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Daily Business Newspaper | A Knowledge Powerhouse in Hindi

16-10-2026

कमजोर फसल और महंगे रॉ मैटीरियल से गजक-पापड़ी कारोबार पर लागत का दबाव

  •  कमजोर बारिश और तिल की फसल प्रभावित होने से इस बार गजक-पापड़ी कारोबार का लागत गणित बिगडऩे लगा है। सर्दियों में डिमांड बढऩे से पहले ही प्रमुख कच्चे माल तिल, गुड़ और चीनी के दाम पिछले साल के मुकाबले ऊंचे स्तर पर पहुंच गए हैं। मूंगफली के मजबूत भाव, गैस-डीजल की बढ़ती लागत और श्रम खर्च में इजाफे ने निर्माताओं की चिंता बढ़ा दी है। कारोबारियों के मुताबिक, शुरुआती दौर में तैयार माल के भाव गत सीजन के स्तर पर रखने का प्रयास रहेगा, लेकिन लागत का दबाव बना रहा तो इस बार गजक-पापड़ी के दाम करीब 10 प्रतिशत तक बढ़ सकते हैं। तिल 245 रुपए किलो, गुड़-चीनी भी महंगे : गजक-पापड़ी निर्माण में इस्तेमाल होने वाले प्रमुख कच्चे माल की कीमतों में इस बार उल्लेखनीय तेजी है। कारोबारियों के अनुसार, प्रीमियम क्वालिटी का गुड़ फिलहाल 59 से 63 रुपए प्रति किलो बिक रहा है, जबकि गत वर्ष इसका भाव करीब 50 रुपए प्रति किलो था। इसमें आगे भी लगभग 15 रुपए प्रति किलो तक तेजी की आशंका जताई जा रही है। इसी तरह चीनी के भाव पिछले साल के करीब 44 रुपए प्रति किलो से बढक़र 58 रुपए प्रति किलो तक पहुंच गए हैं। तिल भी 200 से 225 रुपए प्रति किलो के मुकाबले अब करीब 245 रुपए प्रति किलो मिल रहा है। कच्चे माल की इन कीमतों का सीधा असर गजक-पापड़ी की उत्पादन लागत पर पडऩा तय माना जा रहा है।स्थानीय आवक कमजोर, बाहर से मंगाना पड़ेगा तिल : मंडी कारोबारी मोतीलाल सेठिया के अनुसार, बीकानेर में फिलहाल तिल की स्थानीय आवक नहीं है। कोलायत क्षेत्र में तिल की बिजाई होती है, लेकिन इस बार बारिश की कमी के कारण फसल प्रभावित हुई है। ऐसे में गजक-पापड़ी निर्माताओं को तिल की जरूरत पूरी करने के लिए अलवर और भरतपुर जैसे क्षेत्रों पर निर्भर रहना पड़ सकता है। जैसलमेर, फलोदी और मोहनगढ़ से भी तिल की आपूर्ति होती है, लेकिन वहां से सीजन के दौरान भी सीमित मात्रा में, लगभग 10 से 20 बोरी तक ही माल आने की बात कारोबारी बता रहे हैं। स्थानीय उपलब्धता कम रहने से बाहर की मंडियों से खरीद पर निर्भरता बढ़ेगी। इससे परिवहन लागत और खरीद भाव, दोनों का असर कारोबार