स्टील इंडस्ट्री में मजबूत डिमांड का फायदा जयपुर बेस्ड राघव प्रोडक्टिविटी एन्हांसर्स को फाइनेंशियल ईयर 2026-27 के पहले जून 2026 क्वार्टर में मिला है। दुनिया की सबसे बड़ी सिलिका रैमिंग मास निर्माता कंपनी ने जून 2026 क्वार्टर में अब तक की सबसे अधिक रेवेन्यू, ऑपरेटिंग प्रॉफिट और नेट प्रॉफिट दर्ज किए हैं। सबसे खास बात यह रही कि कंपनी की प्रॉफिटेबिलिटी रेवेन्यू से भी तेज रफ्तार से बढ़ी है। यह संकेत देता है कि कंपनी सिर्फ ज्यादा बिक्री नहीं कर रही, बल्कि हर टन प्रोडक्ट पर पहले के मुकाबले अधिक कमाई भी कर रही है। जून 2026 क्वार्टर में कंपनी की रेवेन्यू 50 फीसदी बढक़र 58 करोड़ रुपए के मुकाबले 87 करोड़ रुपए दर्ज की गई। इस दौरान कंपनी का नेट प्रॉफिट 67 फीसदी बढक़र 20 करोड़ रुपए हो गया, जो पिछली समान अवधि में 12 करोड़ रुपए था। वहीं कंपनी का ऑपरेटिंग प्रॉफिट 62 फीसदी बढक़र 16 करोड़ रुपए के मुकाबले 26 करोड़ रुपए हो गया। वहीं सेल्स वोल्यूम 25 फीसदी बढक़र 97 हजार मीट्रिक टन रही। लगातार चौथे क्वार्टर में प्रति मीट्रिक टन प्रॉफिटेबिलिटी में सुधार यह दिखाता है कि कंपनी का बिजनेस मॉडल पहले से ज्यादा मजबूत होता जा रहा है। बेहतर ऑपरेशनल एफिशिएंसी, कॉस्ट कंट्रोल और रिसर्च एंड डेवलपमेंट पर फोकस का फायदा सीधे कंपनी के मार्जिन में दिखाई दे रहा है। कंपनी के बेहतर नतीजों के पीछे सबसे बड़ा कारण वैल्यू ऐडेड प्रोडक्ट्स की बढ़ती हिस्सेदारी रही। फाउंड्री से जुड़े प्रोडक्ट्स और रिसर्च एंड डेवलपमेंट से तैयार किए गए नए वैरिएंट्स की बिक्री बढऩे से रियलाइजेशन बेहतर हुआ और मार्जिन में लगातार सुधार आया। यही वजह है कि कंपनी की प्रॉफिटेबिलिटी लगातार रेवेन्यू से तेज गति से बढ़ रही है। ग्लोबल स्तर पर फ्रेट चार्ज में कई गुना बढ़ोतरी और युद्ध से जुड़े व्यवधानों के बावजूद कंपनी का एक्सपोर्ट बिजनेस मजबूत बना रहा। पिछले क्वार्टर की तुलना में एक्सपोर्ट वॉल्यूम 34 फीसदी बढ़ा। कंपनी ने बढ़ी हुई ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट ग्राहकों तक पहुंचा दी, जिससे उसके मार्जिन पर ज्यादा असर नहीं पड़ा। राजस्थान के निवाई प्लांट में चल रहा ब्राउनफील्ड एक्सपेंशन अक्टूबर 2026 तक पूरा होने की उम्मीद है। इसके बाद कंपनी की प्रोडक्शन कैपेसिटी मौजूदा सालाना 4.14 लाख मीट्रिक टन से बढक़र सालाना 5.34 लाख मीट्रिक टन हो जाएगी। इसके साथ ही कंपनी देश के प्रमुख स्टील क्लस्टर्स के पास नई मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स लगाने के विकल्पों पर भी काम कर रही है। कंपनी का लक्ष्य आने वाले वर्षों में सालाना 10 लाख मीट्रिक टन कैपेसिटी और करीब 30 फीसदी मार्केट शेयर हासिल करना है। राघव प्रोडक्टिविटी के लिए एक और बड़ा सकारात्मक संकेत स्टील इंडस्ट्री में इंडक्शन फर्नेस रूट का बढ़ता इस्तेमाल है। भारत में अब 40 फीसदी से अधिक स्टील प्रोडक्शन इसी रूट से हो रहा है। ग्रीन स्टील को बढ़ावा देने वाली सरकारी नीतियां और अफ्रीका व मिडिल ईस्ट जैसे क्षेत्रों में डीआरआई आधारित स्टील कैपेसिटी का विस्तार सिलिका रैमिंग मास की डिमांड को आगे भी मजबूत बनाए रख सकता है। कंपनी का कहना है कि लंबे समय के रॉ मटेरियल सप्लाई कॉन्ट्रैक्ट्स उसे कीमतों में उतार-चढ़ाव और सप्लाई से जुड़े जोखिमों से काफी हद तक सुरक्षित रखते हैं। यही वजह है कि मौजूदा ग्लोबल चुनौतियों के बावजूद कंपनी लगातार बेहतर ग्रोथ और मजबूत मार्जिन बनाए रखने में सफल रही है। यदि अक्टूबर तक एक्सपेंशन तय समय पर पूरा हो जाता है, तो आने वाले क्वार्टर्स में कंपनी की रेवेन्यू और प्रॉफिटेबिलिटी दोनों में और मजबूत बढ़त देखने को मिल सकती है।