पश्चिमी राजस्थान के ऊन उद्योग से निकलने वाले अपशिष्ट जल के वैज्ञानिक प्रबंधन और उससे उपयोगी संसाधन विकसित करने की संभावनाओं पर अभियांत्रिकी महाविद्यालय (ईसीबी) बीकानेर में वूल वेस्टवॉटर टू वेल्थ विषयक कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यक्रम में जीरो लिक्विड डिस्चार्ज (जेडएलडी) तकनीक को ऊन प्रसंस्करण उद्योग के लिए लागत नियंत्रण, जल पुनर्चक्रण और पर्यावरणीय अनुपालन का प्रभावी समाधान बताया गया। ईसीबी की जेडएलडी लैब में आयोजित कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने कहा कि ऊन उद्योग में जल की बढ़ती लागत और पर्यावरणीय मानकों की सख्ती को देखते हुए अपशिष्ट जल का उपचार एवं पुन: उपयोग उद्योग की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने में सहायक हो सकता है। जेडएलडी तकनीक के माध्यम से अपशिष्ट जल को उपचारित कर पुनर्चक्रित जल तथा अन्य उपयोगी उप-उत्पाद प्राप्त किए जा सकते हैं। ईसीबी के प्राचार्य डॉ. संजीव जैन ने कहा कि सतत औद्योगिक विकास के लिए पर्यावरणीय प्रबंधन और तकनीकी नवाचार आवश्यक हैं। उन्होंने कहा कि संस्थान द्वारा किए जा रहे शोध एवं तकनीकी प्रयास उद्योगों की वास्तविक चुनौतियों के समाधान में उपयोगी सिद्ध हो सकते हैं। कुलसचिव अमित सोनी ने कहा कि पश्चिमी राजस्थान के ऊन उद्योग में अपशिष्ट जल प्रबंधन एक महत्वपूर्ण विषय है तथा जेडएलडी आधारित समाधान उद्योगों को पर्यावरणीय अनुपालन के साथ संसाधनों के बेहतर उपयोग का अवसर प्रदान कर सकते हैं। कार्यक्रम के संयोजक डॉ. प्रवीण राजपुरोहित ने ऊन उद्योग में ‘वेस्ट टू वेल्थ’ मॉडल की संभावनाओं पर प्रकाश डाला। संचालन रवि शंकर भोभिया ने किया। कार्यशाला में ईसीबी एवं बीटीयू के विद्यार्थियों, शोधार्थियों और संकाय सदस्यों ने भाग लिया।