पर पड़ सकता है। मूंगफली में मजबूती, आवक बढऩे का इंतजार : सेठिया के मुताबिक, बीकानेर मंडी में फिलहाल प्रतिदिन करीब 5,000 बोरी मूंगफली की आवक हो रही है। इसके भाव 65 रुपए प्रति किलो से लेकर 78-80 रुपए प्रति किलो तक चल रहे हैं। सीजन में दीपावली के आसपास बेहतर क्वालिटी की मूंगफली की आवक बढऩे की उम्मीद है। नवरात्र के बाद खेतों से नई मूंगफली निकलनी शुरू होगी। कारोबारियों का अनुमान है कि आगे मूंगफली के भाव में 400 से 500 रुपए प्रति क्विंटल तक की तेजी आ सकती है। बेहतर क्वालिटी की मूंगफली के भाव 7,000 रुपए प्रति क्विंटल से नीचे रहने की संभावना कम जताई जा रही है। उनका कहना है कि किसानों को इससे कम भाव मिलने पर बिक्री के लिए बाजार में माल लाने में रुचि कम रह सकती है। दीपावली के बाद गुजरात के कारोबारी, स्टॉकिस्ट और मिल संचालकों की सक्रियता भी बढऩे की उम्मीद है। बीकानेर में करीब 100 गोटा और ऑयल मिलें होने से मूंगफली की औद्योगिक मांग भी बाजार को सहारा दे सकती है। इसी आधार पर कारोबारी फिलहाल बड़ी मंदी की संभावना कम मान रहे हैं। बड़ा बाजार स्थित बीकानेर के प्रमुख गजक-पापड़ी निर्माता मनोज तंवर के अनुसार, इस कारोबार का मुख्य सीजन लगभग तीन महीने का रहता है। तिल, गुड़, चीनी और मूंगफली जैसे कच्चे माल की खरीद के लिए दशहरे पर मुहूर्त किया जाएगा। फिलहाल निर्माता तैयार माल के भाव पिछले साल के स्तर पर रखने की कोशिश करेंगे। इसके बाद बाजार में तेजी-मंदी और कच्चे माल की लागत के अनुसार कीमतों में बदलाव किया जाएगा। तंवर का कहना है कि बाजार में फिलहाल उठाव कमजोर है और कारोबारी मौजूदा परिस्थितियों में खरीद को लेकर सतर्क हैं। लागत बढऩे के बावजूद तुरंत कीमतें बढ़ाना आसान नहीं है, इसलिए निर्माता खरीद से पहले बाजार की चाल का इंतजार कर रहे हैं। हालांकि, गैस, डीजल और श्रम लागत में वृद्धि को देखते हुए इस सीजन में गजक-पापड़ी के भाव पिछले साल की तुलना में करीब 10 प्रतिशत अधिक रह सकते हैं। कारोबार का समीकरण : इस बार गजक-पापड़ी बाजार में मांग के साथ-साथ कच्चे माल की उपलब्धता, खरीद के समय के भाव और निर्माताओं की लागत निर्णायक होगी। कमजोर स्थानीय तिल आपूर्ति और मूंगफली में संभावित तेजी के बीच कारोबारियों की नजर अब दशहरे की खरीद और दीपावली के आसपास मंडियों में आने वाली नई फसल पर टिकी है।

