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Daily Business Newspaper | A Knowledge Powerhouse in Hindi

07-10-2026

टेक्सटाइल इंडस्ट्री संकट के दौर में

  •  देश के प्रमुख टेक्सटाइल प्रोडक्शन सेंटर्स में शामिल भीलवाड़ा की टेक्सटाइल इंडस्ट्री इन दिनों गंभीर संकट के दौर से गुजर रही है। एक ओर धागे (यार्न) की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है, वहीं कपड़े की डिमांड और उठाव में अपेक्षित वृद्धि नहीं होने से मार्केट में असंतुलन की स्थिति बन गई है। टेक्सटाइल इंडस्ट्री सेक्टर का मानना है कि वर्तमान परिस्थितियों ने प्रोडक्शन कॉस्ट और बिक्री के बीच का अंतर इतना बढ़ा दिया है कि कई युनिट्स के लिए वर्तमान हालात में ऑपरेट करना मुश्किल होता जा रहा है। ऐसी स्थिति में वर्तमान प्रोडक्शन को कम करने के अतिरिक्त और कोई विकल्प दिखाई नहीं दे रहा है। टेक्सटाइल मार्केट के हालात को देखते हुए इंडस्ट्री को ऑपरेट करते हुए प्रोडक्शन कम करने के लिए प्रत्येक रविवार को प्रोडक्शन नहीं करने का कठोर निर्णय लेना पड़ रहा है। स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि प्रोडक्शन घटाने का निर्णय लिया है। यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है जब आगामी फेस्टिव सीजन और लगातार होने वाले शादी समारोहों के कारण टेक्सटाइल मार्केट में डिमांड बढऩे की उम्मीद लगाई जाती है। सामान्यत: यह अवधि टेक्सटाइल इंडस्ट्री के लिए कारोबार बढ़ाने और मार्केट में नई ऊर्जा लाने का अवसर माना जाता है, लेकिन वर्तमान हालात ने इंडस्ट्री की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। भीलवाड़ा टेक्सटाइल ट्रेड फेडरेशन के अध्यक्ष एवं सांसद दामोदर अग्रवाल, सिंथेटिक वीविंग मिल्स एसोसिएशन के अध्यक्ष राजेश बालर तथा लघु उद्योग भारती के महेश हुरकट ने भीलवाड़ा के प्रमुख समाचार पत्रों में एक संयुक्त अपील जारी कर वीविंग युनिट्स से प्रत्येक रविवार को अपनी यूनिट बंद रखने का आह्वान किया है। एसोसिएशन्स का कहना है कि वर्तमान परिस्थितियों में प्रोडक्शन और डिमांड के बीच संतुलन स्थापित करने तथा इंडस्ट्री को राहत देने के लिए यह कदम आवश्यक हो गया है। एसोसिएशन्स के इस निर्णय से अक्टूबर माह में करीब 25 प्रतिशत प्रोडक्शन कम हो जाएगा ऐसा मानना है।  संकट केवल वीविंग सेक्टर तक सीमित नहीं है, बल्कि कपड़ा प्रोसेसिंग युनिट्स भी बढ़ती कॉस्टिंग के दबाव में हैं। इंडस्ट्री से जुड़े सूत्रों के अनुसार कोयला, डीजल और इंडस्ट्री से जुड़े केमिकल्स की कीमतों में लगातार वृद्धि हो रही है, जिससे प्रोसेसिंग की लागत तेजी से बढ़ी है। इसके विपरीत प्रोसेसिंग की वर्तमान दरों में कोई उल्लेखनीय बढ़ोतरी नहीं होने से कई युनिट्स को घाटे में काम करना पड़ रहा है। परिणामस्वरूप अनेक प्रोसेस हाउसों ने अपना प्रोडक्शन सीमित करना शुरू कर दिया है तथा कुछ युनिट्स ने कैपेसिटी से कम स्तर पर संचालन का निर्णय लिया है। इंडस्ट्री से जुड़े कारोबारियों का कहना हैं कि यदि रॉ-मटेरियल की कीमतों में राहत नहीं मिली और मार्केट में डिमांड में सुधार नहीं हुआ तो आने वाले समय में टेक्सटाइल इंडस्ट्री के सामने और बड़ी चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं। यह निर्णय एक माह के लिए लिया गया है। भीलवाड़ा की टेक्सटाइल इंडस्ट्री हजारों लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार प्रदान करती है, ऐसे में इंडस्ट्री की वर्तमान स्थिति को लेकर व्यापारिक और औद्योगिक संगठनों में भी चिंता का माहौल बना हुआ है। धागे की बढ़ती कीमतें और मार्केट में कपड़े की प्रोडक्शन की तुलना में घटती डिमांड के चलते-लगातार प्रोडक्शन कम होने तथा आने वाले दिनों में फेस्टिव एवं शादियों के सीजन के बावजूद टेक्सटाइल नगरी की मुख्य आर्थिक धुरी टेक्सटाइल इंडस्ट्री लम्बे समय से संकट के दौर से गुजर रही है।

