बीकानेर के करणी इंडस्ट्रियल एरिया और करणी एक्सटेंशन में पर्यावरण नियमों के पालन को लेकर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने सख्त रुख अपनाया है। हृत्रञ्ज ने रीको को पर्यावरण क्लीयरेंस की शर्तों का पूरी तरह पालन करने और जरूरी Consent to Establish (CTE) तथा Consent to Operate (CTO) लेने के निर्देश दिए हैं। मामले में ट्रिब्यूनल के सामने यह सामने आया कि करणी एक्सटेंशन का शुरुआती Consent to Establish 30 नवंबर 2014 तक ही वैध था और इसके बाद रीको ने इसका रिन्यूअल या नया Consent नहीं लिया। ज्वाइंट कमेटी की जांच में करणी एक्सटेंशन में 157 इंडस्ट्रियल प्लॉट पाए गए, जिनमें से 148 प्लॉट 64 इंडस्ट्रीज को दिए जा चुके थे। हालांकि, जांच के दौरान इंडस्ट्रियल एरिया में कई जरूरी पर्यावरण सुविधाएं पूरी नहीं मिलीं। ष्टश्वञ्जक्क के लिए जमीन चिन्हित थी, लेकिन ष्टश्वञ्जक्क और एफ्लुएंट कन्वेयंस सिस्टम का काम शुरू नहीं हुआ था। वहीं, कई जगह वेस्ट वाटर जमा मिला और सॉलिड वेस्ट भी सडक़ किनारे पड़ा पाया गया। जांच में यह भी सामने आया कि करणी एक्सटेंशन में वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम की व्यवस्था नहीं थी और प्रस्तावित ग्रीन बेल्ट के विकास के लिए भी जरूरी काम नहीं हुआ था। दो बोरवेल से पानी सप्लाई की जा रही थी, लेकिन पानी की मात्रा मापने के लिए मीटर नहीं लगे थे और ग्राउंड वाटर निकालने के लिए State Pollution Control Board की जरूरी अनुमति भी नहीं ली गई थी। पर्यावरण नियमों को लेकर सबसे बड़ा मुद्दा वेस्ट वाटर का रहा। कमेटी की रिपोर्ट के मुताबिक इंडस्ट्रियल एरिया में जमा पानी में घरेलू और इंडस्ट्रियल एफ्लुएंट शामिल था। पहले से बने ड्रेन्स का पानी भी इन्हीं जगहों पर पहुंच रहा था। हृत्रञ्ज के सामने यह भी आया कि ष्टश्वञ्जक्क और स्ञ्जक्क का काम लंबे समय से पूरा नहीं हुआ था।
हृत्रञ्ज ने अब रीको को ष्टश्वञ्जक्क का निर्माण पूरा कर उसे अधिकतम छह महीने के भीतर चालू करने का निर्देश दिया है। साथ ही हर इंडस्ट्रियल यूनिट के पास अपना श्वञ्जक्क/स्ञ्जक्क होना चाहिए या उसे ष्टश्वञ्जक्क से जोड़ा जाना चाहिए। Central Ground Water Authority और CETP को भी निर्देश दिए गए हैं कि जरूरी ष्टशठ्ठह्यद्गठ्ठह्ल और हृह्रष्ट के बिना किसी यूनिट या रीको को ऑपरेशन की अनुमति नहीं दी जाए। ट्रिब्यूनल ने पर्यावरणीय मुआवजे पर भी सख्ती दिखाई है। State Pollution Control Board को उल्लंघन की तारीख से ष्टश्वञ्जक्क के चालू होने तक पर्यावरणीय मुआवजा वसूलने का निर्देश दिया गया है। यदि रीको भुगतान नहीं करता है तो संबंधित जिला कलेक्टर के जरिए इसकी रिकवरी की जाएगी और राशि पर्यावरण से जुड़े कामों के लिए जमा होगी। हृत्रञ्ज ने भूजल को लेकर भी साफ निर्देश दिए हैं। बिना ष्टत्रङ्ख्र की हृह्रष्ट के किसी अथॉरिटी या रीको को ग्राउंड वाटर निकालने की अनुमति नहीं होगी। इसके अलावा राजस्थान सरकार के पर्यावरण विभाग को एक उच्चस्तरीय कमेटी बनाने को कहा गया है, जिसमें पर्यावरण, इंडस्ट्रीज, State Pollution Control Board और ष्टत्रङ्ख्र के अधिकारी शामिल होंगे। यह कमेटी ष्टश्वञ्जक्क, ग्रीन कवर, वेस्ट वाटर ट्रीटमेंट, रेन वाटर हार्वेस्टिंग, सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट और दूसरे पर्यावरण नियमों के पालन की निगरानी करेगी। हृत्रञ्ज का यह आदेश ऐसे समय आया है जब करणी इंडस्ट्रियल एरिया में लंबे समय से वेस्ट वाटर जमा होने और पर्यावरण नियमों के पालन को लेकर सवाल उठ रहे थे। ट्रिब्यूनल ने साफ किया है कि इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट के साथ पर्यावरण नियमों का पालन भी जरूरी है और जरूरी ष्टशठ्ठह्यद्गठ्ठह्ल, ट्रीटमेंट प्लांट तथा वेस्ट वाटर मैनेजमेंट के बिना इंडस्ट्रियल ऑपरेशन की अनुमति नहीं दी जा सकती।