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कमजोर फसल और महंगे रॉ मैटीरियल से गजक-पापड़ी कारोबार पर लागत का दबाव

 कमजोर बारिश और तिल की फसल प्रभावित होने से इस बार गजक-पापड़ी कारोबार का लागत गणित बिगडऩे लगा है। सर्दियों में डिमांड बढऩे से पहले ही प्रमुख कच्चे माल तिल, गुड़ और चीनी के दाम पिछले साल के मुकाबले ऊंचे स्तर पर पहुंच गए हैं। मूंगफली के मजबूत भाव, गैस-डीजल की बढ़ती लागत और श्रम खर्च में इजाफे ने निर्माताओं की चिंता बढ़ा दी है। कारोबारियों के मुताबिक, शुरुआती दौर में तैयार माल के भाव गत सीजन के स्तर पर रखने का प्रयास रहेगा, लेकिन लागत का दबाव बना रहा तो इस बार गजक-पापड़ी के दाम करीब 10 प्रतिशत तक बढ़ सकते हैं। तिल 245 रुपए किलो, गुड़-चीनी भी महंगे : गजक-पापड़ी निर्माण में इस्तेमाल होने वाले प्रमुख कच्चे माल की कीमतों में इस बार उल्लेखनीय तेजी है। कारोबारियों के अनुसार, प्रीमियम क्वालिटी का गुड़ फिलहाल 59 से 63 रुपए प्रति किलो बिक रहा है, जबकि गत वर्ष इसका भाव करीब 50 रुपए प्रति किलो था। इसमें आगे भी लगभग 15 रुपए प्रति किलो तक तेजी की आशंका जताई जा रही है। इसी तरह चीनी के भाव पिछले साल के करीब 44 रुपए प्रति किलो से बढक़र 58 रुपए प्रति किलो तक पहुंच गए हैं। तिल भी 200 से 225 रुपए प्रति किलो के मुकाबले अब करीब 245 रुपए प्रति किलो मिल रहा है। कच्चे माल की इन कीमतों का सीधा असर गजक-पापड़ी की उत्पादन लागत पर पडऩा तय माना जा रहा है।स्थानीय आवक कमजोर, बाहर से मंगाना पड़ेगा तिल : मंडी कारोबारी मोतीलाल सेठिया के अनुसार, बीकानेर में फिलहाल तिल की स्थानीय आवक नहीं है। कोलायत क्षेत्र में तिल की बिजाई होती है, लेकिन इस बार बारिश की कमी के कारण फसल प्रभावित हुई है। ऐसे में गजक-पापड़ी निर्माताओं को तिल की जरूरत पूरी करने के लिए अलवर और भरतपुर जैसे क्षेत्रों पर निर्भर रहना पड़ सकता है। जैसलमेर, फलोदी और मोहनगढ़ से भी तिल की आपूर्ति होती है, लेकिन वहां से सीजन के दौरान भी सीमित मात्रा में, लगभग 10 से 20 बोरी तक ही माल आने की बात कारोबारी बता रहे हैं। स्थानीय उपलब्धता कम रहने से बाहर की मंडियों से खरीद पर निर्भरता बढ़ेगी। इससे परिवहन लागत और खरीद भाव, दोनों का असर कारोबार पर पड़ सकता है। मूंगफली में मजबूती, आवक बढऩे का इंतजार : सेठिया के मुताबिक, बीकानेर मंडी में फिलहाल प्रतिदिन करीब 5,000 बोरी मूंगफली की आवक हो रही है। इसके भाव 65 रुपए प्रति किलो से लेकर 78-80 रुपए प्रति किलो तक चल रहे हैं। सीजन में दीपावली के आसपास बेहतर क्वालिटी की मूंगफली की आवक बढऩे की उम्मीद है। नवरात्र के बाद खेतों से नई मूंगफली निकलनी शुरू होगी। कारोबारियों का अनुमान है कि आगे मूंगफली के भाव में 400 से 500 रुपए प्रति क्विंटल तक की तेजी आ सकती है। बेहतर क्वालिटी की मूंगफली के भाव 7,000 रुपए प्रति क्विंटल से नीचे रहने की संभावना कम जताई जा रही है। उनका कहना है कि किसानों को इससे कम भाव मिलने पर बिक्री के लिए बाजार में माल लाने में रुचि कम रह सकती है। दीपावली के बाद गुजरात के कारोबारी, स्टॉकिस्ट और मिल संचालकों की सक्रियता भी बढऩे की उम्मीद है। बीकानेर में करीब 100 गोटा और ऑयल मिलें होने से मूंगफली की औद्योगिक मांग भी बाजार को सहारा दे सकती है। इसी आधार पर कारोबारी फिलहाल बड़ी मंदी की संभावना कम मान रहे हैं। बड़ा बाजार स्थित बीकानेर के प्रमुख गजक-पापड़ी निर्माता मनोज तंवर के अनुसार, इस कारोबार का मुख्य सीजन लगभग तीन महीने का रहता है। तिल, गुड़, चीनी और मूंगफली जैसे कच्चे माल की खरीद के लिए दशहरे पर मुहूर्त किया जाएगा। फिलहाल निर्माता तैयार माल के भाव पिछले साल के स्तर पर रखने की कोशिश करेंगे। इसके बाद बाजार में तेजी-मंदी और कच्चे माल की लागत के अनुसार कीमतों में बदलाव किया जाएगा। तंवर का कहना है कि बाजार में फिलहाल उठाव कमजोर है और कारोबारी मौजूदा परिस्थितियों में खरीद को लेकर सतर्क हैं। लागत बढऩे के बावजूद तुरंत कीमतें बढ़ाना आसान नहीं है, इसलिए निर्माता खरीद से पहले बाजार की चाल का इंतजार कर रहे हैं। हालांकि, गैस, डीजल और श्रम लागत में वृद्धि को देखते हुए इस सीजन में गजक-पापड़ी के भाव पिछले साल की तुलना में करीब 10 प्रतिशत अधिक रह सकते हैं। कारोबार का समीकरण : इस बार गजक-पापड़ी बाजार में मांग के साथ-साथ कच्चे माल की उपलब्धता, खरीद के समय के भाव और निर्माताओं की लागत निर्णायक होगी। कमजोर स्थानीय तिल आपूर्ति और मूंगफली में संभावित तेजी के बीच कारोबारियों की नजर अब दशहरे की खरीद और दीपावली के आसपास मंडियों में आने वाली नई फसल पर टिकी है।


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