राजस्थान सरकार टोंक जिले में 900 मेगावाट क्षमता का पंप्ड स्टोरेज पावर प्रोजेक्ट विकसित करने की तैयारी कर रही है। इसका उद्देश्य सौर और पवन ऊर्जा से बनने वाली अतिरिक्त बिजली को स्टोर करना और मांग बढऩे पर उसकी आपूर्ति करना है। राज्य में नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता बढऩे के साथ बिजली उत्पादन और खपत के बीच संतुलन बनाने के लिए इस तरह की परियोजनाएं अहम हो गई हैं। प्रस्तावित रामपुरा परियोजना की कुल भंडारण क्षमता 5,400 मेगावाट-घंटे होगी। इससे यह संयंत्र पूरी क्षमता पर छह घंटे तक लगातार 900 मेगावाट बिजली उपलब्ध करा सकेगा। यह राजस्थान की दूसरी पंप्ड स्टोरेज परियोजना होगी। ऐसे काम करेगा पंप्ड स्टोरेज प्लांट : इस परियोजना में 300 मेगावाट की तीन रिवर्सिबल पंप-टर्बाइन इकाइयां लगाई जाएंगी। जब सौर और पवन ऊर्जा से बिजली की उपलब्धता मांग से ज्यादा होगी, तब अतिरिक्त बिजली का इस्तेमाल पानी को निचले जलाशय से ऊपरी जलाशय तक पंप करने में किया जाएगा। जब बिजली की मांग बढ़ेगी, तब ऊपरी जलाशय से पानी छोड़ा जाएगा। पानी टर्बाइन चलाकर बिजली पैदा करेगा और फिर निचले जलाशय में पहुंच जाएगा। इस तरह पानी का दोबारा इस्तेमाल किया जा सकेगा। इस व्यवस्था से दिन में उपलब्ध अतिरिक्त नवीकरणीय ऊर्जा को बाद में इस्तेमाल के लिए सुरक्षित रखा जा सकेगा। खासकर उन घंटों में, जब बिजली की मांग ज्यादा हो या सौर ऊर्जा का उत्पादन घट जाए, तब यह परियोजना ग्रिड को बिजली उपलब्ध कराने में मदद करेगी। बिसलपुर संरक्षण रिजर्व में बनेगी परियोजना : परियोजना मूल्यांकन रिपोर्ट के मुताबिक, इसके जलाशय, भूमिगत बिजलीघर और पानी पहुंचाने वाली व्यवस्था बिसलपुर संरक्षण रिजर्व के भीतर स्थित होंगे। इसलिए परियोजना के विकास के लिए जरूरी वैधानिक मंजूरियां अहम होंगी। सरकार इस परियोजना के लिए प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया के जरिए डेवलपर का चयन करेगी। इसके लिए बिल्ड-ओन-ऑन-ऑपरेट-ट्रांसफर (बीओओटी) मॉडल प्रस्तावित है। बिजली आपूर्ति शुरू होने की निर्धारित तारीख से समझौते की अवधि 40 साल होगी। चयनित डवलपर निर्माण, संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी संभालेगा। परियोजना दस्तावेजों में निर्धारित प्रावधानों के अनुसार भूमि से जुड़े खर्च और जरूरी वैधानिक मंजूरियां भी उसकी जिम्मेदारी का हिस्सा होंगी। ट्रांसमिशन नेटवर्क भी जरूरी : परियोजना से बिजली को ग्रिड तक पहुंचाने के लिए अलग ट्रांसमिशन इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरत होगी। प्रस्तावित 400 किलोवोल्ट का फागी ग्रिड सबस्टेशन परियोजना स्थल से करीब 90 किलोमीटर दूर है। बोली प्रक्रिया के तहत प्री-बिड बैठक 27 अक्टूबर को निर्धारित है। इच्छुक कंपनियां 30 नवंबर तक अपनी बोलियां जमा कर सकेंगी, जबकि तकनीकी बोलियां 1 दिसंबर को खोली जाएंगी। नवीकरणीय ऊर्जा को मिलेगा सहारा : सौर और पवन ऊर्जा का उत्पादन मौसम और समय के अनुसार बदलता रहता है। कई बार बिजली उत्पादन ज्यादा होता है, जबकि मांग कम रहती है। इसके विपरीत, शाम और रात के समय मांग बढऩे पर सौर ऊर्जा का उत्पादन उपलब्ध नहीं रहता। पंप्ड स्टोरेज परियोजनाएं इस अंतर को कम करने में मदद करती हैं। अतिरिक्त बिजली से पानी को ऊंचाई पर पहुंचाकर ऊर्जा स्टोर की जाती है और जरूरत के समय उसी पानी से बिजली बनाई जाती है। राजस्थान की प्रस्तावित रामपुरा परियोजना का उद्देश्य भी राज्य के बढ़ते नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन को बेहतर तरीके से ग्रिड में शामिल करना और पीक आवर्स में बिजली की उपलब्धता मजबूत करना है।