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टेक्सटाइल इंडस्ट्री संकट के दौर में

 देश के प्रमुख टेक्सटाइल प्रोडक्शन सेंटर्स में शामिल भीलवाड़ा की टेक्सटाइल इंडस्ट्री इन दिनों गंभीर संकट के दौर से गुजर रही है। एक ओर धागे (यार्न) की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है, वहीं कपड़े की डिमांड और उठाव में अपेक्षित वृद्धि नहीं होने से मार्केट में असंतुलन की स्थिति बन गई है। टेक्सटाइल इंडस्ट्री सेक्टर का मानना है कि वर्तमान परिस्थितियों ने प्रोडक्शन कॉस्ट और बिक्री के बीच का अंतर इतना बढ़ा दिया है कि कई युनिट्स के लिए वर्तमान हालात में ऑपरेट करना मुश्किल होता जा रहा है। ऐसी स्थिति में वर्तमान प्रोडक्शन को कम करने के अतिरिक्त और कोई विकल्प दिखाई नहीं दे रहा है। टेक्सटाइल मार्केट के हालात को देखते हुए इंडस्ट्री को ऑपरेट करते हुए प्रोडक्शन कम करने के लिए प्रत्येक रविवार को प्रोडक्शन नहीं करने का कठोर निर्णय लेना पड़ रहा है। स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि प्रोडक्शन घटाने का निर्णय लिया है। यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है जब आगामी फेस्टिव सीजन और लगातार होने वाले शादी समारोहों के कारण टेक्सटाइल मार्केट में डिमांड बढऩे की उम्मीद लगाई जाती है। सामान्यत: यह अवधि टेक्सटाइल इंडस्ट्री के लिए कारोबार बढ़ाने और मार्केट में नई ऊर्जा लाने का अवसर माना जाता है, लेकिन वर्तमान हालात ने इंडस्ट्री की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। भीलवाड़ा टेक्सटाइल ट्रेड फेडरेशन के अध्यक्ष एवं सांसद दामोदर अग्रवाल, सिंथेटिक वीविंग मिल्स एसोसिएशन के अध्यक्ष राजेश बालर तथा लघु उद्योग भारती के महेश हुरकट ने भीलवाड़ा के प्रमुख समाचार पत्रों में एक संयुक्त अपील जारी कर वीविंग युनिट्स से प्रत्येक रविवार को अपनी यूनिट बंद रखने का आह्वान किया है। एसोसिएशन्स का कहना है कि वर्तमान परिस्थितियों में प्रोडक्शन और डिमांड के बीच संतुलन स्थापित करने तथा इंडस्ट्री को राहत देने के लिए यह कदम आवश्यक हो गया है। एसोसिएशन्स के इस निर्णय से अक्टूबर माह में करीब 25 प्रतिशत प्रोडक्शन कम हो जाएगा ऐसा मानना है।  संकट केवल वीविंग सेक्टर तक सीमित नहीं है, बल्कि कपड़ा प्रोसेसिंग युनिट्स भी बढ़ती कॉस्टिंग के दबाव में हैं। इंडस्ट्री से जुड़े सूत्रों के अनुसार कोयला, डीजल और इंडस्ट्री से जुड़े केमिकल्स की कीमतों में लगातार वृद्धि हो रही है, जिससे प्रोसेसिंग की लागत तेजी से बढ़ी है। इसके विपरीत प्रोसेसिंग की वर्तमान दरों में कोई उल्लेखनीय बढ़ोतरी नहीं होने से कई युनिट्स को घाटे में काम करना पड़ रहा है। परिणामस्वरूप अनेक प्रोसेस हाउसों ने अपना प्रोडक्शन सीमित करना शुरू कर दिया है तथा कुछ युनिट्स ने कैपेसिटी से कम स्तर पर संचालन का निर्णय लिया है। इंडस्ट्री से जुड़े कारोबारियों का कहना हैं कि यदि रॉ-मटेरियल की कीमतों में राहत नहीं मिली और मार्केट में डिमांड में सुधार नहीं हुआ तो आने वाले समय में टेक्सटाइल इंडस्ट्री के सामने और बड़ी चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं। यह निर्णय एक माह के लिए लिया गया है। भीलवाड़ा की टेक्सटाइल इंडस्ट्री हजारों लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार प्रदान करती है, ऐसे में इंडस्ट्री की वर्तमान स्थिति को लेकर व्यापारिक और औद्योगिक संगठनों में भी चिंता का माहौल बना हुआ है। धागे की बढ़ती कीमतें और मार्केट में कपड़े की प्रोडक्शन की तुलना में घटती डिमांड के चलते-लगातार प्रोडक्शन कम होने तथा आने वाले दिनों में फेस्टिव एवं शादियों के सीजन के बावजूद टेक्सटाइल नगरी की मुख्य आर्थिक धुरी टेक्सटाइल इंडस्ट्री लम्बे समय से संकट के दौर से गुजर रही है।


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