करने वाले व्यापारियों की लागत बढ़ सकती थी। शुल्क स्थगित करने से व्यापारियों को राहत मिलेगी और डिजिटल भुगतान व्यवस्था के प्रति उनका विश्वास मजबूत होगा। इस आदेश को स्थगित करने के बजाय समाप्त किया जाना चाहिये। गुप्ता ने अपनी चिंता जाहिर करते हुए कहा कि एनपीसीआई यूपीआई के अन्तर्गत एक ट्रांजेक्शन पर ही 100 रुपये पर 40 पैसा वसूल करता है जबकि बैंक 100 रुपये उधार देकर उधार लेने वाले को कई ट्रांजेक्शन करने की स्वतंत्रता देती है और ब्याज के रूप में केवल 80 पैसा प्रति सौ रुपये प्रतिमाह वसूलती है। यहां यह उल्लेख करना आवश्यक है कि एमडीआर बैंकों द्वारा दी गई सेवाओं के लिये ही वसूला जा रहा है।