राजस्थान में ट्यूरिज्म इंवेस्टर्स को सरकारी लाभों का लाभ उठाने के लिए आवश्यक एंटाइटलमेंट सर्टिफिकेट (पात्रता प्रमाण पत्र) प्राप्त करने में हो रही देरी को लेकर चिंता व्यक्त की जा रही है। सूत्रों के अनुसार, कई निवेशकों ने समय पर प्रमाण पत्र न मिलने के कारण अपने प्रोजेक्ट्स के लिए निर्धारित सब्सिडी और अन्य वित्तीय लाभों का लाभ नहीं उठा पाये। पर्यटन विभाग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार, प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया में देरी के कारण निवेशकों को कई तरह की कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। विकेंद्रीकृत मॉडल की मांग : निवेशकों और उद्योग से जुड़े लोगों ने प्रमाण पत्र जारी करने के लिए एक विकेंद्रीकृत मॉडल अपनाने की मांग की है। उनका कहना है कि फिलहाल प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया केंद्रीयकृत है, जिससे देरी होती है। यदि इसे विकेंद्रीकृत किया जाए और जिला स्तर पर अधिकार दिए जाएं, तो प्रक्रिया तेज हो सकती है। उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि प्रमाण पत्र जारी करने में हो रही देरी से निवेशकों का भरोसा कम हो रहा है और नई परियोजनाओं पर असर पड़ सकता है। क्या कहते हैं अधिकारी? : पर्यटन विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया को सरल और तेज बनाने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि विभाग यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है कि पात्र निवेशकों को समय पर लाभ मिले। अधिकारियों के अनुसार, कुछ मामलों में दस्तावेजों की कमी या अन्य तकनीकी कारणों से देरी हो रही है। विभाग ने निवेशकों से अपील की है कि वे सभी आवश्यक दस्तावेज पूरे करके आवेदन करें ताकि प्रक्रिया जल्दी पूरी हो सके। निवेशकों की मांगें : निवेशकों ने मांग की है कि प्रमाण पत्र जारी करने की समय-सीमा तय की जाए। प्रक्रिया को ऑनलाइन और पारदर्शी बनाया जाए। जिला स्तर पर अधिकारियों को अधिक शक्तियां दी जाएं। एकल खिडक़ी प्रणाली लागू की जाए। उद्योग से जुड़े लोगों का मानना है कि यदि इन मांगों को पूरा किया जाए, तो राजस्थान में ट्यूरिज्म सेक्टर में निवेश बढ़ेगा और रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे।