राज्य सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि भूमि को गैर-कृषि उपयोग के लिए परिवर्तित करने के नए नियमों को अधिसूचित कर दिया है। इन नियमों के तहत वर्ष 2007 की व्यवस्था को समाप्त करते हुए ऑनलाइन और स्वचालित मंजूरी प्रणाली लागू की गई है। राजस्थान भू-राजस्व (ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि भूमि का गैर-कृषि प्रयोजनों के लिए उपयोग) नियम, 2026 2 नवंबर, 2026 से लागू होंगे।नई व्यवस्था के तहत उपखंड अधिकारी (स्ष्ठह्र) निर्धारित प्राधिकारी होंगे, जबकि सभी आवेदन एकीकृत ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से जमा करने होंगे। आवेदक द्वारा आवश्यक दस्तावेज और प्रीमियम भुगतान का प्रमाण अपलोड करने के बाद अनुमति आदेश स्वत: जारी हो जाएंगे। आवेदन शुल्क आवासीय इकाइयों के लिए 2,000 रुपये और अन्य उपयोगों के लिए 20,000 रुपये निर्धारित किया गया है। उद्योग जगत से जुड़े हितधारकों ने कहा कि इन सुधारों से मंजूरी मिलने में होने वाली देरी काफी कम हो जाएगी। फेडरेशन ऑफ हॉस्पिटैलिटी एंड टूरिज्म ऑफ राजस्थान (स्न॥ञ्जक्र) के अध्यक्ष सुरेंद्र सिंह शाहपुरा ने कहा कि मंजूरी के एक महीने बाद राजस्व रिकॉर्ड अब स्वत: अपडेट हो जाएंगे और उसी के अनुसार भूमि-उपयोग का वर्गीकरण भी बदल दिया जाएगा। इससे उस प्रक्रिया से छुटकारा मिलेगा जिसमें पहले काफी समय लगता था। हालांकि, सरकार ने कुछ श्रेणियों की भूमि के रूपांतरण पर प्रतिबंध बरकरार रखा है। इनमें अधिग्रहण के अधीन भूमि, संरक्षित क्षेत्र और पर्यावरण-संवेदनशील क्षेत्र, जल निकाय और जलग्रहण क्षेत्र, विरासत कानूनों के अंतर्गत आने वाली भूमि, निर्धारित सडक़ और रेलवे गलियारे तथा रक्षा, पेट्रोलियम और अन्य महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों के आसपास के क्षेत्र शामिल हैं।
पर्यटन क्षेत्र के लिए अब भूमि रूपांतरण के आवेदन जिला कलेक्टरों के बजाय स्ष्ठह्र स्तर पर निपटाए जाएंगे। इससे मंजूरी की प्रक्रिया तेज होने की उम्मीद है। फेडरेशन ऑफ होटल्स ऑफ राजस्थान के सचिव रणविजय सिंह ने कहा कि नए नियमों के तहत पर्यटन क्षेत्र को अंतत: उद्योग का दर्जा मिलने वाले लाभ दिए गए हैं। सिंह ने कहा कि कई अन्य विभाग पहले ही उद्योग के लाभ दे चुके थे। अब राजस्व विभाग ने भी ऐसा किया है, जिससे पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। अधिसूचना में रूपांतरण प्रीमियम में भी संशोधन किया गया है और इन्हें मुख्य रूप से ष्ठरुष्ट दरों के एक प्रतिशत से जोड़ा गया है। आवासीय, सार्वजनिक उपयोगिता और औद्योगिक उपयोग के लिए प्रीमियम 5 प्रतिशत; वाणिज्यिक, संस्थागत, चिकित्सा और आवासीय परियोजनाओं के लिए 10 प्रतिशत; खाद्य-प्रसंस्करण इकाइयों के लिए 2.5 प्रतिशत; और नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं के लिए 0.5 प्रतिशत निर्धारित किया गया है। पर्यटन इकाइयों, स्टेडियमों, खेल मैदानों, खेल परिसरों तथा कुछ सरकारी या स्थानीय प्राधिकरण की परियोजनाओं को 100 प्रतिशत प्रीमियम छूट मिलेगी। हालांकि, होटल, रिसॉर्ट और अन्य वाणिज्यिक इकाइयों पर डीएलसी दर का 10 प्रतिशत प्रीमियम लगेगा। छूट का लाभ चुनिंदा ग्रीन और व्हाइट श्रेणी के उद्योगों, निर्दिष्ट ढ्ढञ्ज पार्कों और परिसरों तथा स्ष्ट/स्ञ्ज खातेदारों के स्वामित्व वाली भूमि पर स्थापित नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं को भी मिलेगा। नए नियमों में भूमि-उपयोग के मानदंड भी निर्धारित किए गए हैं। आवासीय कॉलोनियों में कुल भूमि का 40 प्रतिशत हिस्सा सडक़ों और सार्वजनिक सुविधाओं के लिए आरक्षित करना होगा। इसमें अधिकतम 5 प्रतिशत भूमि का उपयोग वाणिज्यिक और संस्थागत उद्देश्यों के लिए किया जा सकेगा। औद्योगिक क्षेत्रों में 70 प्रतिशत भूमि का उपयोग उद्योग के लिए और शेष 30 प्रतिशत भूमि का उपयोग बुनियादी ढांचे, खुले स्थानों और सहायक सुविधाओं के लिए करना होगा।