पश्चिमी राजस्थान के शुष्क क्षेत्र में मिलेट खेती को नई तकनीक और अनुसंधान का आधार देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। बालोतरा जिले के गुड़ामालानी में इंडिया का पहला क्षेत्रीय मिलेट अनुसंधान केंद्र औपचारिक रूप से शुरू हो गया है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के भारतीय मिलेट्स अनुसंधान संस्थान के तहत संचालित केंद्र में आधुनिक प्रशासनिक एवं प्रयोगशाला भवन तथा मिलेट प्रौद्योगिकी पार्क का उद्घाटन हाल ही में किया गया। 98.8 एकड़ में तैयार हुआ सेंटर : गुड़ामालानी केंद्र की आधारशिला 27 सितंबर 2023 को तत्कालीन उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने रखी थी। ठीक तीन साल बाद केंद्र की नई सुविधाएं देश को समर्पित की गईं। राजस्थान सरकार ने केंद्र के लिए 98.8 एकड़ भूमि आवंटित की है। प्रशासनिक भवन, प्रयोगशालाओं और मिलेट प्रौद्योगिकी पार्क के निर्माण पर कुल 17.16 करोड़ रुपये का निवेश हुआ है। सूखा-रोधी फसलों पर रिसर्च : केंद्र का मुख्य फोकस पश्चिमी राजस्थान के कम पानी वाले और शुष्क क्षेत्रों के लिए मिलेट खेती को अधिक उत्पादक एवं जलवायु-अनुकूल बनाना है। यहां सूखा-रोधी किस्मों, नए हाइब्रिड, गुणवत्तापूर्ण बीज उत्पादन और फसल प्रबंधन तकनीकों पर शोध किया जाएगा। इसके साथ ही वैज्ञानिकों द्वारा विकसित तकनीकों को किसानों तक पहुंचाने और किसान-वैज्ञानिक संवाद को मजबूत करने पर जोर रहेगा। अखिल भारतीय समन्वित मिलेट अनुसंधान परियोजना के देशभर में 13 केंद्र पहले से कार्यरत हैं। अब तक राष्ट्रीय स्तर की अनुसंधान समन्वय गतिविधियां जोधपुर स्थित कृषि विश्वविद्यालय से संचालित होती थीं। नई व्यवस्था में ढ्ढष्ट्रक्र की जोधपुर के अनुसंधान समन्वय गतिविधियों को गुड़ामालानी स्थानांतरित किया गया है। यहां देश के विभिन्न हिस्सों में विकसित मिलेट की कई हाइब्रिड किस्में लगाई गई हैं, जिससे किसान खेत में इनका प्रदर्शन देखकर अपने क्षेत्र के लिए उपयुक्त किस्मों को समझ सकेंगे। राजस्थान देश के प्रमुख मिलेट उत्पादक राज्यों में शामिल है। ऐसे में गुड़ामालानी केंद्र प.राजस्थान में मिलेट अनुसंधान, किसान प्रशिक्षण, गुणवत्तापूर्ण बीज, तकनीक हस्तांतरण और जलवायु-अनुकूल खेती को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।